अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

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पानी रे पानी! कितना पानी ?

In अश्रेणीबद्ध on मई 30, 2012 at 9:12 पूर्वाह्न

पृथ्वी और युरोपा मे पानी की मात्रा की तुलना

पृथ्वी और युरोपा मे पानी की मात्रा की तुलना

यह माना जाता है कि पृथ्वी के तीन चौथाई भाग मे पानी है लेकिन पानी की कुल मात्रा कितनी है ?

इस चित्र के दाहीने भाग मे पृथ्वी है, और उस पर निला गोला पृथ्वी पर पानी की कुल मात्रा दर्शा रहा है। पृथ्वी की तीन चौथाई सतह पर पानी है लेकिन इसकी गहराई पृथ्वी की त्रिज्या की तुलना मे कुछ भी नही है। पृथ्वी के संपूर्ण पानी से बनी गेंद की त्रिज्या लगभग 700 किमी होगी, जोकि चंद्रमा की त्रिज्या के आधे से भी कम है। यह मात्रा शनि के चंद्रमा रीआ से थोडी़ ज्यादा है, ध्यान रहे कि रीआ मुख्यतः पानी की बर्फ से बना है।

चित्र मे बायें बृहस्पति का चंद्रमा युरोपा और उसपर पानी की मात्रा दिखायी गयी है। युरोपा मे पानी की मात्रा पृथ्वी पर पानी की मात्रा से भी ज्यादा है! युरोपा पर पानी उसकी सतह के नीचे लगभग 80-100 किमी की गहरायी तक है। युरोपा के पानी से बनी गेंद  की त्रिज्या व्यास 877 किमी होगी।

इसलिये वैज्ञानिक आजकल युरोपा मे जीवन की संभावना देख रहे हैं!

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अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र की ओर निजी कंपनी की प्रथम उड़ान : स्पेस एक्स

In अंतरिक्ष, अंतरिक्ष यान, वैज्ञानिक on मई 23, 2012 at 5:43 पूर्वाह्न

स्पेस एक्स फाल्कन 9 की उड़ान

स्पेस एक्स फाल्कन 9 की उड़ान

22 मई 2012, 7:44 UTC पर एक नया इतिहास रचा गया। पहली बार अंतरिक्ष मे एक निजी कंपनी का राकेट प्रक्षेपित किया गयास्पेस एक्स का राकेट फाल्कन 9 अंतरिक्ष मे अपने साथ ड्रेगन कैपसूल को लेकर अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र की ओर रवाना हो गया। इससे पहले की सभी अंतरिक्ष उड़ाने विभिन्न देशो की सरकारी कंपनीयों जैसे नासा, इसरो, रासकास्मोस द्वारा ही की गयी है।

यह एक अच्छी खबर है। यह स्पेस एक्स का दूसरा प्रयास था, कुछ दिनो पहले राकेट के एक वाल्व मे परेशानी आने के कारण प्रक्षेपण को स्थगित करना पढा़ था।

यह प्रक्षेपण सफल रहा, कोई तकनिकी समस्या नही आयी। राकेट के कक्षा मे पहुंचने के बाद ड्रेगन यान राकेट से सफलता से अलग हो गया और उसने अपने सौर पैनलो फैला दिया। यह इस अभियान मे एक मील का पत्त्थर था। जब यह कार्य संपन्न हुआ तब स्पेस एक्स की टीम के सद्स्यो की उल्लासपूर्ण चित्कार इसके सीधे वेबकास्ट मे स्पष्ट रूप से सुनी जा सकती थी।

आप इस वेबकास्ट को यहां पर देख सकते है। इस अभियान के मुख्य बिंदू इस वीडीयो मे 44:30 मिनिट पर जब मुख्य इंजिन का प्रज्वलन खत्म हुआ, 47:30 मिनिट पर जब दूसरे चरण का ज्वलन प्रारंभ हुआ, तथा 54:00 मिनिट पर ड्रेगन कैपसूल का अलग होना है। डैगन कैपसूल के सौर पैनलो का फैलना 56:20 मिनिट पर है।

इस विडीयो को ध्यान से देखिये और 56:20 मिनिट पर डैगन कैपसूल के सौर पैनलो का फैलते समय स्पेस एक्स टीम के आनंद मे सम्मिलित होईये।

यह प्रक्षेपण महत्वपूर्ण क्यों है ? क्योंकि पहली बार किसी निजी कंपनी द्वारा अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से एक कैपसूल जोड़ने का प्रयास है। वर्तमान मे नासा के पास अंतरिक्ष मे मानव भेजने की क्षमता नही है, स्पेस एक्स की योजना के तहत वह 2015 तक मानव अभियान के लिये सक्षम हो जायेगा। यदि यह अभियान सफल रहता है तब अनेक निजी कंपनीया अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र पर आपूर्ति की दौड़ मे आगे आगे आयेंगी। स्पर्धा से किमतें कम होती है, जब अन्य राष्ट्र अंतराष्ट्रिय अंतरिक्ष केंद्र के बजट मे कटौती कर रहे हो, यह एक बड़ी राहत लेकर आया है। इससे अंतराष्ट्रिय अंतरिक्ष केंद्र की आयू मे बढोत्तरी होगी और अंतरिक्ष मे मानव की स्थायी उपस्थिति की संभावना बढ़ जायेगी।

अंतरिक्ष अभियानो मे यह एक नये दौर की शुरुवात है। शुक्रवार 25 मई को ड्रैगन कैपसूल अंतराष्ट्रिय अंतरिक्ष केंद्र से जुड़ने का प्रयास करेगा। इस केपसुल मे अंतराष्ट्रिय अंतरिक्ष केंद्र के लिये रसद और उपकरण हैं।

स्पेस एक्स और उसके वैज्ञानिको को बधाई!

20 मई 2012 का कंकणाकृति सूर्यग्रहण

In तारे, सौरमण्डल on मई 22, 2012 at 5:20 पूर्वाह्न

20 मई 2012 के कंकणाकृति सूर्यग्रहण की खूबसूरत तस्वीर।

20 मई 2012 का कंकणाकृति सूर्यग्रहण

20 मई 2012 का कंकणाकृति सूर्यग्रहण

हम जानते है कि सूर्यग्रहण पृथ्वी और सूर्य के मध्य चंद्रमा के आ जाने के कारण से होता है।

सामान्य परिस्थितियों मे पृथ्वी से सूर्य का दृश्य आकार और चंद्रमा का दृश्य आकार समान होता है। सूर्य चंद्रमा से हजारो गुणा बड़ा है लेकिन वह पृथ्वी से चंद्रमा की तुलना मे कई गुणा दूर है, जिससे दोनो का दृश्य आकार लगभग समान है। इसलिये जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के मध्य आता है तब वह सूर्य को पूरी तरह से ढक लेता है तब खग्रास सूर्यग्रहण अर्थात पूर्ण सूर्यग्रहण होता है। यह स्थिति सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी के पूरी तरह से एक सीध मे आने पर ही होती है।

जब चंद्रमा सूर्य के एकदम सामने नही हो पाता है तब खंडग्रास सूर्यग्रहण होता है। यह स्थिति सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी के पूरी तरह से एक सीध मे नही आने से होती है।

सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी के पूरी तरह से एक सीध मे आने पर भी खग्रास सूर्यग्रहण कुछ किलोमीटर चौड़ी पट्टी मे ही दिखायी देता है। इस पट्टी मे ही चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढक पाता है, इस पट्टी के दोनो ओर कुछ दूरी तक खंडग्रास सूर्यग्रहण दिखायी देता है तथा उसके बाहर सूर्यग्रहण दिखायी नही देता है।

लेकिन इन दोनो सूर्यग्रहण से भिन्न और दुर्लभ सूर्यग्रहण होता है कंकणाकृति सूर्यग्रहण। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा वृत्ताकार कक्षा मे न कर, दीर्घवृत्ताकार कक्षा मे करता है जिससे चंद्रमा की पृथ्वी से दूरी कम ज्यादा होते रहती है। एक विशेष परिस्थिति मे जब चंद्रमा पृथ्वी से अधिकतम दूरी पर होता है और चंद्रमा पृथ्वी सूर्य एक सीध मे आ जाते है, तब चंद्रमा का दृश्य आकार सामान्य से कम होने के कारण सूर्य को पूरी तरह ढंक नही पाता है ; जिससे सूर्य एक स्वर्ण कंगन(कंकण) के जैसे दिखता है। इसे  कंकणाकृति सूर्य ग्रहण कहते है। 20 मई 2012 का सूर्यग्रहण इसी प्रकार का था।

ब्रह्माण्ड की गहराईयों मे श्याम विवर द्वारा एक तारे की हत्या

In अंतरिक्ष, तारे on मई 3, 2012 at 7:00 पूर्वाह्न

खगोल वैज्ञानिको ने अंतरिक्ष मे एक नृशंष हत्या का नजारा देखा है, एक तारा अनजाने मे एक महाकाय श्याम विवर (Supermassive Black Hole) के पास फटकने की गलती कर बैठा। इस गलती की सजा के फलस्वरुप उस महाकाय दानव ने उस तारे को चीर कर निगल लीया।

तारे की हत्या के प्रमाण

तारे की हत्या के प्रमाण

इन चित्रो मे आप इस घटना के पहले की स्थिति बायें तथा पश्चात दायें देख सकते है। उपर की पंक्ति के चित्र गैलेक्स(GALEX) उपग्रह से लिये गये हैं, जो अंतरिक्ष की तस्वीरें पराबैंगनी किरणो(Ultraviolet) मे लेता है। दूसरी पंक्ति के चित्र हवाई द्विप स्थित शक्तिशाली दूरबीन से लिये गये हैं।

इस तारे की मृत्यु के चित्र हमे जून 2010 मे प्राप्त हुये। यह घटना एक दूरस्थ आकाशगंगा के मध्य हुयी है जोकि हमसे 2.7 अरब प्रकाशवर्ष दूर है। इस आकाशगंगा के मध्य एक महाकाय श्याम विवर है जिसका द्रव्यमान करोड़ो सूर्यों के द्रव्यमान के तुल्य है। हमारी आकाशगंगा ’मंदाकिनी’ के मध्य भी इसी श्याम विवर के जैसा एक श्याम विवर है। इस घटना मे मृतक तारा श्याम विवर की दिर्घवृत्तीय(elliptical ) कक्षा मे था। लाखों अरबो वर्षो मे यह दारा एक लाल दानव के रूप मे अपनी मत्यु के समीप पहुंच रहा था, साथ ही समय के साथ इसकी कक्षा छोटी होते गयी और यह श्याम विवर के समीप आ पहुंचा। श्याम विवर के गुरुत्व ने इस तारे को चीर कर निगल लिया।

चित्र मे दिखायी दे रही चमक, इस तारे के पदार्थ के इस श्याम विवर के एक स्पायरल के रूप मे परिक्रमा करते हुये निगले जाने के समय उत्पन्न हुयी है। इस प्रक्रिया मे खगोलिय पदार्थ किसी तारे द्वारा निगले जाने से पहले श्याम विवर के चारों ओर एक चपटी तश्तरी बनाता है, यह तश्तरी अत्याधिक गर्म हो जाती है और अत्याधिक ऊर्जा वाली गामा किरण, एक्स किरण और पराबैंगनी किरणे उत्सर्जित करती है। यह चमक इस घटना के पहले से 350 गुणा ज्यादा तेज थी। इस घटना मे इस तारे का कुछ पदार्थ भी अंतरिक्ष मे फेंका गया।

इस घटना का एनीमेशन निचे दिये गये वीडियो मे देखा जा सकता है।

इस घटना मे उत्सर्जित पदार्थ मुख्यतः हिलीयम है, जोकि यह दर्शाता है कि यह तारा वृद्ध था; तारे अपनी उम्र के साथ हायड्रोजन को जलाकर हिलीयम बनाते है।

इस तरह की घटनायें दुर्लभ हैं तथा किसी आकाशगंगा मे लगभग 100,000 वर्षो मे एक बार होती है। हमारे वैज्ञानिक लगभग 100,000 आकाशगंगाओं पर नजरे टिकाये हुये है जिससे हर वर्ष मे एक बार इस घटना के होने कि संभावना होती है।

2011 मे स्विफ्ट ने एक ऐसी ही घटना देखी थी। स्विफ्ट इस तरह की घटनाओं को दर्ज करने के लिये बेहतर है क्योंकि उसकी गति अच्छी है।

खगोलशास्त्रियों के लिये यह घटना सामान्य है लेकिन मृत्यु कितनी भयानक हो सकती है!