अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

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मंगल की यात्रा पर मानव उत्सुकता (मंगल शोध वाहन ’क्यूरियोसिटी ’)

In अंतरिक्ष यान, अंतरिक्ष वाहन, सौरमण्डल on नवम्बर 28, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

’क्यूरियोसिटी’ का फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से एक एटलस रॉकेट के द्वारा प्रक्षेपण

’क्यूरियोसिटी’ का फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से एक एटलस रॉकेट के द्वारा प्रक्षेपण

अमरीका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने शनिवार 26, नवंबर 2011 को मंगल ग्रह पर अब तक का अपना सबसे उत्कृष्ट रोबोटिक रोवर को भेज दिया है।

रोबोटिक रोवर क्यूरियोसिटी को फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से एक एटलस रॉकेट के ज़रिये अंतरिक्ष में भेजा गया। ‘रोबोटिक रोवर‘ यानी रोबोट के समान एक मशीन है जो अंतरिक्ष में जाकर मंगल के चारों ओर घूमेगी। ये एक बड़ी गाड़ी के आकार का घूमने वाला वाहन है। छह चक्कों वाले इस मोबाइल लेबॉरेटरी रोबोटिक रोवर का नाम क्यूरियोसिटी रखा गया है और इसका वज़न करीब एक टन है। क्यूरियोसिटी को ‘मार्स साइंस लैबोरेटरी’ (एमएसएल) के नाम से भी जाना जाता है।

क्यूरियोसिटी मंगल पर भेजे गए पूर्व के रोवर से पांच गुना भारी है, और इसके पास चूर हो चुके चट्टान नमूनों की जांच करने की क्षमता है। क्यूरियोसिटी का मुख्य काम ये पता करना है कि क्या कभी मंगल ग्रह पर जीवन मौजूद था। ये मंगल ग्रह से मिट्टी के सैंपल इकट्ठा करेगा और कैमरे से इस ग्रह के सतह को स्कैन भी किया जाएगा। इसमें प्लूटोनियम बैटरी है जिससे इसे दस साल से भी ज़्यादा समय तक लगातार ऊर्जा मिलती रहेगी।

मंगल वाहन ’क्यूरियोसिटी’

मंगल वाहन ’क्यूरियोसिटी’

ये रोवर अगस्त 2012 में मंगल पर पहुंचेगा और यदि ये सफलतापूर्वक मंगल की सतह पर उतर गया तो ये रोवर दो वर्ष के अपने मिशन के दौरान इस बात की जांच करेगा कि क्या वहां का वातावरण सूक्ष्म जीवों के विकास के लिए अनुकूल है या नहीं। प्रक्षेपण के 50 मिनट बाद नासा का यान से पहला संपर्क भी स्थापित हुआ है।

इस पूरे मिशन का कुल खर्च ढाई अरब डॉलर है।

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मंगल शोध वाहन ’स्प्रिट’ के अभियान का अंत: अलविदा ’स्प्रिट’!

In अंतरिक्ष वाहन on मई 26, 2011 at 7:20 पूर्वाह्न

मंगल ग्रह पर स्प्रिट शोध वाहन

मंगल ग्रह पर स्प्रिट शोध वाहन

नासा ने एक वर्ष तक “स्प्रिट” (मगंल ग्रह शोध वाहन) से पुनः संपर्क स्थापित करने के असफल प्रयासो के पश्चात इस अभियान को बंद करने का निर्णय लिया है। ४ जनवरी २००४ को प्रक्षेपित स्प्रिट वाहन अब सभी प्रायोगिक कारणो से ’मृत’ है।

स्प्रिट वाहन से अंतिम संदेश मार्च २०१० मे प्राप्त हुआ था, उस समय मंगल ग्रह पर स्प्रिट यान के स्थान पर गर्मियों का प्रारंभ हो रहा था। यह आशा थी कि गर्मियों मे स्प्रिट वाहन की बैटरीयां पुनः चार्ज होकर वाहन को पुनर्जिवित कर देंगी। लेकिन कई महीनो के प्रयासो के बाद भी स्प्रिट से संपर्क स्थापित नही हो पाया है।

कुछ ही महीनो पश्चात एक नये मंगल अनुसंधान वाहन “क्युरीओसीटी(जिज्ञासा)” का प्रक्षेपण होने जा रहा है। यह वाहन गोल्फ गाड़ी के आकार का है और स्प्रिट से बेहतर उपकरण लिए है। स्प्रिट के संचार मे प्रयोग किये जा रहे संचार उपग्रहो तथा मंगल की कक्षा के उपग्रहों को अब “क्युरीओसीटी” के लिये उपयोग मे लाया जायेगा।

स्प्रिट की मृत्यु दुःखद है। यह एक बेहतरीन वाहन था। इस वाहन ने आशा से ज्यादा कार्य किया है,अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा। इसे ९० मंगल दिवसो (९२ पृथ्वी दिवसो) के लिए बनाया गया था लेकिन इसने छः वर्षो से ज्यादा कार्य किया है। एक कार या कम्प्यूटर की कल्पना किजीये जिसने अपनी वारंटी से २५ गुणा ज्यादा कार्य किया हो! या किसी मनुष्य के १५०० वर्षो तक जीवन की कल्पना किजीये!

स्प्रिट यह नासा के सबसे ज्यादा सफल अभियानो मे से एक है। इसका जुड़वा “ओपरचुनीटी” अभी भी कार्यरत है।

इतिहास मे जब भी सफल अंतरिक्ष अभियानो का उल्लेख होगा उसमे शायद “वायेजर यानो” के साथ स्प्रिट का नाम भी सुनहरे अक्षरो मे लिखा जायेगा!

अलविदा “स्प्रिट” !