अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

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दक्षिणी वलय निहारिका(Southern Ring Nebula)

In तारे, निहारीका on जुलाई 12, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

एन जी सी 3132(बडे़ आकार मे देखने चित्र पर क्लीक करें)

एन जी सी 3132(बडे़ आकार मे देखने चित्र पर क्लीक करें)

यह एक ग्रहीय निहारिका है जो एक तारे की मृत्यु के पश्चात बनी है। इस निहारिका का नाम एन जी सी 3132 है। इसे दक्षिणी वलय निहारिका(Southern Ring Nebula) भी कहा जाता है। इसे निर्माण करने वाला श्वेत वामन तारा इस चित्र के मध्य मे दिखने वाला धुंधला तारा है। तेज चमक वाला तारा इस श्वेत वामन तारे का साथी तारा है।

इस निहारिका का निर्माण उस समय हुआ होगा ,जब सूर्य के आकार के तारे का ईंधन खत्म हो गया और गुरुत्वाकर्षण द्वारा उत्पन्न संपिड़न तथा केन्द्र की उष्मा के टकराव के फलस्वरूप इसमे एक विस्फोट हुआ होगा। तारे के शेष केन्द्रक से श्वेत वामन तारे का जन्म हुआ और शेष पदार्थ की परतो से यह खूबसूरत निहारिका।

इस चित्र के केन्द्र मे निला रंग यह दर्शा रहा है कि यह भाग अभी भी गर्म है और इसे धूंधले श्वेत वामन तारे से उष्मा मील रही है। इस निहारिका के असामान्य आकार और सममीती के पिछे के कारण अज्ञात हैं।

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बिल्ली की आंखे(Cat’s Eye Nebula) : सितारों की खूबसूरत मृत्यु !

In अंतरिक्ष, निहारीका, ब्रह्माण्ड on मई 10, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

बिल्ली की आंखो के जैसी ग्रहीय निहारिका

बिल्ली की आंखो के जैसी ग्रहीय निहारिका

अंतरिक्ष की गहराईयो मे यह विशालकाय बिल्ली की आंख(Cat’s Eye Nebula) के जैसी ग्रहीय निहारिका(planetary nebula) पृथ्वी से तीन हजार प्रकाश वर्ष दूर है। इस निहारिका को एन जी सी ६५४३(NGC 6543) भी कहते है। यह निहारिका सूर्य के जैसे तारे की मृत्यु के क्षणो को दर्शाती है। इस निहारिका के मध्य के तारे ने अपनी मृत्यु के समय गैस की तहो को एक के बाद एक अनेक विस्फोटो मे इस तरह छीतरा दिया था। अब यह तारा एक श्वेत वामन तारे(White Dwarf) के रूप मे है, जो धीरे धीरे धुंधला होते हुये विलुप्त हो जायेगा(अर्थात धीरे धीरे ठंडा होते हुये प्रकाश का उत्सर्जन बंद कर देगा)।

ये तारे अपनी मृत्यु के समय इतना खूबसूरत पैटर्न कैसे बनाते है ?

इस प्रक्रिया को अभी तक पूरी तरह नही समझा जा सका है। हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला से लिए गये इस चित्र मे अंतरिक्ष मे फैली यह विशालकाय आंख आधा प्रकाशवर्ष चौड़ी है। बिल्ली की आंखो को घूरते हुये खगोलविज्ञानी इसमे अपने सूर्य की मृत्यु के क्षणो को देखते है जिसके भाग्य मे अपनी मृत्यु के पश्चात ऐसी ही निहारिका मे परिवर्तन निश्चित है।

ज्यादा दूर नही बस ५ अरब वर्षो के बाद!