अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

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ब्रह्माण्ड, हमारी आकाशगंगा, विशालकाय, महाकाय… जब शब्द कम पड़ जाये…

In अंतरिक्ष, आकाशगंगा, निहारीका, ब्रह्माण्ड on अप्रैल 5, 2012 at 7:00 पूर्वाह्न

हमारा ब्रह्माण्ड इतना विशाल है कि उसके वर्णन के लिये मेरे पास शब्द कम पड़ जाते है। इतना विशाल, महाकाय कि शब्द लघु से लघुतम होते जाते है।

सर्वेक्षण का एक क्षेत्र

सर्वेक्षण का एक क्षेत्र

खगोल वैज्ञानिकों ने चीली के VISTA दूरबीन तथा हवाई द्विप की UKIRT दूरबीन के प्रयोग से संपूर्ण आकाश का अवरक्त किरणो मे एक असाधारण अविश्वसनीय रूप से विस्तृत मानचित्र बनाया है। यह मानचित्र हमे हमारी अपनी आकाशगंगा मंदाकिनी, दूरस्थ आकाशगंगायें, क्वासर, निहारिका और अन्य खगोलिय पिंडो को समझने मे मदद करेगा।

लेकिन “असाधारण अविश्वसनीय रूप से विस्तृत ” का अर्थ क्या है ?

इसे समझाने के लिये मेरे पास शब्द नही है, मै इसे आपको कुछ दिखाकर ही समझा पाउंगा।

उपर दिया गया चित्र इस सर्वेक्षण का एक भाग है जो एक तारों के निर्माण क्षेत्र G305 को दर्शा रहा है। यह क्षेत्र एक गैस का विशालकाय, महाकाय भाग है और हम से 12,000 प्रकाशवर्ष की दूरी पर है। इस क्षेत्र मे दसीयो हजार तारों का जन्म हो रहा है।

है ना यह खूबसूरत चित्र ? इस चित्र मे लगभग 10,000 तारे है, और आप इस चित्र मे नये तारो का निर्माण करते गैस और धूल के क्षेत्रो को देख सकते है। नये तारे सामान्यतः नीले रंग के होते है।

लेकिन दसीयो हजारों तारो का यह विशालकाय भाग इस सर्वेक्षण का एक लघु से भी लघु भाग है। कितना लघु ? यह क्षेत्र निचे दिये गये चित्र मे सफेद वर्ग से दर्शाया गया है।

उपर दिये गये चित्र को पूर्णाकार मे देखने उसपर क्लीक करें! है ना विशालकाय! लेकिन यह चित्र भी निचे के चित्र का एक छोटा सा भाग(सफेद वर्ग मे दर्शीत) है।

और उपर दिया गया क्षेत्र भी निचे दिये गये चित्र का सफेद वर्ग मे दर्शित एक क्षेत्र है।

यह उपर दिया गया चित्र उतना प्रभावी नही लग रहा ना! चित्र पर क्लीक किजीये और इसे पूर्णाकार मे देखीये! अब कहीये कि कितना खूबसूरत है यह ! यह एक लगभग 20,000 x 200 पिक्सेल का आकाश का चित्र है और इसे आकाश के हजारो भिन्न भिन्न चित्रो को मिलाकर बनाया गया है। और यह चित्र भी वास्तविक चित्र को बहुत ही छोटा कर बनाया गया है।

क्या कहा ? वास्तविक चित्र को बहुत छोटा कर बनाया गया है! तो वास्तविक चित्र के आंकड़े कितने विशाल है ? ज्यादा नही केवल 150 अरब पिक्सेल इइइइइइइइइइइइइ इइइइइइइइइइइइइइइइइ…………………..!!!!!

इतने विशालकाय, महाकाय, दानवाकार के लिये कोई शब्द है आपके पास…..
इस चित्र का आकार एक सौ पचास हजार मेगापिक्सेल है………………

इस विशाल वास्तविक चित्र को देखना चाहते है ? यहां पर जाईये, आप वास्तविक चित्र को देख सकते है। आप इस चित्र को जूम कर हर हिस्से को विस्तार से देख सकते है।

इस चित्र मे एक अरब से ज्यादा तारें हैं। एक अरब! यह अभी तक का आकाश का सबसे बेहतर व्यापक सर्वेक्षण है लेकिन यह भी एक लघुतम है। इस सर्वेक्षण मे हमारी आकाशगंगा मंदाकिनी के एक भाग का ही समावेश है जहाँ पर वह सबसे ज्यादा मोटी है! और इस चित्र के तारे हमारी आकाशगंगा के कुल तारो के 1% से भी कम है।

संपूर्ण ब्रह्माण्ड मे हमारी आकाशगंगा जैसी लाखों अरबो आकाशगंगाये है….. अब मेरे शब्द चूक गये है। आप इन चित्रो पर क्लीक किजीये और प्रकृति की खूबसूरती का आनंद लीजीये!

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हैन्नी का वूरवेर्प

In अंतरिक्ष, निहारीका, ब्रह्माण्ड on जनवरी 12, 2011 at 6:17 पूर्वाह्न

हब्बल दूरबीन से लीये गये इस चित्र को देखीये। पहली नजर मे देखने पर यही लगेगा की यह एक स्पाइरल के आकार आकाशगंगा है। लेकिन इस आकाशगंगा के निचे देखीये…..

हैन्नी का वूरवेर्प

हैन्नी का वूरवेर्प

ये अजीब सी हरी वस्तु क्या है ?

ये है हैन्नी का वूरवेर्प(Voorwerp)! चित्र पर क्लीक किजिये और इसे बड़े आकार मे देखीये…अब आप पुछेंगे कि ये वूरवेर्प क्या है ? यह डचभाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है “वस्तु“। वस्तु ? लेकिन अंतरिक्ष मे ये विशालकाय वस्तु क्या है ?

हैन्नी वान अर्केल ने इस वूरवेर्प को खोजा था और मजे की बात यह है कि हैन्नी खगोलविज्ञानी नही है। हैन्नी डच महारानी के गिटार-वादक ’ब्रायन मे’ का ब्लाग पढ रही थी जो कि एक खगोलविज्ञानी भी है। उस ब्लाग मे ब्रायन ने एक प्रोजेक्ट ’गैलेक्सी जू’ के बारे मे लिखा था, इस प्रोजेक्ट मे आप अपने कम्युटर पर आकाशगंगाओ को वर्गीकृत कर सकते है। हैन्नी ने इस प्रोजेक्ट को खोला और आकाशगंगाओ को देखना शुरू किया। किसी तरह उसने इस विचित्र सी हरी रंग की वस्तु को देखा। उसने खगोलविज्ञानीयो से इस वस्तु के बारे मे पुछा। अब खगोल विज्ञानीयो ने इस पर ध्यान दिया और हब्बल दूरबीन से इसका विचित्र चित्र लिया और यह चित्र आपके सामने है।

यह क्या है ? हरा रंग यह बताता है कि यह एक महाकाय गैस का बादल है, और हरा रंग इसे प्रदिप्तीत आक्सीजन से प्राप्त हो रहा है। लेकिन इस बादल के पास प्रकाश का कोई साधन नही है, यह प्रकाश उसे पास की आकाशगंगा से प्राप्त हो रहा होगा। यह गैस का हरे रंग का वूरवेर्प हमारी आकाशगंगा के बराबर विशालकाय है, पूरे १००,००० प्रकाशवर्ष चौड़ा !

यह माना जाता है कि इस आकाशगंगा के मध्य एक “महाकाय श्याम विवर (Super Massive Black Hole)” है जिसे IC २४९७ नाम दिया गया है। एक लंबे अंतराल से यह श्याम विवर पदार्थ को निगले जा रहा है। किसी श्याम विवर मे पदार्थ के निगलने से पहले घटना क्षितीज(Event Horizon) पर एक श्याम विवर के आसपास एक तश्तरी बन जाती है। यह तश्तरी श्यामविवर मे गीर रहे पदार्थ के घर्षण और गुरुत्वाकर्षण से गर्म होती है और विभिन्न बलो के क्रियाशील होने से यह दो विपरित दिशाओ मे उर्जा और पदार्थ की धारा(Jet) प्रवाहित करना प्रारंभ कर देती है।

इसी समय पर आकाशगंगा के बाहर हजारो प्रकाशवर्ष चौड़ा गैस का बादल शांत अवस्था मे रहा था। अचानक IC २४९७  के केन्द्र के श्याम विवर द्वारा उत्सर्जित उर्जा और पदार्थ की धारा इस बादल से टकरायी , इस धारा ने उसे प्रकाशित कर दिया और यह बादल किसी नियानलाईट(सच्चाई मे आक्सीजन लाईट) के जैसे प्रदिप्त हो उठा।

किसी समय, लगभग २००,००० वर्ष पहले IC २४९७  के केन्द्र के श्याम विवर मे पदार्थ का जाना रूक गया। शायद श्याम विवर के आसपास पदार्थ खत्म हो गया, जिससे इसकी तश्तरी से उर्जा और पदार्थ की धारा का उत्सर्जन रूक गया। लेकिन वूरवेर्प अभी तक प्रदिप्तित है क्योंकि गैस को अपनी चमक खोने मे लम्बा समय लगता है, लेकिन एक समय आने पर यह वूरवेर्प चमकना बंद कर देगा और हमारी निगाहों से ओझल हो जायेगा।

विज्ञानीयो के लिये यह एक असाधारण पिंड है। इसके जैसा पिंड इसके पहले देखा नही गया है इसलिये इसके बारे मे हर जानकारी नयी है।