अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

Posts Tagged ‘मंदाकिनी’

’मंदाकिनी’ आकाशगंगा केन्द्र के दैत्य को जागृत करने जा रहा है एक गैसीय बादल !

In आकाशगंगा on दिसम्बर 16, 2011 at 3:38 पूर्वाह्न

श्याम वीवर के समीप गैसीय बादल की कल्पना। सभी तारे एक अदृश्य श्याम वीवर की परिक्रमा कर रहे हैं।

श्याम वीवर के समीप गैसीय बादल की कल्पना। सभी तारे एक अदृश्य श्याम वीवर की परिक्रमा कर रहे हैं।

हमारी आकाशगंगा ’मंदाकिनी’ के केन्द्र मे स्थित महाकाय श्याम वीवर (Spermassive Black Hole) सामान्यतः एक सोते हुये दैत्य की तरह है। लेकिन यह दैत्य अपनी निद्रा से जागने जा रहा है। पृथ्वी से कई गुणा बड़ा एक गैसीय बादल इस श्याम वीवर की ओर 50 लाख मील/घंटे की गति से इसकी ओर बढ़ रहा है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि वे पहली बार एक बादल के बिखरने और ब्लैक होल में समाने का नज़ारा देख सकेंगे। उनका कहना है कि इस ब्लैक होल का आकार चार करोड़ किलोमीटर है और इसमें बादल को समाने में दो वर्ष से भी कम समय लगेगा। इन दोनो के टकराने से विकिरणो का एक महाविस्फोट होगा जो हमे श्याम वीवर को समझने के लिये जानकारी प्रदान करेगा।

युरोपीयन अंतरिक्ष सस्थांन(ESO) की दूरबीनो से इस गैसीय बादल को देखा गया है। अपने 20 वर्ष लंबे कार्यक्रम के अंतर्गत मैक्स प्लैंक इन्स्टीट्युट आफ एक्स्ट्राटेरेस्ट्रीयल फिजीक्स के खगोलशास्त्री युरोपीयन वेधशाला की दूरबीनो से हमारी आकाशगंगा के केन्द्र मे स्थित महाकाय श्याम वीवर की परिक्रमा करते तारो का निरीक्षण रहे है। उन्होने इस अध्ययन के दौरान इस बादल को श्याम वीवर की ओर बढ़ते देखा।

यह गैस का बादल श्याम वीवर के घटना क्षितीज(Event Horizon) से केवल 40 अरब किमी(36 प्रकाश घंटे) दूरी से गुजरेगा जोकि एक नजदीकी घटना है। इस दूरी पर वह श्याम वीवर के गुरुत्वाकर्षण की चपेट मे आ जायेगा। इस दूरी पर आने पर यह बादल समीप के अत्यंत उष्ण तारो से उत्सर्जित पराबैगनी विकिरण से चमकने लगेगा।

जैसे जैसे यह बादल महाभूखे दैत्य श्याम वीवर के समीप पहुंचेगा, बाह्य दबाव इस बादल को संपिड़ित करेगा। उसी समय सूर्य से 40 लाख गुणा भारी श्याम वीवर का महाशक्तिशाली गुरुत्विय आकर्षण इसकी गति को त्वरण देगा और यह बादल अपनी कक्षा से विचलीत होकर श्याम वीवर की ओर बड़ेगा।

इस बादल के सीरे अभी से ही टूटना शुरू हो गये है और कुछ ही वर्षो मे पूरी तरह टूट जायेंगे। बादल मे इस बिखराव के लक्षण वैज्ञानिको ने 2008 से 2011 के मध्य मे देखें है।

2008 से 2011 के मध्य गैसीय बादल की श्याम वीवर ओर बढ़ने के चित्र

2008 से 2011 के मध्य गैसीय बादल की श्याम वीवर ओर बढ़ने के चित्र

2013 तक इस गैसीय बादल का पदार्थ श्याम वीवर के समीप पहुंचने के साथ अत्यंत गर्म हो जायेगा और एक्स किरणो(X ray) का उत्सर्जन प्रारंभ कर देगा। वर्तमान मे श्याम वीवर के घटना क्षितिज के पास बहुत कम पदार्थ है , श्याम वीवर का यह नया शिकार इस भूखे दानव को अगले कुछ वर्षो तक भोजन प्रदान करेगा।

खगोलशास्त्रीयों के लिये अगले कुछ वर्ष काफी महत्वपूर्ण रहेंगे क्योंकि यह घटना श्याम वीवर से संबधित बहुत सी नयी जानकारी पर प्रकाश डालेगी।

बुढापे की ओर बढ़ती हुयी मंदाकिनी

In आकाशगंगा on जून 7, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

मंदाकिनी आकाशगंगा

मंदाकिनी आकाशगंगा

यह हमारी अपनी आकाशगंगा मंदाकिनी है जो लगभग 100 हजार प्रकाशवर्ष चौड़ी है।

हमारी मन्दाकिनी  आकाशगंगा उम्र के ऐसे दौर से गुजर रही है, जिसके बाद अगले कुछ अरब वर्षों में इसके सितारों के बनने की गति धीमी पड़ जाएगी। ग्रहों पर नजर रखने वाले वैज्ञानिको का कहना है कि आकाशगंगा को आमतौर पर दो हिस्सों में बांटा जा सकता है। ऊर्जा से भरपूर नीली आकाशगंगा जो तेज रफ्तार से नए सितारों को गढ़ती रहती हैं और सुस्त लाल आकाशगंगा जो धीरे-धीरे मौत की ओर बढ़ रही होती हैं।

स्विनबर्ग टेक्नॉलजी यूनिवर्सिटी की एक टीम ने यह दिखाया है कि हमारी मन्दाकिनी आकाशगंगा इनमें से किसी भी श्रेणी के तहत नहीं आती। यह एक ‘हरित घाटी(Green Vally)‘ जैसी आकाशगंगा है, जो किशोर नीली आकाशगंगा और बूढ़ी लाल आकाशगंगा के बीच की स्थिति में है।

ऐस्ट्रोफिजिकल जर्नल के एक शोध पत्र के अनुसार, ऐसा पहली बार है, जब वैज्ञानिकों ने ब्रह्माण्ड की बाकी आकाशगंगाओं के साथ हमारी आकाशगंगा के रंग और सितारों के बनने की दर की तुलना की है। टीम को हेड करने वाले डॉ. डेरन क्रोटोन ने कहा कि अपनी आकाशगंगा की स्थिति का उस समय आकलन करना काफी कठिन होता है, जब हम खुद इसके भीतर मौजूद हों।

इस समस्या का हल करने के लिए वैज्ञानिकों ने आकाशगंगा के पिछले 20 साल के दौरान लिए गए आंकड़ों का अध्ययन किया और इसे आकाशगंगा की मौजूदा स्थिति की एक व्यापक तस्वीर में फिट करने के लिए जमा किया। डॉक्टर क्रोटोन ने कहा कि ब्रह्माण्ड के तमाम रंगों को वर्गीकरण करने के दौरान हमने जिन गुणों को देखा है, उनके आधार पर हम यह कह सकते हैं कि विकासक्रम में हमारी आकाशगंगा नीली और लाल के मध्य की अवस्था में है। इसका मतलब है कि इसमें तारे बनने की प्रक्रिया अगले कुछ अरब वर्षों में धीमी पड़ जाएगी।