अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

Archive for मई, 2011|Monthly archive page

आसमान मे सात बहने : कृत्तिका नक्षत्र

In तारे on मई 31, 2011 at 10:15 पूर्वाह्न

कृतिका नक्षत्र या सात बहने

कृतिका नक्षत्र या सात बहने

यह चित्र एक जा्ने पहचानने तारामंडल का है। यह २७ नक्षत्रो मे से एक ’कृत्तिका’ नक्षत्र है। पश्चिम मे इसे ’सेवन सीस्टर्स(सात बहने)’ के नाम से जाना जाता है। यह तारामंडल हर सभ्यता द्वारा जाना जाता रहा है। न्युजीलैंड के माओरी आदिवासी इसे मातारीकी कहते है, मध्यपूर्व एशीया मे इसे ‘परवीन’ के नाम से जाना जाता है, माया सभ्यता इसे तझ्बेक कहती थी।

खगोलशास्त्र मे इस तारामंडल को प्लेअडीज कहते है, इसका एक नाम एम ४५ भी है। यह एक तारो का खूला समूह है(Open Star Cluster),जिसमे बी वर्ग के अधेड़(आधी उम्र के) तारे हैं। यह पृथ्वी के नज़दीकी तारामंडलो मे से एक है और खूली आंखो से आसानी से देखा जा सकता है।

इस तारा मंडल के तारे निले है, अर्थात अत्यंत गर्म है, जिनका जन्म पिछले १००० लाख वर्ष मे हुआ है। इस तारामंडल के चमकीले तारो के आसपास धूल के बादल है जिन्हे इन तारो के जन्म के समय बचे हुए अवशेष माना जाता रहा है। लेकिन अब यह माना जाता है कि यह तारा मंडल वर्तमान मे इस धूल के बादल के मध्य से गूजर रहा है और इस तारामंडल का इस धूल के बादल से कोई संबध नही है।

खगोल विज्ञानी मानते है कि यह तारा मंडल अगले २५०० लाख वर्ष तक बना रहेगा, उसके पश्चात आकाशगंगा के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव से बिखर जायेगा।

उत्तरी गोलार्ध में इसे लगभग पूरे वर्ष देखा जा सकता है। इसे आकाश में मृग नक्षत्र(Orion) के ऊपर दायें एक गुच्छे के रूप में देखा जा सकता है ।

मृग नक्षत्र(Orion) और कृतिका नक्षत्र(pleiades)

मृग नक्षत्र(Orion) और कृतिका नक्षत्र(pleiades)

 

Advertisements

मंगल शोध वाहन ’स्प्रिट’ के अभियान का अंत: अलविदा ’स्प्रिट’!

In अंतरिक्ष वाहन on मई 26, 2011 at 7:20 पूर्वाह्न

मंगल ग्रह पर स्प्रिट शोध वाहन

मंगल ग्रह पर स्प्रिट शोध वाहन

नासा ने एक वर्ष तक “स्प्रिट” (मगंल ग्रह शोध वाहन) से पुनः संपर्क स्थापित करने के असफल प्रयासो के पश्चात इस अभियान को बंद करने का निर्णय लिया है। ४ जनवरी २००४ को प्रक्षेपित स्प्रिट वाहन अब सभी प्रायोगिक कारणो से ’मृत’ है।

स्प्रिट वाहन से अंतिम संदेश मार्च २०१० मे प्राप्त हुआ था, उस समय मंगल ग्रह पर स्प्रिट यान के स्थान पर गर्मियों का प्रारंभ हो रहा था। यह आशा थी कि गर्मियों मे स्प्रिट वाहन की बैटरीयां पुनः चार्ज होकर वाहन को पुनर्जिवित कर देंगी। लेकिन कई महीनो के प्रयासो के बाद भी स्प्रिट से संपर्क स्थापित नही हो पाया है।

कुछ ही महीनो पश्चात एक नये मंगल अनुसंधान वाहन “क्युरीओसीटी(जिज्ञासा)” का प्रक्षेपण होने जा रहा है। यह वाहन गोल्फ गाड़ी के आकार का है और स्प्रिट से बेहतर उपकरण लिए है। स्प्रिट के संचार मे प्रयोग किये जा रहे संचार उपग्रहो तथा मंगल की कक्षा के उपग्रहों को अब “क्युरीओसीटी” के लिये उपयोग मे लाया जायेगा।

स्प्रिट की मृत्यु दुःखद है। यह एक बेहतरीन वाहन था। इस वाहन ने आशा से ज्यादा कार्य किया है,अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा। इसे ९० मंगल दिवसो (९२ पृथ्वी दिवसो) के लिए बनाया गया था लेकिन इसने छः वर्षो से ज्यादा कार्य किया है। एक कार या कम्प्यूटर की कल्पना किजीये जिसने अपनी वारंटी से २५ गुणा ज्यादा कार्य किया हो! या किसी मनुष्य के १५०० वर्षो तक जीवन की कल्पना किजीये!

स्प्रिट यह नासा के सबसे ज्यादा सफल अभियानो मे से एक है। इसका जुड़वा “ओपरचुनीटी” अभी भी कार्यरत है।

इतिहास मे जब भी सफल अंतरिक्ष अभियानो का उल्लेख होगा उसमे शायद “वायेजर यानो” के साथ स्प्रिट का नाम भी सुनहरे अक्षरो मे लिखा जायेगा!

अलविदा “स्प्रिट” !

धूल के बादलो से रेखांकित आकाशगंगा एन जी सी ७०४९

In आकाशगंगा on मई 24, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

धूल के बादलों से रेखांकित आकाशगंगा एन जी सी ७०४९

धूल के बादलों से रेखांकित आकाशगंगा एन जी सी ७०४९

इस असामान्य आकाशगंगा का निर्माण कैसे हुआ होगा? यह कोई नही जानता है क्योंकि यह पेंचदार(Spiral) आकाशगंगा एन जी सी ७०४९ है ही इतनी विचित्र! एन जी सी ७०४९ मे सबसे विचित्र एक धूल और गैस का वलय है हो इस आकाशगंगा के बाह्य रूपरेखा मे दिख रहा है। यह धूल का वलय जैसे इस आकाशगंगा के छायाचित्र मे बाह्य सीमाओ को रेखांकित कर रहा हो!

यह अपारदर्शी वलय इतना गहरा है कि यह अपने पिछे लाखों तारो को ढंक दे रहा है। यदि इस गहरे वलय को छोड़ दे तो यह आकाशगंगा एक दीर्घवृताकार(Elliptical) आकाशगंगा है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इसमे कुछ तारो के गोलाकार समूह(Globular Cluster) भी है। उपर दिया गया चित्र हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला से लिया गया है।

इस चित्र के उपर मे चमकता तारा हमारी आकाशगंगा (मंदाकिनी) का है जो इस आकाशगंगा से संबधित नही है। एन जी सी ७०४९ आकाशगंगा मे अपने समूह की आकाशगंगाओं मे सबसे चमकदार है, जो यह दर्शाती है कि यह आकाशगंगा बहुत सी आकाशगंगाओ के टकराव और एकीकरण से बनी है।

यह आकाशगंगा १५० हजार प्रकाशवर्ष चौड़ी तथा पृथ्वी से १००० लाख प्रकाशवर्ष दूर है।

अमरीकी अंतरिक्ष यान ‘एंडेवर’ की अंतिम उड़ान

In अंतरिक्ष यान on मई 17, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

अमरीकी अंतरिक्ष यान एंडेवर की अंतिम उड़ान

अमरीकी अंतरिक्ष यान एंडेवर की अंतिम उड़ान

अमरीकी अंतरिक्ष यान ‘एंडेवर‘ सोमवार 16 मई 2011 की सुबह फ़्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सैंटर से अपने अंतिम मिशन पर रवाना हो गया। ये यान ‘अल्फ़ा मैग्नेटिक स्पैक्टोमीटर(Alpha Magnetic Spectrometer)‘ नाम के  कण भौतिकी उपकरण(Particle Physics  experiment module) को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र में पहुंचाएगा।

इस अंतिम मिशन में ‘एंडेवर’ जो ‘अल्फ़ा मैग्नेटिक स्पेक्टोमीटर‘ ले गया है उसे तैयार करने में 17 साल लगे हैं। इस यंत्र को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र के ऊपर लगाया जाएगा जहां से वो ब्रह्मांडीय किरणों(Cosmic Rays) का व्यापक सर्वेक्षण करेगा। ये अत्यधिक ऊर्जा वाले कण हैं जो ब्रह्मांड के सभी कोनों से पृथ्वी की दिशा में तेज़ी से बढ़ते हैं। वैज्ञानिकों को आशा है कि इन कणो के गुणधर्मो का पता लगाने से इस तरह के प्रश्नो के उत्तर ढूंढने में मदद मिलेगी कि ये ब्रह्मांड कैसे अस्तित्व में आया और इसका निर्माण कैसे हुआ।

जब ‘एंडेवर‘ अपना मिशन पूरा करके लौटेगा तो अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के शटल बेड़े में केवल ‘एटलांटिस‘ बचेगा। ‘एटलांटिस‘ इस साल जुलाई में अपना अंतिम मिशन पूरा करेगा।

नासा के प्रशासक चार्ल्स बोल्डन ने एक बयान में कहा,

“एंडेवर की अंतिम उड़ान मानवीय अंतरिक्ष उड़ान में अमरीकी कौशल और नेतृत्व का प्रमाण है”।

तीस साल का शटल कार्यक्रम पूरा करने के बाद अमरीका अपने अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र पहुंचाने के लिए रूसी ‘सोयूज़‘ यानों का प्रयोग करेगा।

इस दशक के मध्य तक कई अमरीकी व्यावसायिक यान भी सेवा में आ जाएंगे। नासा इन यानों में अपने अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सीटें ख़रीदेगा।  जिसका मतलब ये हुआ कि नासा पृथ्वी की कक्षा का चक्कर लगाने के लिए जिन यानों का प्रयोग करेगा वो उसके नहीं होंगे। इस योजना से ये लाभ होगा कि नासा अपने संसाधनों का प्रयोग अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणाली तैयार करने के लिए कर सकेगा जिससे आगे चलकर अंतरिक्षयात्री चंद्रमा, क्षुद्रग्रहों और मंगल ग्रह तक की यात्रा कर सकेंगे।

  • एंडेवर का निर्माण 1986 में ‘चैलेंजर‘ यान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के बाद किया गया था। 
  • इसने अपनी पहली उड़ान 7 मई 1992 को की थी।
  •  ‘एंडेवर’ ने अंतरिक्ष में 280 दिन बिताकर पृथ्वी के कुल 4,429 चक्कर लगाए हैं।
  • इस अंतिम मिशन को पूरा कर लेने के बाद एंडेवर 16 करोड़ 60 लाख किलोमीटर की यात्रा पूरी कर लेगा।
  • अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र के निर्माण के पहले मिशन पर यही यान गया था और हबल दूरबीन की मरम्मत का भी पहला मिशन इसी ने पूरा किया था।

बृहस्पति,मंगल,बुध और शुक्र एक रेखा मे !

In ग्रह on मई 13, 2011 at 5:35 पूर्वाह्न

चार ग्रह एक रेखा मे

चार ग्रह एक रेखा मे

शुक्रवार १३ मई २०११, को चार ग्रह बृहस्पति, मंगल, बुध और शुक्र एक रेखा मे आ जायेंगे। यह दुर्लभ घटना दक्षिणी गोलार्ध मे देखी जा सकेगी।

  • यह दुर्लभ घटना हर ५० से १०० वर्षो मे एक बार होती है।
  • विश्व का अंत नही होने जा रहा है, आकाशीय पिंडों के देखने के लीए एक सुनहरा अवसर है।
  • ऐसी स्थिती भविष्य मे अब २०५६ मे होगी।

यदि आप इस दुर्लभ घटना को नही देख पाये हो तो आप कल (१४ मई) को भी देख सकते है। १४ मई को स्थिति थोड़ी भिन्न होगी लेकिन ज्यादा नही।

ये ग्रह ऐसी स्थिती मे पिछली बार अक्टूबर १९१० मे आये थे। यह स्थिति हर ५० से १०० वर्षो मे होती है लेकिन दिनांक १३ तथा दिन शुक्रवार को दुर्लभ रूप से होती है।

बिल्ली की आंखे(Cat’s Eye Nebula) : सितारों की खूबसूरत मृत्यु !

In अंतरिक्ष, निहारीका, ब्रह्माण्ड on मई 10, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

बिल्ली की आंखो के जैसी ग्रहीय निहारिका

बिल्ली की आंखो के जैसी ग्रहीय निहारिका

अंतरिक्ष की गहराईयो मे यह विशालकाय बिल्ली की आंख(Cat’s Eye Nebula) के जैसी ग्रहीय निहारिका(planetary nebula) पृथ्वी से तीन हजार प्रकाश वर्ष दूर है। इस निहारिका को एन जी सी ६५४३(NGC 6543) भी कहते है। यह निहारिका सूर्य के जैसे तारे की मृत्यु के क्षणो को दर्शाती है। इस निहारिका के मध्य के तारे ने अपनी मृत्यु के समय गैस की तहो को एक के बाद एक अनेक विस्फोटो मे इस तरह छीतरा दिया था। अब यह तारा एक श्वेत वामन तारे(White Dwarf) के रूप मे है, जो धीरे धीरे धुंधला होते हुये विलुप्त हो जायेगा(अर्थात धीरे धीरे ठंडा होते हुये प्रकाश का उत्सर्जन बंद कर देगा)।

ये तारे अपनी मृत्यु के समय इतना खूबसूरत पैटर्न कैसे बनाते है ?

इस प्रक्रिया को अभी तक पूरी तरह नही समझा जा सका है। हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला से लिए गये इस चित्र मे अंतरिक्ष मे फैली यह विशालकाय आंख आधा प्रकाशवर्ष चौड़ी है। बिल्ली की आंखो को घूरते हुये खगोलविज्ञानी इसमे अपने सूर्य की मृत्यु के क्षणो को देखते है जिसके भाग्य मे अपनी मृत्यु के पश्चात ऐसी ही निहारिका मे परिवर्तन निश्चित है।

ज्यादा दूर नही बस ५ अरब वर्षो के बाद!

क्या दक्षिणी गोलार्ध मे चंद्रमा उल्टा दिखेगा ?

In अंतरिक्ष, सौरमण्डल on मई 3, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

चंद्रमा उत्तरी गोलार्ध मे(न्युयार्क)

चंद्रमा उत्तरी गोलार्ध मे(न्युयार्क)

चंद्रमा दक्षिणी गोलार्ध मे(सीडनी)

चंद्रमा दक्षिणी गोलार्ध मे(सीडनी)

यह दोनो चित्र चंद्रमा के है! क्या आप दोनो चित्रों मे अंतर पता कर सकते है ?

उपर वाला चित्र उत्तरी गोलार्ध (न्युयार्क स. रा. अमरीका) से लिया गया है, जबकि निचे वाला चित्र दक्षिणी गोलार्ध(सीडनी आस्ट्रेलिया) से लिया गया है।

यदि आप ध्यान से देंखे तो पता चलेगा कि निचे वाला चित्र उपर वाले चित्र का उलटा है! ऐसा क्यों ?

उत्तर आसान है। पृथ्वी अंतरिक्ष मे घूमती एक विशालकाय गेंद है। यदि आप उत्तरी गोलार्ध मे खड़े है तब आप के सापेक्ष मे दक्षिणी गोलार्ध मे खड़ा व्यक्ति उल्टा खड़ा है अर्थात सीर निचे और पैर उपर ! आपको चन्द्रमा जैसा दिखेगा, दक्षिणी गोलार्ध मे खड़े व्यक्ति को उल्टा दिखेगा! निचले चित्र को देखे !

उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध के सापेक्ष चंद्रमा

उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध के सापेक्ष चंद्रमा

है ना मनोरंजक तथ्य !