अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

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अपनी अंतिम उड़ान पर ‘डिस्कवरी’

In अंतरिक्ष यान on फ़रवरी 25, 2011 at 8:11 पूर्वाह्न

अपनी अंतिम उड़ान के लिये तैयार डिस्कवरी

अपनी अंतिम उड़ान के लिये तैयार डिस्कवरी

डिस्कवरी अपनी अंतिम उड़ान पर

डिस्कवरी अपनी अंतिम उड़ान पर

सितंबर १९८८ मे डिस्कवरी ने दोबारा उड़ान भरी थी, चैलेंजर दुर्घटना के बाद अंतरिक्ष शटल की यह पहली उड़ान थी। इस अवसर पर ‘विज्ञान प्रगति’ का एक अंतरिक्ष विशेषांक आया था। अंतरिक्ष और खगोलशास्त्र मे मेरी रूची इस उड़ान के बाद ही जागृत हुयी थी। इसके बाद विज्ञान प्रगति मे ही श्री देवेन्द्र मेवाड़ी की सौर मंडल पर एक लेख श्रंखला ने मेरी इस रूची को स्थायित्व दिया था।
आज डिस्कवरी अंतरिक्ष शटल अपनी अंतिम उड़ान भर चूका है, एक युग का अंत होने जा रहा है।

डिस्कवरी अंतरिक्ष शटल  का नाम कैप्टन जेम्स कूक की तीसरी और अंतिम यात्रा के ब्रिटिश जहाज एच एम एस डिस्कवरी पर रखा गया था। इस का निर्माण कार्य जनवरी १९७९ मे प्रारंभ हुआ था। इस यान की पहली उड़ान ३० अगस्त १९८४ मे हुयी थी।

डिस्कवरी अंतरिक्ष शटल ने ही हब्बल अंतरिक्ष दूरबीन को स्थापित किया था। इस दूरबीन की दूसरी और तीसरी मरम्मत का कार्य भी डिस्कवरी ने ही किया था। इस शटल ने युलीसीस उपग्रह और तीन टीडीआरएस उपग्रह को कक्षा मे स्थापित किया था। चैलेंजर(१९८६) और कोलबीया(२००३) शटल दूर्घटनाओं के बाद अंतरिक्ष मे लौटने वाला यान डिस्कवरी ही था। डिस्कवरी ने जोन ग्लेन को ७७ वर्ष की उम्र मे प्रोजेक्ट मर्क्युरी के अंतर्गत सर्वाधिक उम्र का अंतरिक्ष यात्री बनने का श्रेय दिया था।

डिस्कवरी अब तक ३८ उड़ान भर चूका है और अब अपनी अंतिम ३९ उड़ान मे है। यह यान २४ फवरी २०११ तक पृथ्वी की ५२४७ परिक्रमा कर चूका है, और अंतरिक्ष मे ३२२ दिन रह चूका है। किसी अन्य यान की तुलना मे इसने सबसे ज्यादा उड़ाने भरी है।

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अंतरिक्ष मे वेलेंटाईन डे

In अंतरिक्ष, निहारीका on फ़रवरी 15, 2011 at 6:13 पूर्वाह्न

अंतरिक्ष मे वेलेंटाईन डे

अंतरिक्ष मे वेलेंटाईन डे

W5 एक निहारिका है जो ६००० प्रकाश वर्ष दूर कैसीओपीया(Cassiopeia) तारामंडल की ओर है। यह विशालकाय है और आकाश मे 2×1.5 डीग्री तक चौड़ी है(पुर्ण चंद्रमा से १५ गुणा बड़ी)। इस निहारिका मे जो दिल का आकार बना है वह इस चित्र मे दिखायी दे रहे निले रंग के विशालकाय तारो द्वारा प्रवाहित गैसीय वायु द्वारा बनी हुयी एक गैस की कन्दरा है। इस जगह की गैस निले तारो ने बहा दी है। ये नये निले तारे इस महाकाय निहारिका के मध्य गैस का बुलबुला बना रहे है।
यह चित्र अवरक्त किरणो से लिया गया है और तारो का रंग निला नही है। यह प्रकाश ३.६ माइक्रान तरंगदैर्ध्य का है।

उत्तरी अमेरिका निहारिका

In अंतरिक्ष, निहारीका on फ़रवरी 13, 2011 at 6:07 पूर्वाह्न

उत्तरी अमरीका निहारिका (बाएं दृश्य प्रकाश में, दायें अवरक्त प्रकाश में )

उत्तरी अमरीका निहारिका (बाएं दृश्य प्रकाश में, दायें अवरक्त प्रकाश में )

अपने विकास की हर अवस्था में तारे ! नासा की अंतरिक्ष वेधशाला स्पिटज़र से लिए इस चित्र में आप देख सकते है ,धुल भरे छोटे बिन्दूओ से लेकर नए जवान तारो तक !

इस खगोलीय समुदाय का नाम है, उत्तरी अमेरिका निहारिका. दृश्य प्रकाश की किरणों में यह क्षेत्र उत्तरी अमरीका महाद्वीप के जैसे लगता है, आश्चर्य जनक रूप से मेक्सिको खाड़ी की समानता पर ध्यान दीजिये ! लेकिन स्पिटज़र के अवरक्त किरणों से लिए गए इस चित्र में महाद्वीप अदृश्य हो जाता है और बचता है एक धुल और नए तारो से भरा हुआ एक बड़ा सा बादल !

लुइसा रेबुल्ल जो नासा के पासाडेना कैलिफोर्निया में कैलिफोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलोजी के स्पिटज़र विज्ञानं केंद्र में काम करती है, के अनुसार

इस चित्र में मुझे सबसे ज्यादा अद्भूत यहाँ लगता है कि दृश्य प्रकाश का चित्र अवरक्त प्रकाश के चित्र से कितना अलग है. हम अवरक्त चित्र में कितना ज्यादा देख सकते है?  स्पिटज़र का चित्र धुल और नए तारे से भरे इस बादल की कितनी सारी विशेषताओं को दर्शाता है.

रेबुल्ल और उनकी टीम ने इस बादल में २००० से ज्यादा नए और नए तारे बनाने के उम्मीदवार तारो का पता लगाया है. इसके पहले ऐसे सिर्पफ २०० तारो की जानकारी थी. ऐसा इसलिए था क्योंकि नए तारे धुल के कम्बल में ढंके हुए थे और दृश्य प्रकाश में छुपे हुए थे. स्पिटज़र का अवरक्त कैमरा धुल में छुपे हुए तारो को देख सकता है.

एक तारे का जन्म सिकुड़ते हुए धुल और गैस के बादल में होता है. जैसे ही पदार्थ अंदर की और सिकुड़ता है, एक गैस और धुल का  तश्तरी नुमा आकार उसके आसपास घूमना शुरू हो जाता है, नया बनाता हुआ तारा एक घूमते हुए भौरे जैसा होता है. एक गैस की तेज धारा इस तश्तरी के ऊपर और निचे लम्बवत बहना शुरू हो जाती है. जैसे ही तारा बड़ा होना शुरू होता है इस धुल और गैस की  तश्तरी से ग्रह बनाना शुरू हो जाते है. अधिकतर गैस ख़त्म हो जाती है और एक सौर मंडल जैसे एक नया परिवार बन जाता है.

स्पिटज़र का यहाँ चित्र तारे के जन्म से लेकर किशोर अवस्था के इन सभी पडावो को दिखाता है, जिसमे धुल के सिकुड़ते बादल, गैस की तेज धारा प्रवाहित करते नवजात तारे, नए ग्रहों के नए पिता तारे तथा परिपक्व तारे.

रेबुल्ल के अनुसार

यहाँ चित्र एक व्यस्त क्षेत्र का क्षेत्र का चित्र है, जहाँ हर जगह तारे  है, उत्तरी अमरीका क्षेत्र में, उसके सामने , उसके पीछे. जो तारे इस क्षेत्र में नहीं है उन्हें हम मिलावट क्षेत्र  कहते है. स्पिटज़र से हम इस मिलावट क्षेत्र को अलग कर सकते है और और इस क्षेत्र ने नए तारो को इस क्षेत्र से अलग पुराने तारो को पहचान सकते है.

उत्तरी अमरीका निहारिका अपने साथ एक रहस्य समेटे है, इसके ऊर्जा श्रोत को लेकर. कोई भी इस निहारिका के ऊर्जा श्रोत बड़े महाकाय तारो के समूह को पहचान नहीं पाया है. स्पिटज़र का चित्र इस निहारिका के मेक्सिको खाड़ी क्षेत्र के पीछे के हिस्से के बारे में छुपे इन महाकाय तारो के बारे में संकेत देता है. यह स्पिटज़र की २४ माइक्रोन तक की रोशनी पकड़ लेने वाली दूरबीन की तस्वीर में मेक्सिको की खाड़ी क्षेत्र के चमक से दिखाई  पड़ता है. यह रोशनी मेक्सिको खाड़ी क्षेत्र के गहरे रंग के बदलो के पीछे से आ रही है, जो पकाश किरणों को अवरूद्ध कर देते है.

इस निहारिका से पृथ्वी की दूरी भी एक रहस्य है, कुछ अनुमानों से यह १८०० प्रकाश वर्ष है. स्पिटज़र इस संख्या को को सही अनुमान के निकट ले जाएगा.

 

मंगल ग्रह पर “आपर्च्युनिटी” के सात वर्ष

In अंतरिक्ष यान, अंतरिक्ष वाहन on फ़रवरी 2, 2011 at 10:42 पूर्वाह्न

मंगल पर आपर्च्युनिटी वाहन (पूर्णाकार के लिये चित्र पर क्लिक करे)

मंगल पर आपर्च्युनिटी वाहन (पूर्णाकार के लिये चित्र पर क्लिक करे)

लाल ग्रह मंगल की सतह पर सात वर्ष पूरे करने के बाद मंगल अण्वेषण वाहन “आपर्च्युनीटी” ९० मीटर चौड़े सांता मारिया क्रेटर के किनारे खड़ा है। आश्चर्यजनक रूप से “आपर्च्युनीटी” और उसके जुड़वा “रोवर स्प्रिट” को केवल ३ महीने लंबे प्राथमिक अभियान के लिये २००३ भेजा गया था, सात वर्ष पूरे करने के बाद भी ये वाहन कार्यरत है। यह वाहन मंगल ग्रह पर अब तक २६ किमी से ज्यादा  यात्रा कर चूका है। गोल्फ गाड़ी या आटो रिक्षा के आकार के इस वाहन और उसकी छाया को इस चित्र मे देखा जा सकता है। यह चित्र भी इसी मंगल अण्वेषण वाहन “आपर्च्युनीटी” से लिया गया है।