अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

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एक नया सुपरनोवा PTF 11kly: सप्तऋषि तारामंडल के पास एक तारे की मृत्यु

In अंतरिक्ष, तारे on अगस्त 30, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

22 अगस्त ,23 अगस्त,24 अगस्त को लिये गये चित्र

22 अगस्त ,23 अगस्त,24 अगस्त को लिये गये चित्र

पृथ्वी के काफी समीप लगभग 210 लाख प्रकाश वर्ष दूर एक नये सुपरनोवा विस्फोट को देखा गया है। 25 अगस्त 2011 को देखे गये इस सुपरनोवा के बारे मे खगोलविदो का मानना है कि इस सुपरनोवा को उन्होने “विस्फोट के कुछ ही घंटो बाद”* खोज निकाला है। यह आधुनिक दूरबीनों और संगणको के प्रयोग से यह दुर्लभ उपलब्धि प्राप्त हुयी है।

पृथ्वी के इतने समीप और इतनी जल्दी सुपरनोवा की खोज से खगोलविज्ञानी काफी उत्साहित है और उन्होने हर उपलब्ध दूरबीन को इस सुपरनोवा की ओर मोड़ दिया है, जिसमे हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला भी शामील है।

इस सुपरनोवा को PTF 11kly नाम दिया गया है, यह विस्फोट पीनव्हील आकाशगंगा(Pinwheel Galaxy) मे हुआ है। यह आकाशगंगा “बीग डीप्पर(Big Dipper)” क्षेत्र मे है जिसे उर्षा मेजर(Ursa Major constellation) नक्षत्र मंडल भी कहा जाता है। इस सुपरनोवा की खोज पालोमर ट्राजीएन्ट फ़ैक्टरी सर्वे (PTF) ने की है। इस सर्वे का उद्देश्य किसी भी खगोलीय घटना को घटते समय ही पता लगाना है।

सप्तऋषि तारा मंडल  उर्षा मेजर नक्षत्र  का ही एक भाग है।

इस सुपरनोवा को देखने वाली वेधशाला बार्कले लैब के वैज्ञानिक पीटर नाट के अनुसार

“हमने इस सुपरनोवा को विस्फोट के तुरंत पश्चात* ही देख लिया है। PTF 11kly हर मिनिट के साथ चमकीला होते जा रहा है। PTF 11kly का निरिक्षण किसी जंगल की सैर के जैसे है।”

PTF सर्वे रात्री आकाश के निरिक्षण के लिए पालोमर वेधशाला दक्षिण कैलीफोर्निया स्थित एक 48 इंच की रोबोटिक सैमुअल आस्चिन दूरबीन(Samuel Oschin Telescope) का प्रयोग करता है। निरिक्षण के तुरंत पश्चात आंकड़ो को विश्लेषण के लिए 400 मील दूर NERSC की प्रयोगशाला मे भेजा जाता है। इस प्रयोगशाला ने इन आंकड़ो के प्राप्त होने के कुछ ही घंटो मे सुपरनोवा का पता लगा लिया था। PTF 11kly के पता चलने के तुरंत पश्चात स्वचालित प्रणाली ने पृथ्वी की सभी वेधशालाओं की दूरबीनो को इस सुपरनोवा की ओर मोड़ने के लिए आंकड़े भेज दिये थे।

स्वचालित PTF के द्वारा सुपरनोवा उम्मीदवार के पता लगाने के तीन घंटे पश्चात कैनरी द्विप स्पेन की वेधशालाओं ने सुपरनोवा के हस्ताक्षर वाला प्रकाश पकड़ लीया था। इस घटना के 12 घंटो के अंदर ही लीक वेधशाला कैलीफोर्नीया, केक वेधशाला हवाई द्विप ने पक्का कर दिया कि यह एक Ia वर्ग का सुपरनोवा है।

Ia वर्ग के सुपरनोवा विशेष होते है, इनका प्रयोग ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति मापने के लिए होता है। इस सुपरनोवा विस्फोट के निरिक्षण से हमे और गहरायी से इन रहस्यो को समझने मे सहायता प्राप्त होगी। अब सारे विश्व की वेधशालाओ की  नजरे अगले कुछ सप्ताह इस सुपरनोवा पर गड़ी रहेंगी।

नोट : *यह सुपरनोवा पृथ्वी से 210 लाख प्रकाश वर्ष दूरी पर है अर्थात यह घटना 210 लाख प्रकाश वर्ष पहले हो चुकी है। इस सुपरनोवा से प्रकाश के पृथ्वी तक पहुंचने मे लगने वाले समय 210 लाख वर्ष के कारण हम इस घटना को  वर्तमान मे देख रहे है। इस लेख मे  “तुरंत पश्चात” अथवा “विस्फोट के कुछ ही घंटो बाद” का तात्पर्य यह है कि इस सुपरनोवा विस्फोट के “तुरंत पश्चात की घटना” देख रहे है।  इसके पहले सुपरनोवा के विस्फोट के तुरंत पश्चात की घटनाओं का निरीक्षण संभव नही हो पाया था।

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सप्तऋषि तारा मंडल

In तारे on अगस्त 23, 2011 at 5:54 पूर्वाह्न

सप्तऋषि तारामंडल(डेस्कटाप वालपेपर के लिए चित्र पर क्लीक करें)

सप्तऋषि तारामंडल(डेस्कटाप वालपेपर के लिए चित्र पर क्लीक करें)

उत्तरी गोलार्ध मे सबसे आसानी से पहचाने जाना वाला तारामंडल – सप्तऋषि। इसे ग्रामीण क्षेत्रो मे ’बुढिया की खाट और तीन चोर’ भी कहा जाता है। कुछ लोगो को को इसमे हल की आकृति भी दिखायी देती है।  कृतु जो कि सप्तऋषि तारामंडल के मातृ तारामंडल उर्षा मेजर का मुख्य तारा है इस चित्र मे उपर दायें स्थित है। कृतु तारे के साथ के तारे पुलहा की सरल रेखा मे ध्रुव तारा है।वशिष्ठ तारे के पास एक नन्हा तारा अरुंधती भी देखा जा सकता है। वशिष्ठ तारा एक युग्म तारा है, वशिष्ठ और अरुंधती दोनो एक दूसरे की परिक्रमा करते हैं।

इस चित्र मे कुछ मेजीयर पिंड(आकाशगंगा/निहारिकायें इत्यादि) एम 101, एम 40 ,एम 51,एम 97,एम 108,एम 109भी दर्शाये गये है।

अंतरिक्ष मे हीरो का हार!

In अंतरिक्ष, निहारीका on अगस्त 16, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

अंतरिक्ष मे हीरे का हार (पूर्णाकार मे देखने के लिए चित्र पर क्लीक करें)

अंतरिक्ष मे हीरे का हार (पूर्णाकार मे देखने के लिए चित्र पर क्लीक करें)

हब्बल द्वारा लीया गया यह चित्र एक ग्रहीय निहारिका का है, जो किसी मृत तारे द्वारा एक महाविस्फोट से निर्मीत है। इस निहारिका के केन्द्र मे दो तारे एक दूसरे की परिक्रमा कर रहें है। इन मे से एक तारा का आकार उसकी मृत्यु के समय बड़ता गया, औअर वह इतना फूल गया कि दूसरा तारा उसके द्वारा लगभग निगला जा चुका था। इस प्रक्रिया मे दोनो तारो का गुरुत्विय संतुलन बिगड़ गया और बड़े तारे के अभिकेन्द्र बल(Centripetal Force) के कारण उसका सारा पदार्थ कई प्रकाश वर्ष चौड़ी तश्तरी(Disk) के रूप मे फैल गया। इसके पश्चात जब मृत होते हुये तारे मे विस्फोट हुआ उस तारे की बाह्य परतो के अलग हो जाने से गर्म आंतरिक केन्द्र सामने आ गया। इस आंतरिक केन्द्र के प्रकट होने से पराबैंगनी किरणो द्वारा गैस गर्म होने लगी और यह निहारिका एक नियान साइन के जैसे जगमगाने लगी।

इसे नियान साइन की बजाये हमे हायड्रोजन/आक्सीजन/नाइट्रोजन साइन कहना ज्यादा उचित होगा। इस चित्र मे दिखायी दे रहा हरा निला और लाल रंग क्रमश: हायड्रोजन,आक्सीजन तथा नाइट्रोजन की चमक से है। लेकिन इस निहारिका के बाह्य वलय मे गुलाबी रंग के धब्बे भी है। जब इस निहारिका मे गैस का उत्सर्जन हो रहा था, गैस की गति बढ़ रही थी तथा घनत्व कम हो रहा था। तेज गैस का प्रवाह, धीमे गैस के प्रवाह से टकराया और इस तरह के धब्बे बने। इस चित्र मे केन्द्र से बाहर की ओर गैस का प्रवाह धारीयोँ के रूप मे देखा जा सकता है, यह वास्तविक है। तेज गैस का प्रवाह धीमे गैस के प्रवाह को काटकर ऐसी धारीयाँ बनाता है।

इस चित्र मे उपर दायें और निचे बाये कुछ लाल बुलबुले भी देखे जा सकते हैं। ये कीसी धुंधली विशालकाय रेतघड़ी(Hourglass) के आकार की निहारिका के उपरी और निचली टोपी हो सकती है। जिसका मध्य भाग इस नीली निहारिका की पृष्ठभूमी मे दब गया है।

समय के साथ ये ग्रहीय निहारिकायेँ मुझे और भी ज्यादा रोमांचित करने लगी हैं।

मंगल पर जल की उपस्थिति के नये प्रमाण

In अंतरिक्ष, ग्रह, सौरमण्डल on अगस्त 9, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

मंगल पर यह गहरे रंग की मौसमी धारीयाँ कैसे बनी है?

मंगल पर यह गहरे रंग की मौसमी धारीयाँ कैसे बनी है?

मंगल ग्रह पर गहरे रंग की ये धारीयाँ कैसे बन रही हैं?

सबसे मुख्य अवधारणाओं मे से एक बहते हुये लेकिन तेजी से बाष्पित होने वाले द्रव जल की है। ये धारीयाँ इस चित्र के केन्द्र मे गहरे रंग मे दिखायी दे रही है, जोकि मंगल के बसंत मे दिखायी देती है लेकिन जाड़ो मे धूंधली हो जाती है। अगली गर्मीयो मे ये वापिस दिखायी देती है।

यह मंगल पर जल की उपस्थिति का  पहला प्रमाण नही है,लेकिन मौसमी निर्भरता दिखाने वाला पहला प्रमाण है। उपरोक्त चित्र मई 2011 मे लिया गया है। यह चित्र मार्स रीकानसेन्स आर्बीटर (Mars Reconnaissance Orbiter (MRO)) द्वारा लिए गये कई चित्रो को मिलाकर बना है।

यह मंगल ग्रह के मध्य दक्षिणी भाग मे स्थित  न्युटन क्रेटर की एक घाटी का  उन्नत रंग का चित्र है। ये धारीयाँ मंगल ग्रह की सतह के निचे  एकाधिक जगहों पर जल की उपस्थिति दर्शाती है, जिससे इस ग्रह पर जल आधारित जीवन की संभावना को बल मिलता है।

भविष्य के रोबोटीक उपकरणो, मार्स एक्सप्रेस तथा मार्स ओडीसी द्वारा किये जाने वाले निरिक्षण इस प्रमाण पर केन्द्रित होंगे और वे इस संभावना को प्रमाणित करने या रद्द करने मे सहायक होंगे।

सिंह त्रिक (Leo Triplet)

In आकाशगंगा on अगस्त 2, 2011 at 9:28 पूर्वाह्न

सिंह त्रिक

सिंह त्रिक

पृथ्वी से 35 महाशंख (350 quintillion or 350 x 1018 ) ) किमी दूरी अर्थात 350 लाख प्रकाशवर्ष दूरी पर स्थित यह तीन आकाशगंगाओ का समूह सिंह त्रिक (Leo Triplet) कहलाता है!

ब्रह्मांडीय दूरीयो के संदर्भ मे यह एक बहुत छोटी दूरी पर स्थित आकाशगंगाओ का समूह है। यह तीनो आकाशगंगाये हमारी आकाशगंगा ’मंदाकिनी’ के जैसे स्पायरल के आकार की है और एक दूसरे के गुरुत्व से बंधी हुयी है। किसी अंतरिक्ष वेधशाला द्बारा एक ही चित्र मे तीन आकाशगंगाओ को समेट लेना असामान्य है, सामान्यतः वे एक आकाशगंगा पर ही फोकस की जाती है। लेकिन वी एल टी सर्वेक्षण दूरबीन (VLT Survey Telescope (VST)) के 268 मेगापिक्सेल के कैमरे ने यह संभव कर दिखाया है।

कितना खूबसूरत है यह दृश्य! चित्र को पुर्णाकार(चित्र पर क्लीक कर) मे देंखें।

यह चित्र तीन हरे, लाल और अवरक्त फिल्टरो द्वारा लिये गये चित्रो के मिश्रण से बना है। तीनो आकाशगंगायें स्पायरल के आकार की है और अलग अलग अक्षो पर झुकी हुयी है। नीचे दायें की आकाशगंगा M66मे  सबसे कम झुकाव है, बायें वाली आकाशगंगा NGC 3628 लगभग 90 अंश पर झुकी होने से एक पतली पट्टी के जैसे दिख रही है, जबकि उपर दायें पर की आकाशगंगा M65 दोनो के मध्य के कोण मे है। NGC 3628 आकाशगंगा के मध्य मे स्थित धूल की गलियाँ कितनी स्पष्ट दिख रही है!