अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

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अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केन्द्र के साथ एन्डेवर

In अंतरिक्ष, अंतरिक्ष यान on जुलाई 5, 2011 at 6:21 पूर्वाह्न

अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केन्द्र के साथ एन्डेवर(चित्र को पूर्ण रूप से देखने चित्र पर क्लीक करें)

अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केन्द्र के साथ एन्डेवर(चित्र को पूर्ण रूप से देखने चित्र पर क्लीक करें)

अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केन्द्र(International Space Station) के साथ अमरीकी स्पेश शटल एन्डेवर का चित्र। लेकिन यह चित्र लिया कैसे गया है ? अंतरिक्ष से ?

सामान्यतः अंतराष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केन्द्र का चित्र स्पेश शटल से लिया जाता है। लेकिन इस चित्र मे अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केन्द्र के साथ स्पेश शटल भी दिख रहा है। यह कैसे हुआ?

इसका उत्तर यह है कि जब एन्डेवर अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केन्द्र से अपने अंतिम अभियान के तहत जुड़ा हुआ था उसी दिन एक रूसी अंतरिक्ष यान सोयुज टी एम ए 20 अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केन्द्र से वापस पृथ्वी पर लौट रहा था। यह चित्र सोयुज यान से लिया गया है। सोयुज यान अगले दिन कजाकिस्तान मे उतर गया था। अमरीकी अंतरिक्ष शटल की अंतिम उड़ान जुलाई 2011 मे प्रस्तावित है उसके पश्चात अंतराष्ट्रीय केंद्र की यात्रा के लिए सोयुज यान का ही प्रयोग होगा।

अपने अंतिम अभियान से एन्डेवर की वापसी

In अंतरिक्ष यान on जून 2, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

अपने अंतिम अभियान से अमरीकी अंतरिक्ष शटल ’एन्डेवर’ की वापसी

अपने अंतिम अभियान से अमरीकी अंतरिक्ष शटल ’एन्डेवर’ की वापसी

कल रात 1 जून 2011, 06.35 UTC पर अमरीकी अंतरिक्ष यान एन्डेवर पृथ्वी पर केनेडी अंतरिक्ष केंद्र फ्लोरीडा मे सकुशल लौट आया। यह एन्डेवर का अंतिम अभियान था।

अपने अंतिम अभियान मे एन्डेवर ने 100 लाख किमी से ज्यादा की यात्रा की। यह अभियान 15 दिन, 17 घन्टे और 51 सेकंड तक जारी रहा। 1992 के अपने पहले अभियान से अब तक इस यान ने २५ उड़ाने की है। इस यान को चैलेन्जर यान की जगह बनाया गया था, जो एक दूर्घटना मे उड़ान स्थल पर ही नष्ट हो गया था। एन्डेवर ने ही 1993 मे हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला की पहली मरम्मत की थी।

एन्डेवर का नाम कैप्टन जेम्स कूक के जहाज के नाम पर रखा गया था। इस जहाज पर जेम्स कूक ने दक्षिणी प्रशांत महासागर मे 1769 मे शुक्र ग्रह का सूर्य पर दूर्लभ ग्रहण देखा था। उसे इन ग्रहण से सौर मंडल के आकार की गणना की आशा थी। एन्डेवर यान इसी परंपरा की एक कड़ी था।

मै एन्डेवर के पृथ्वी पर लौट आने पर उसका स्वागत नही कर पाउंगा क्योंकि अंतरिक्ष यान का घर पृथ्वी नही, अंतरिक्ष होता है।

अमरीकी अंतरिक्ष यान ‘एंडेवर’ की अंतिम उड़ान

In अंतरिक्ष यान on मई 17, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

अमरीकी अंतरिक्ष यान एंडेवर की अंतिम उड़ान

अमरीकी अंतरिक्ष यान एंडेवर की अंतिम उड़ान

अमरीकी अंतरिक्ष यान ‘एंडेवर‘ सोमवार 16 मई 2011 की सुबह फ़्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सैंटर से अपने अंतिम मिशन पर रवाना हो गया। ये यान ‘अल्फ़ा मैग्नेटिक स्पैक्टोमीटर(Alpha Magnetic Spectrometer)‘ नाम के  कण भौतिकी उपकरण(Particle Physics  experiment module) को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र में पहुंचाएगा।

इस अंतिम मिशन में ‘एंडेवर’ जो ‘अल्फ़ा मैग्नेटिक स्पेक्टोमीटर‘ ले गया है उसे तैयार करने में 17 साल लगे हैं। इस यंत्र को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र के ऊपर लगाया जाएगा जहां से वो ब्रह्मांडीय किरणों(Cosmic Rays) का व्यापक सर्वेक्षण करेगा। ये अत्यधिक ऊर्जा वाले कण हैं जो ब्रह्मांड के सभी कोनों से पृथ्वी की दिशा में तेज़ी से बढ़ते हैं। वैज्ञानिकों को आशा है कि इन कणो के गुणधर्मो का पता लगाने से इस तरह के प्रश्नो के उत्तर ढूंढने में मदद मिलेगी कि ये ब्रह्मांड कैसे अस्तित्व में आया और इसका निर्माण कैसे हुआ।

जब ‘एंडेवर‘ अपना मिशन पूरा करके लौटेगा तो अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के शटल बेड़े में केवल ‘एटलांटिस‘ बचेगा। ‘एटलांटिस‘ इस साल जुलाई में अपना अंतिम मिशन पूरा करेगा।

नासा के प्रशासक चार्ल्स बोल्डन ने एक बयान में कहा,

“एंडेवर की अंतिम उड़ान मानवीय अंतरिक्ष उड़ान में अमरीकी कौशल और नेतृत्व का प्रमाण है”।

तीस साल का शटल कार्यक्रम पूरा करने के बाद अमरीका अपने अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र पहुंचाने के लिए रूसी ‘सोयूज़‘ यानों का प्रयोग करेगा।

इस दशक के मध्य तक कई अमरीकी व्यावसायिक यान भी सेवा में आ जाएंगे। नासा इन यानों में अपने अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सीटें ख़रीदेगा।  जिसका मतलब ये हुआ कि नासा पृथ्वी की कक्षा का चक्कर लगाने के लिए जिन यानों का प्रयोग करेगा वो उसके नहीं होंगे। इस योजना से ये लाभ होगा कि नासा अपने संसाधनों का प्रयोग अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणाली तैयार करने के लिए कर सकेगा जिससे आगे चलकर अंतरिक्षयात्री चंद्रमा, क्षुद्रग्रहों और मंगल ग्रह तक की यात्रा कर सकेंगे।

  • एंडेवर का निर्माण 1986 में ‘चैलेंजर‘ यान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के बाद किया गया था। 
  • इसने अपनी पहली उड़ान 7 मई 1992 को की थी।
  •  ‘एंडेवर’ ने अंतरिक्ष में 280 दिन बिताकर पृथ्वी के कुल 4,429 चक्कर लगाए हैं।
  • इस अंतिम मिशन को पूरा कर लेने के बाद एंडेवर 16 करोड़ 60 लाख किलोमीटर की यात्रा पूरी कर लेगा।
  • अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र के निर्माण के पहले मिशन पर यही यान गया था और हबल दूरबीन की मरम्मत का भी पहला मिशन इसी ने पूरा किया था।