अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

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ब्रह्माण्ड की गहराईयों मे श्याम विवर द्वारा एक तारे की हत्या

In अंतरिक्ष, तारे on मई 3, 2012 at 7:00 पूर्वाह्न

खगोल वैज्ञानिको ने अंतरिक्ष मे एक नृशंष हत्या का नजारा देखा है, एक तारा अनजाने मे एक महाकाय श्याम विवर (Supermassive Black Hole) के पास फटकने की गलती कर बैठा। इस गलती की सजा के फलस्वरुप उस महाकाय दानव ने उस तारे को चीर कर निगल लीया।

तारे की हत्या के प्रमाण

तारे की हत्या के प्रमाण

इन चित्रो मे आप इस घटना के पहले की स्थिति बायें तथा पश्चात दायें देख सकते है। उपर की पंक्ति के चित्र गैलेक्स(GALEX) उपग्रह से लिये गये हैं, जो अंतरिक्ष की तस्वीरें पराबैंगनी किरणो(Ultraviolet) मे लेता है। दूसरी पंक्ति के चित्र हवाई द्विप स्थित शक्तिशाली दूरबीन से लिये गये हैं।

इस तारे की मृत्यु के चित्र हमे जून 2010 मे प्राप्त हुये। यह घटना एक दूरस्थ आकाशगंगा के मध्य हुयी है जोकि हमसे 2.7 अरब प्रकाशवर्ष दूर है। इस आकाशगंगा के मध्य एक महाकाय श्याम विवर है जिसका द्रव्यमान करोड़ो सूर्यों के द्रव्यमान के तुल्य है। हमारी आकाशगंगा ’मंदाकिनी’ के मध्य भी इसी श्याम विवर के जैसा एक श्याम विवर है। इस घटना मे मृतक तारा श्याम विवर की दिर्घवृत्तीय(elliptical ) कक्षा मे था। लाखों अरबो वर्षो मे यह दारा एक लाल दानव के रूप मे अपनी मत्यु के समीप पहुंच रहा था, साथ ही समय के साथ इसकी कक्षा छोटी होते गयी और यह श्याम विवर के समीप आ पहुंचा। श्याम विवर के गुरुत्व ने इस तारे को चीर कर निगल लिया।

चित्र मे दिखायी दे रही चमक, इस तारे के पदार्थ के इस श्याम विवर के एक स्पायरल के रूप मे परिक्रमा करते हुये निगले जाने के समय उत्पन्न हुयी है। इस प्रक्रिया मे खगोलिय पदार्थ किसी तारे द्वारा निगले जाने से पहले श्याम विवर के चारों ओर एक चपटी तश्तरी बनाता है, यह तश्तरी अत्याधिक गर्म हो जाती है और अत्याधिक ऊर्जा वाली गामा किरण, एक्स किरण और पराबैंगनी किरणे उत्सर्जित करती है। यह चमक इस घटना के पहले से 350 गुणा ज्यादा तेज थी। इस घटना मे इस तारे का कुछ पदार्थ भी अंतरिक्ष मे फेंका गया।

इस घटना का एनीमेशन निचे दिये गये वीडियो मे देखा जा सकता है।

इस घटना मे उत्सर्जित पदार्थ मुख्यतः हिलीयम है, जोकि यह दर्शाता है कि यह तारा वृद्ध था; तारे अपनी उम्र के साथ हायड्रोजन को जलाकर हिलीयम बनाते है।

इस तरह की घटनायें दुर्लभ हैं तथा किसी आकाशगंगा मे लगभग 100,000 वर्षो मे एक बार होती है। हमारे वैज्ञानिक लगभग 100,000 आकाशगंगाओं पर नजरे टिकाये हुये है जिससे हर वर्ष मे एक बार इस घटना के होने कि संभावना होती है।

2011 मे स्विफ्ट ने एक ऐसी ही घटना देखी थी। स्विफ्ट इस तरह की घटनाओं को दर्ज करने के लिये बेहतर है क्योंकि उसकी गति अच्छी है।

खगोलशास्त्रियों के लिये यह घटना सामान्य है लेकिन मृत्यु कितनी भयानक हो सकती है!

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ब्रह्मांडीय जलप्रपात

In अंतरिक्ष, निहारीका, ब्रह्माण्ड on अक्टूबर 25, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

NGC 1999: 10 प्रकाश वर्ष उंचा  ब्रह्मांडीय जलप्रपात

NGC 1999: 10 प्रकाश वर्ष उंचा ब्रह्मांडीय जलप्रपात

इस ब्रह्माण्डीय जलप्रपात निहारिका का निर्माण कैसे हुआ ? कोई नही जानता! इस चित्र मे प्रस्तुत संरचना NGC 1999 का भाग है जो कि बृहद ओरीयान आण्विक बादल संरचना( Great Orion Molecular Cloud complex ) का एक भाग है। यह ब्रह्माण्ड की सबसे रहस्यमयी संरचनाओं मे से एक है। इस क्षेत्र को HH-22 के नाम से भी जाना जाता है।

इस चित्र मे दिखायी दे रही गैस की धारा लगभग १० प्रकाशवर्ष लंबाई मे है, और यह अनेको रंगो को प्रदर्शित करती है। एक अवधारणा के अनुसार गैस की यह धारा पास के आण्विक बादल से एक नये तारे से प्रवाहित सौर वायु के टकराव के फलस्वरूप बन रही है। लेकिन यह अवधारणा यह बताने मे असमर्थ रहती है कि इस जलप्रपात की धारा और अन्य धूंधली धारायें मुड़कर एक चमकीले बिंदू पर मील रही है, जो कि एक रेडियो तरंगो का अतापी(non thermal) श्रोत है। यह रेडियो श्रोत इस मुड़ी हुयी धारा के उपर बायें स्थित है।

एक दूसरी अवधारणा के अनुसार यह असामान्य रेडियो श्रोत किसी युग्म तारे से उत्पन्न हो रही है जिसमे एक तारा श्वेत वामन(White Dwarf), न्युट्रान तारा(Neutron Star) या श्याम विवर(Black Hole) है और यह जलप्रपात इस तीव्र ऊर्जावान प्रणाली से उत्सर्जित गैसीय जेट धारा है। लेकिन इस तरह की प्रणाली मे एक्स रे(X Ray) का भी उत्सर्जन होता है लेकिन किसी एक्स रे श्रोत का पता नही चला है।
वर्तमान मे रहस्य बरकरार है। भविष्य के ज्यादा सावधानीपुर्वक किये गये निरीक्षण इस रहस्य के आवरण को हटा सकते है।

श्याम विवर(Black Hole) ने तारे को निगला

In अंतरिक्ष, तारे, ब्रह्माण्ड on जून 28, 2011 at 6:10 पूर्वाह्न

श्याम विवर द्वारा किसी तारे का निगला जाना और एक्रीशन डिस्क(Accretion Disk) का निर्माण

ब्रिटेन के खगोलविदों ने श्याम विवर में फंस कर एक तारे की मौत होने के सबूत जुटाने का दावा किया है।

बताया जा रहा है कि एक तारा परिभ्रमण के दौरान एक श्याम विवर के इतना क़रीब आ गया कि परिणाम धीमी मौत के अलावा कुछ और हो ही नहीं सकता था। वॉरिक विश्वविद्यालय के खगोलविद डॉ. एंड्र्यू लेवन की टीम ने इस साल 28 मार्च 2011 को अंतरिक्ष में गामा किरणों का एक तूफ़ान (Gama ray Burst – GRB)दर्ज़ किया। आमतौर पर किसी बूढ़े तारे में विस्फोट के दौरान गामा किरणों का रेला निकलता है।

लेकिन ऐसी स्थिति में विकिरण का महाप्रवाह(GRB) एक बार ही होता है, जबकि मार्च में पहली बार दिखा गामा किरणों का प्रवाह ढाई महीने बाद अब भी रह-रह कर ज़ोर पकड़ रहा है।

भारी ऊर्जा


डॉ. लेवन इसे किसी तारे के श्याम विवर की चपेट में आने का नतीजा बता रहे हैं. उन्होंने कहा,

“जितनी मात्रा में ऊर्जा सामने आ रही है, वो वैसी स्थिति में संभव है जब किसी तारे को एक श्याम विवर में फेंक दिया जाए। “

खगोलविदों का मानना है कि हर आकाशगंगा के केंद्र में एक श्याम विवर होता है। लेकिन उसकी उपस्थिति का स्वतंत्र रूप से अंदाज़ा लगा पाना असंभव है क्योंकि श्याम विवर में महागुरुत्व की अवस्था होती है जिसके चंगुल से प्रकाश तक नहीं निकल सकता है। ब्रह्मांड के किसी कोने में श्याम विवर की उपस्थिति का हमें तभी पता चलता है जब तारे जैसा कोई बड़ा खगोलीय पिंड उसका शिकार बनता है।

कोई तारा श्याम विवर में समाने की प्रक्रिया में पहले अपना गोल आकार खोता है। महागुरुत्व के असर से वह लगातार पिचकता जाता है।

तारे का स्वतंत्र अस्तित्व पूरी तरह ख़त्म हो उससे पहले उससे रह-रह कर एक्स और गामा किरणों का रेला निकलता है जो धरती पर रेडियो दूरबीनों के ज़रिए देखा जा सकता है।

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श्रोत : बी बी सी  से साभार