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ब्रह्मांडीय जलप्रपात

In अंतरिक्ष, निहारीका, ब्रह्माण्ड on अक्टूबर 25, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

NGC 1999: 10 प्रकाश वर्ष उंचा  ब्रह्मांडीय जलप्रपात

NGC 1999: 10 प्रकाश वर्ष उंचा ब्रह्मांडीय जलप्रपात

इस ब्रह्माण्डीय जलप्रपात निहारिका का निर्माण कैसे हुआ ? कोई नही जानता! इस चित्र मे प्रस्तुत संरचना NGC 1999 का भाग है जो कि बृहद ओरीयान आण्विक बादल संरचना( Great Orion Molecular Cloud complex ) का एक भाग है। यह ब्रह्माण्ड की सबसे रहस्यमयी संरचनाओं मे से एक है। इस क्षेत्र को HH-22 के नाम से भी जाना जाता है।

इस चित्र मे दिखायी दे रही गैस की धारा लगभग १० प्रकाशवर्ष लंबाई मे है, और यह अनेको रंगो को प्रदर्शित करती है। एक अवधारणा के अनुसार गैस की यह धारा पास के आण्विक बादल से एक नये तारे से प्रवाहित सौर वायु के टकराव के फलस्वरूप बन रही है। लेकिन यह अवधारणा यह बताने मे असमर्थ रहती है कि इस जलप्रपात की धारा और अन्य धूंधली धारायें मुड़कर एक चमकीले बिंदू पर मील रही है, जो कि एक रेडियो तरंगो का अतापी(non thermal) श्रोत है। यह रेडियो श्रोत इस मुड़ी हुयी धारा के उपर बायें स्थित है।

एक दूसरी अवधारणा के अनुसार यह असामान्य रेडियो श्रोत किसी युग्म तारे से उत्पन्न हो रही है जिसमे एक तारा श्वेत वामन(White Dwarf), न्युट्रान तारा(Neutron Star) या श्याम विवर(Black Hole) है और यह जलप्रपात इस तीव्र ऊर्जावान प्रणाली से उत्सर्जित गैसीय जेट धारा है। लेकिन इस तरह की प्रणाली मे एक्स रे(X Ray) का भी उत्सर्जन होता है लेकिन किसी एक्स रे श्रोत का पता नही चला है।
वर्तमान मे रहस्य बरकरार है। भविष्य के ज्यादा सावधानीपुर्वक किये गये निरीक्षण इस रहस्य के आवरण को हटा सकते है।

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लुब्धक तारा अर्थात सिरिअस तारा

In तारे on सितम्बर 27, 2011 at 7:41 पूर्वाह्न

लुब्धक तारा(Sirius) और मृग नक्षत्र(Orion)

लुब्धक तारा(Sirius) और मृग नक्षत्र(Orion)

लुब्धक तारा और मृग नक्षत्र

लुब्धक तारा और मृग नक्षत्र

लुब्धक तारा(Sirius) रात्री आकाश मे सबसे ज्यादा चमकदार तारा है। यह सूर्य के सबसे समीप के तारों मे से एक है, इसकी दूरी 9 प्रकाशवर्ष है। सौर मंडल से दूरी मे इसका स्थान सांतवां है।

रात्री आकाश मे इसे खोजना आसान है। मृग नक्षत्र के मध्य(Orion Belt) के तारो की सीध मे इसे आसानी से देखा जा सकता है। यह सूर्य के तुलना मे एक दीप्तीमान तारा है तथा सूर्य से दोगुना भारी है।

लुब्धक तारा वास्तविकता मे युग्म तारा है, इसमे प्रमुख चमकदार तारा सिरिअस ए है, जबकि इसका दूसरा तारा सिरिअस बी एक श्वेत वामन(White Dwarf) तारा है। यह श्वेत वामन तारा सूर्य के तुल्य द्रव्यमान रखता है। यह दोनो तारे एक दूसरे की परिक्रमा 50 वर्षो मे करते है।

इस युग्म तारा प्रणाली मे श्वेत वामन तारे के होने का अर्थ यह है कि यह तारा युग्म हमेशा ऐसा नही रहा होगा। किसी समय भूतकाल मे श्वेत वामन तारा लाल महादानव(Red Gaint) के रूप मे रहा होगा। इसके प्रमाण है कि यह सिरिअस बी का लाल महादानव तारे से श्वेत वामन तारे मे रूपांतरण पिछले कुछ हजार वर्षो मे हुआ होगा। प्राचिन कथाओ के अनुसार सिरिअस भूतकाल मे लाल दिखायी देता था जो की सीरीयस बी की श्वेत वामन तारे के रूप मे होती हुयी मृत्यु की अंतिम लाल चमक थी।

इस तारे को ग्रीक मिथको के अनुसार सिरिअस(Sirius) कहा जाता है। इसे श्वान तारा(Dog Star) भी कहा जाता है। इस तारे ने मिश्र की सभ्यता मे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। इसके उदय होने का काल, निल नदी की बाढ़ के समय से मेल खाता है। निल नदी की बाढ़ पर मिश्र का कृषि चक्र निर्भर है।

दक्षिणी वलय निहारिका(Southern Ring Nebula)

In तारे, निहारीका on जुलाई 12, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

एन जी सी 3132(बडे़ आकार मे देखने चित्र पर क्लीक करें)

एन जी सी 3132(बडे़ आकार मे देखने चित्र पर क्लीक करें)

यह एक ग्रहीय निहारिका है जो एक तारे की मृत्यु के पश्चात बनी है। इस निहारिका का नाम एन जी सी 3132 है। इसे दक्षिणी वलय निहारिका(Southern Ring Nebula) भी कहा जाता है। इसे निर्माण करने वाला श्वेत वामन तारा इस चित्र के मध्य मे दिखने वाला धुंधला तारा है। तेज चमक वाला तारा इस श्वेत वामन तारे का साथी तारा है।

इस निहारिका का निर्माण उस समय हुआ होगा ,जब सूर्य के आकार के तारे का ईंधन खत्म हो गया और गुरुत्वाकर्षण द्वारा उत्पन्न संपिड़न तथा केन्द्र की उष्मा के टकराव के फलस्वरूप इसमे एक विस्फोट हुआ होगा। तारे के शेष केन्द्रक से श्वेत वामन तारे का जन्म हुआ और शेष पदार्थ की परतो से यह खूबसूरत निहारिका।

इस चित्र के केन्द्र मे निला रंग यह दर्शा रहा है कि यह भाग अभी भी गर्म है और इसे धूंधले श्वेत वामन तारे से उष्मा मील रही है। इस निहारिका के असामान्य आकार और सममीती के पिछे के कारण अज्ञात हैं।