अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

20 मई 2012 का कंकणाकृति सूर्यग्रहण

In तारे, सौरमण्डल on मई 22, 2012 at 5:20 पूर्वाह्न

20 मई 2012 के कंकणाकृति सूर्यग्रहण की खूबसूरत तस्वीर।

20 मई 2012 का कंकणाकृति सूर्यग्रहण

20 मई 2012 का कंकणाकृति सूर्यग्रहण

हम जानते है कि सूर्यग्रहण पृथ्वी और सूर्य के मध्य चंद्रमा के आ जाने के कारण से होता है।

सामान्य परिस्थितियों मे पृथ्वी से सूर्य का दृश्य आकार और चंद्रमा का दृश्य आकार समान होता है। सूर्य चंद्रमा से हजारो गुणा बड़ा है लेकिन वह पृथ्वी से चंद्रमा की तुलना मे कई गुणा दूर है, जिससे दोनो का दृश्य आकार लगभग समान है। इसलिये जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के मध्य आता है तब वह सूर्य को पूरी तरह से ढक लेता है तब खग्रास सूर्यग्रहण अर्थात पूर्ण सूर्यग्रहण होता है। यह स्थिति सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी के पूरी तरह से एक सीध मे आने पर ही होती है।

जब चंद्रमा सूर्य के एकदम सामने नही हो पाता है तब खंडग्रास सूर्यग्रहण होता है। यह स्थिति सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी के पूरी तरह से एक सीध मे नही आने से होती है।

सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी के पूरी तरह से एक सीध मे आने पर भी खग्रास सूर्यग्रहण कुछ किलोमीटर चौड़ी पट्टी मे ही दिखायी देता है। इस पट्टी मे ही चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढक पाता है, इस पट्टी के दोनो ओर कुछ दूरी तक खंडग्रास सूर्यग्रहण दिखायी देता है तथा उसके बाहर सूर्यग्रहण दिखायी नही देता है।

लेकिन इन दोनो सूर्यग्रहण से भिन्न और दुर्लभ सूर्यग्रहण होता है कंकणाकृति सूर्यग्रहण। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा वृत्ताकार कक्षा मे न कर, दीर्घवृत्ताकार कक्षा मे करता है जिससे चंद्रमा की पृथ्वी से दूरी कम ज्यादा होते रहती है। एक विशेष परिस्थिति मे जब चंद्रमा पृथ्वी से अधिकतम दूरी पर होता है और चंद्रमा पृथ्वी सूर्य एक सीध मे आ जाते है, तब चंद्रमा का दृश्य आकार सामान्य से कम होने के कारण सूर्य को पूरी तरह ढंक नही पाता है ; जिससे सूर्य एक स्वर्ण कंगन(कंकण) के जैसे दिखता है। इसे  कंकणाकृति सूर्य ग्रहण कहते है। 20 मई 2012 का सूर्यग्रहण इसी प्रकार का था।

  1. Very lucid account,written in a matter eaisily understable to lay man.

  2. सुन्दर चित्र कंकणाकृति सूर्यग्रहण का|
    आशा है की इस प्रतिक्रिया को आप अन्यथा नहीं लेंगे| टंकण सम्बंधित कुछ भूलें हैं| आपसे आग्रह है की उन्हें सुधार दीजिये|
    जैसे
    १. इस पट्टी मे ही चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढंक (ढक) पाता है
    २. दिर्घवृत्ताकार (दीर्घवृत्ताकार) कक्षा मे करता है

इस लेख पर आपकी राय:

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: