अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

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अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र की ओर निजी कंपनी की प्रथम उड़ान : स्पेस एक्स

In अंतरिक्ष, अंतरिक्ष यान, वैज्ञानिक on मई 23, 2012 at 5:43 पूर्वाह्न

स्पेस एक्स फाल्कन 9 की उड़ान

स्पेस एक्स फाल्कन 9 की उड़ान

22 मई 2012, 7:44 UTC पर एक नया इतिहास रचा गया। पहली बार अंतरिक्ष मे एक निजी कंपनी का राकेट प्रक्षेपित किया गयास्पेस एक्स का राकेट फाल्कन 9 अंतरिक्ष मे अपने साथ ड्रेगन कैपसूल को लेकर अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र की ओर रवाना हो गया। इससे पहले की सभी अंतरिक्ष उड़ाने विभिन्न देशो की सरकारी कंपनीयों जैसे नासा, इसरो, रासकास्मोस द्वारा ही की गयी है।

यह एक अच्छी खबर है। यह स्पेस एक्स का दूसरा प्रयास था, कुछ दिनो पहले राकेट के एक वाल्व मे परेशानी आने के कारण प्रक्षेपण को स्थगित करना पढा़ था।

यह प्रक्षेपण सफल रहा, कोई तकनिकी समस्या नही आयी। राकेट के कक्षा मे पहुंचने के बाद ड्रेगन यान राकेट से सफलता से अलग हो गया और उसने अपने सौर पैनलो फैला दिया। यह इस अभियान मे एक मील का पत्त्थर था। जब यह कार्य संपन्न हुआ तब स्पेस एक्स की टीम के सद्स्यो की उल्लासपूर्ण चित्कार इसके सीधे वेबकास्ट मे स्पष्ट रूप से सुनी जा सकती थी।

आप इस वेबकास्ट को यहां पर देख सकते है। इस अभियान के मुख्य बिंदू इस वीडीयो मे 44:30 मिनिट पर जब मुख्य इंजिन का प्रज्वलन खत्म हुआ, 47:30 मिनिट पर जब दूसरे चरण का ज्वलन प्रारंभ हुआ, तथा 54:00 मिनिट पर ड्रेगन कैपसूल का अलग होना है। डैगन कैपसूल के सौर पैनलो का फैलना 56:20 मिनिट पर है।

इस विडीयो को ध्यान से देखिये और 56:20 मिनिट पर डैगन कैपसूल के सौर पैनलो का फैलते समय स्पेस एक्स टीम के आनंद मे सम्मिलित होईये।

यह प्रक्षेपण महत्वपूर्ण क्यों है ? क्योंकि पहली बार किसी निजी कंपनी द्वारा अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से एक कैपसूल जोड़ने का प्रयास है। वर्तमान मे नासा के पास अंतरिक्ष मे मानव भेजने की क्षमता नही है, स्पेस एक्स की योजना के तहत वह 2015 तक मानव अभियान के लिये सक्षम हो जायेगा। यदि यह अभियान सफल रहता है तब अनेक निजी कंपनीया अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र पर आपूर्ति की दौड़ मे आगे आगे आयेंगी। स्पर्धा से किमतें कम होती है, जब अन्य राष्ट्र अंतराष्ट्रिय अंतरिक्ष केंद्र के बजट मे कटौती कर रहे हो, यह एक बड़ी राहत लेकर आया है। इससे अंतराष्ट्रिय अंतरिक्ष केंद्र की आयू मे बढोत्तरी होगी और अंतरिक्ष मे मानव की स्थायी उपस्थिति की संभावना बढ़ जायेगी।

अंतरिक्ष अभियानो मे यह एक नये दौर की शुरुवात है। शुक्रवार 25 मई को ड्रैगन कैपसूल अंतराष्ट्रिय अंतरिक्ष केंद्र से जुड़ने का प्रयास करेगा। इस केपसुल मे अंतराष्ट्रिय अंतरिक्ष केंद्र के लिये रसद और उपकरण हैं।

स्पेस एक्स और उसके वैज्ञानिको को बधाई!

भौतिकी का नोबेल तीन खगोलशास्त्रीयों को!

In ब्रह्माण्ड, वैज्ञानिक on अक्टूबर 11, 2011 at 4:55 पूर्वाह्न

1994 मे एक स्पायरल आकाशगंगा के बाह्य क्षेत्र मे हुआ सुपरनोवा विस्फोट !

1994 मे एक स्पायरल आकाशगंगा के बाह्य क्षेत्र मे हुआ सुपरनोवा विस्फोट !

लगभग 13 वर्ष पहले यह खोज हुयी थी कि ब्रह्माण्ड की अधिकांश ऊर्जा तारों या आकाशगंगा मे ना होकर अंतराल से ही बंधी हुयी है। किसी खगोलवैज्ञानिक की भाषा मे एक विशाल खगोलीय स्थिरांक (Cosmological Constant) की उपस्थिति का प्रमाण एक नये सुपरनोवा के निरिक्षण से मीला था। इस खगोलीय स्थिरांक (लैम्डा) की उपस्थिती के पक्ष मे यह प्रथम सलाह नही थी, यह तो आधुनिक खगोल विज्ञान के जन्म से विद्यमान थी। लेकिन वैज्ञानिक इस खगोलीय स्थिरांक की उपस्थिति से बैचेन थे क्योंकि यह खगोलिय स्थिरांक ज्ञात ऊर्जा श्रोत (तारे, निहारिका, आकाशगंगा या श्याम विवरो) से जुड़ा ना होकर, निर्वात अंतरिक्ष से जुड़ा हुआ है। निर्वात की ऊर्जा समझ से बाहर है।

पिछले तेरह वर्षो मे स्वतंत्र वैज्ञानिको के समूहो ने इस खगोलीय स्थिरांक की उपस्थिति के समर्थन मे पर्याप्त आंकड़े जुटा लीये है। ये आंकड़े प्रमाणित करते है कि एक विशाल खगोलीय स्थिरांक अर्थात श्याम ऊर्जा(Dark Energy) का अस्तित्व है। इस श्याम ऊर्जा के परिणाम स्वरूप ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति मे तेजी आ रही है। इस खोज के लिए वर्ष 2011 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार तीन खगोल वैज्ञानिको साउल पर्लमटर(Saul Perlmutter), ब्रायन स्कमिड्ट( Brian P. Schmidt) तथा एडम रीस(Adam G. Riess) को दीया जा रहा है।

प्रस्तुत चित्र 1994 के एक सुपरनोवा विस्फोट का है जो एक स्पायरल आकाशगंगा के बाह्य क्षेत्र मे हुआ था। इस विस्फोट के निरिक्षण से प्राप्त आंकड़े भी इस श्याम ऊर्जा की उपस्थिति के प्रमाणन मे प्रयुक्त हुये है।

2012 के भौतिकी नोबेल पुरुष्कार विजेता : एडम रीस(Adam G. Riess), साउल पर्लमटर(Saul Perlmutter) तथा  ब्रायन स्कमिड्ट( Brian P. Schmidt)

2012 के भौतिकी नोबेल पुरुष्कार विजेता : एडम रीस(Adam G. Riess), साउल पर्लमटर(Saul Perlmutter) तथा ब्रायन स्कमिड्ट( Brian P. Schmidt)

मानव की पहली अंतरिक्ष उड़ान के 50 वर्ष : 12 अप्रैल 1961-यूरी गागरीन

In अंतरिक्ष, अंतरिक्ष यान, अंतरिक्ष वाहन, वैज्ञानिक on अप्रैल 12, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

यूरी गागारिन: प्रथम अंतरिक्ष यात्री

यूरी गागारिन: प्रथम अंतरिक्ष यात्री

आज ही के दिन पचास वर्ष पहले बारह अप्रैल 1961 सोवियत संघ के यूरी गागारिन ने पृथ्वी का एक चक्कर लगाकर अंतरिक्ष में मानव उड़ान के युग की शुरुआत की थी। अंतरिक्ष में उन्होंने 108 मिनट की उड़ान भरी। जैसे ही रॉकेट छोड़ा गया गागारिन ने कहा, “पोयेख़ाली“, जिसका अर्थ होता है  “अब हम चले“।
ये एक मजेदार तथ्य है कि युरी को इस अभियान के लिए उन की कम उंचाई के कारण चुना गया था,कुल पाँच फ़ुट दो इंच के गागारिन अंतरिक्ष यान के कैपसूल में आसानी से फ़िट हो सकते थे।

उड़ान के बाद जब वो अंतरिक्ष में पहुँचे तो पृथ्वी का प्रभामंडल देखकर हतप्रभ थे। उन्होंने आश्चर्यचकित होते हुए कहा कि पृथ्वी की सतह पर पड़ने वाली बादलों की छाँव अदभुत दृश्य का निर्माण कर रही है।

अंतरिक्ष की इस पहली उड़ान के दौरान यूरी गागारिन का अपने यान पर कोई नियंत्रण नहीं था। लेकिन इस बात को लेकर भी चिंता थी कि अगर धरती से अंतरिक्ष यान का नियंत्रण नहीं सध पाया तो क्या होगा।इसके लिए यूरी गागारिन को एक मुहरबंद लिफ़ाफ़े में कुछ कोड दिए गए थे जिनके ज़रिए वो आपात स्थिति में यान को नियंत्रित कर सकते थे। लौटते वक़्त उनका यान लगभग बरबादी के कगार पर पहुँच गया था. लेकिन इसका पता बाद में लगा। गागारिन के कैप्सूल को दूसरे मॉड्यूल से जोड़ने वाले तार लौटते वक़्त ख़ुद से अलग नहीं हुए और पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही उनका कैपसूल आग की लपटों में घिर गया।गागारिन ने

बाद में उस घटना को याद करते हुए कहा, “मैं धरती की ओर बढ़ते हुए एक आग के गोले के भीतर था।

पूरे दस मिनट तक आग में घिरे रहने के बाद किसी तरह तार जले और उनका कैप्सूल अलग हुआ। धरती पर लौटने से पहले ही यूरी गागारिन एक मशहूर अंतरराष्ट्रीय शख़्सियत बन चुके थे।

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श्रोत : बीबीसी हिन्दी

अल्बर्ट आइंस्टाइन

In वैज्ञानिक on मार्च 15, 2011 at 8:28 पूर्वाह्न

 

अल्बर्ट आइंस्टाइन

अल्बर्ट आइंस्टाइन

आज महान भौतिक विज्ञानी अल्बर्ट आइंस्टाइन का जन्मदिन है। आइंस्टाइन प्रचार और प्रसार से चिढते थे। एक बार एक पत्रकार ने उनकी  फोटो लेने के लिए अनुरोध किया, वे चिढ़कर जीभ निकाल कर खड़े हो गये, उस पत्रकार ने ऐसा मौका नही खोया ! और यह है उसी मौके का चित्र !

अल्बर्ट आइंस्टाइन का जन्म जर्मनी में वुटेमबर्ग के एक यहूदी परिवार में १४ मार्च १८७९ को हुआ था। वे सापेक्षता के सिद्धांत और द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण E = mc2 के लिए जाने जाते हैं। उन्हें सैद्धांतिक भौतिकी, खासकर प्रकाश-विद्युत प्रभाव की खोज के लिए १९२१ में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। आइंसटाइन ने सापेक्षता के विशेष और सामान्य सिद्धांत सहित कई खोजो मे योगदान दिया था।

इस सादगी के पूजारी ने इजराइल के राष्ट्रपति बनने का प्रस्ताव भी ठुकरा दिया था।