अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

Archive for the ‘निहारीका’ Category

हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला की 22 वीं वर्षगांठ : करीना निहारिका(Carina Nebula)

In अंतरिक्ष, निहारीका on अप्रैल 26, 2012 at 7:00 पूर्वाह्न

पृथ्वी की कक्षा मे हब्बल दूरबीन

पृथ्वी की कक्षा मे हब्बल दूरबीन

24 अप्रैल 1900 को डीस्कवरी स्पेश शटल ने हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला को पृथ्वी की कक्षा तथा इतिहास मे स्थापित किया था। हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला की 22 वीं वर्षगांठ पर पेश है हब्बल द्वारा लिया गया करीना निहारिका का यह खूबसूरत चित्र !

करीना निहारिका (पूर्णाकार के लिये चित्र पर क्लिक करें)

करीना निहारिका (पूर्णाकार के लिये चित्र पर क्लिक करें)

करीना निहारिका लगभग 30 प्रकाशवर्ष चौड़ी है और लगभग 7500 प्रकाशवर्ष दूरी पर है। इसे एक छोटी दूरबीन से अगस्तय(Carina/Keel) नक्षत्र की ओर देखा जा सकता है।

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ब्रह्माण्ड, हमारी आकाशगंगा, विशालकाय, महाकाय… जब शब्द कम पड़ जाये…

In अंतरिक्ष, आकाशगंगा, निहारीका, ब्रह्माण्ड on अप्रैल 5, 2012 at 7:00 पूर्वाह्न

हमारा ब्रह्माण्ड इतना विशाल है कि उसके वर्णन के लिये मेरे पास शब्द कम पड़ जाते है। इतना विशाल, महाकाय कि शब्द लघु से लघुतम होते जाते है।

सर्वेक्षण का एक क्षेत्र

सर्वेक्षण का एक क्षेत्र

खगोल वैज्ञानिकों ने चीली के VISTA दूरबीन तथा हवाई द्विप की UKIRT दूरबीन के प्रयोग से संपूर्ण आकाश का अवरक्त किरणो मे एक असाधारण अविश्वसनीय रूप से विस्तृत मानचित्र बनाया है। यह मानचित्र हमे हमारी अपनी आकाशगंगा मंदाकिनी, दूरस्थ आकाशगंगायें, क्वासर, निहारिका और अन्य खगोलिय पिंडो को समझने मे मदद करेगा।

लेकिन “असाधारण अविश्वसनीय रूप से विस्तृत ” का अर्थ क्या है ?

इसे समझाने के लिये मेरे पास शब्द नही है, मै इसे आपको कुछ दिखाकर ही समझा पाउंगा।

उपर दिया गया चित्र इस सर्वेक्षण का एक भाग है जो एक तारों के निर्माण क्षेत्र G305 को दर्शा रहा है। यह क्षेत्र एक गैस का विशालकाय, महाकाय भाग है और हम से 12,000 प्रकाशवर्ष की दूरी पर है। इस क्षेत्र मे दसीयो हजार तारों का जन्म हो रहा है।

है ना यह खूबसूरत चित्र ? इस चित्र मे लगभग 10,000 तारे है, और आप इस चित्र मे नये तारो का निर्माण करते गैस और धूल के क्षेत्रो को देख सकते है। नये तारे सामान्यतः नीले रंग के होते है।

लेकिन दसीयो हजारों तारो का यह विशालकाय भाग इस सर्वेक्षण का एक लघु से भी लघु भाग है। कितना लघु ? यह क्षेत्र निचे दिये गये चित्र मे सफेद वर्ग से दर्शाया गया है।

उपर दिये गये चित्र को पूर्णाकार मे देखने उसपर क्लीक करें! है ना विशालकाय! लेकिन यह चित्र भी निचे के चित्र का एक छोटा सा भाग(सफेद वर्ग मे दर्शीत) है।

और उपर दिया गया क्षेत्र भी निचे दिये गये चित्र का सफेद वर्ग मे दर्शित एक क्षेत्र है।

यह उपर दिया गया चित्र उतना प्रभावी नही लग रहा ना! चित्र पर क्लीक किजीये और इसे पूर्णाकार मे देखीये! अब कहीये कि कितना खूबसूरत है यह ! यह एक लगभग 20,000 x 200 पिक्सेल का आकाश का चित्र है और इसे आकाश के हजारो भिन्न भिन्न चित्रो को मिलाकर बनाया गया है। और यह चित्र भी वास्तविक चित्र को बहुत ही छोटा कर बनाया गया है।

क्या कहा ? वास्तविक चित्र को बहुत छोटा कर बनाया गया है! तो वास्तविक चित्र के आंकड़े कितने विशाल है ? ज्यादा नही केवल 150 अरब पिक्सेल इइइइइइइइइइइइइ इइइइइइइइइइइइइइइइइ…………………..!!!!!

इतने विशालकाय, महाकाय, दानवाकार के लिये कोई शब्द है आपके पास…..
इस चित्र का आकार एक सौ पचास हजार मेगापिक्सेल है………………

इस विशाल वास्तविक चित्र को देखना चाहते है ? यहां पर जाईये, आप वास्तविक चित्र को देख सकते है। आप इस चित्र को जूम कर हर हिस्से को विस्तार से देख सकते है।

इस चित्र मे एक अरब से ज्यादा तारें हैं। एक अरब! यह अभी तक का आकाश का सबसे बेहतर व्यापक सर्वेक्षण है लेकिन यह भी एक लघुतम है। इस सर्वेक्षण मे हमारी आकाशगंगा मंदाकिनी के एक भाग का ही समावेश है जहाँ पर वह सबसे ज्यादा मोटी है! और इस चित्र के तारे हमारी आकाशगंगा के कुल तारो के 1% से भी कम है।

संपूर्ण ब्रह्माण्ड मे हमारी आकाशगंगा जैसी लाखों अरबो आकाशगंगाये है….. अब मेरे शब्द चूक गये है। आप इन चित्रो पर क्लीक किजीये और प्रकृति की खूबसूरती का आनंद लीजीये!

हमारे सूर्य का भविष्य : हेलिक्स निहारीका

In अश्रेणीबद्ध, निहारीका on फ़रवरी 22, 2012 at 5:23 पूर्वाह्न

हेलिक्स निहारीका

हेलिक्स निहारीका : हमारे सूर्य का भविष्य !

क्या भविष्य मे 5 अरब वर्ष पश्चात हमारा सूर्य की यह अवस्था होगी ?

यह हेलिक्स निहारीका है जो कि हमारे समीप की सबसे चमकदार “ग्रहीय निहारीका (planetary nebula)” है, एक गैस का विशालकाय बादल जो सूर्य के जैसे किसी तारे की मृत्यु के पश्चात निर्मित होता है। सूर्य के जैसे की मृत्यु के समय उसकी गैस की बाह्य परतें एक विस्फोट के साथ अंतरिक्ष मे फेंक दी जाती है और वह इस तरह की खूबसूरत निहारिका मे परिवर्तित हो जाता है। इस तारे का बचा हुआ केन्द्रक एक श्वेत वामन तारा बन जाता है। इस श्वेत वामन तारे द्बारा उत्सर्जित प्रकाश इतना ऊर्जावान होता है कि उसके द्वारा फेंकी गयी गैस इस प्रकाश मे चमकने लगती है, ठीक किसी नियान-बल्ब के जैसे।

हेलिक्स निहारीका जिसे NGC 7293 भी कहा जाता है, 2.5 प्रकाशवर्ष चौड़ी है तथा हमसे 700 प्रकाश वर्ष दूर कुंभ राशी की ओर है।
प्रस्तुत चित्र अवरक्त प्रकाश के तीन फिल्टरो से लिया गया है। इसे युरोपीयन दक्षिणी वेधशाला( European Southern Observatory) की चीली स्थित पारनल वेधशाला ( Paranal Observatory) की 4.1 मीटर चौड़ी “दृश्य तथा अवरक्त खगोलिय शोध दूरबीन (Visible and Infrared Survey Telescope for Astronomy VISTA)”  से लिया गया है।

वर्ष 2011 के खूबसूरत चित्र

In अंतरिक्ष, अंतरिक्ष यान, अंतरिक्ष वाहन, आकाशगंगा, ग्रह, तारे, निहारीका on दिसम्बर 29, 2011 at 5:25 पूर्वाह्न

इस सप्ताह वर्ष 2011 की कुछ सबसे बेहतरीन , सबसे खूबसूरत अंतरिक्ष के चित्रो का एक संकलन।

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ब्रह्मांडीय जलप्रपात

In अंतरिक्ष, निहारीका, ब्रह्माण्ड on अक्टूबर 25, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

NGC 1999: 10 प्रकाश वर्ष उंचा  ब्रह्मांडीय जलप्रपात

NGC 1999: 10 प्रकाश वर्ष उंचा ब्रह्मांडीय जलप्रपात

इस ब्रह्माण्डीय जलप्रपात निहारिका का निर्माण कैसे हुआ ? कोई नही जानता! इस चित्र मे प्रस्तुत संरचना NGC 1999 का भाग है जो कि बृहद ओरीयान आण्विक बादल संरचना( Great Orion Molecular Cloud complex ) का एक भाग है। यह ब्रह्माण्ड की सबसे रहस्यमयी संरचनाओं मे से एक है। इस क्षेत्र को HH-22 के नाम से भी जाना जाता है।

इस चित्र मे दिखायी दे रही गैस की धारा लगभग १० प्रकाशवर्ष लंबाई मे है, और यह अनेको रंगो को प्रदर्शित करती है। एक अवधारणा के अनुसार गैस की यह धारा पास के आण्विक बादल से एक नये तारे से प्रवाहित सौर वायु के टकराव के फलस्वरूप बन रही है। लेकिन यह अवधारणा यह बताने मे असमर्थ रहती है कि इस जलप्रपात की धारा और अन्य धूंधली धारायें मुड़कर एक चमकीले बिंदू पर मील रही है, जो कि एक रेडियो तरंगो का अतापी(non thermal) श्रोत है। यह रेडियो श्रोत इस मुड़ी हुयी धारा के उपर बायें स्थित है।

एक दूसरी अवधारणा के अनुसार यह असामान्य रेडियो श्रोत किसी युग्म तारे से उत्पन्न हो रही है जिसमे एक तारा श्वेत वामन(White Dwarf), न्युट्रान तारा(Neutron Star) या श्याम विवर(Black Hole) है और यह जलप्रपात इस तीव्र ऊर्जावान प्रणाली से उत्सर्जित गैसीय जेट धारा है। लेकिन इस तरह की प्रणाली मे एक्स रे(X Ray) का भी उत्सर्जन होता है लेकिन किसी एक्स रे श्रोत का पता नही चला है।
वर्तमान मे रहस्य बरकरार है। भविष्य के ज्यादा सावधानीपुर्वक किये गये निरीक्षण इस रहस्य के आवरण को हटा सकते है।

अंतरिक्ष मे हीरो का हार!

In अंतरिक्ष, निहारीका on अगस्त 16, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

अंतरिक्ष मे हीरे का हार (पूर्णाकार मे देखने के लिए चित्र पर क्लीक करें)

अंतरिक्ष मे हीरे का हार (पूर्णाकार मे देखने के लिए चित्र पर क्लीक करें)

हब्बल द्वारा लीया गया यह चित्र एक ग्रहीय निहारिका का है, जो किसी मृत तारे द्वारा एक महाविस्फोट से निर्मीत है। इस निहारिका के केन्द्र मे दो तारे एक दूसरे की परिक्रमा कर रहें है। इन मे से एक तारा का आकार उसकी मृत्यु के समय बड़ता गया, औअर वह इतना फूल गया कि दूसरा तारा उसके द्वारा लगभग निगला जा चुका था। इस प्रक्रिया मे दोनो तारो का गुरुत्विय संतुलन बिगड़ गया और बड़े तारे के अभिकेन्द्र बल(Centripetal Force) के कारण उसका सारा पदार्थ कई प्रकाश वर्ष चौड़ी तश्तरी(Disk) के रूप मे फैल गया। इसके पश्चात जब मृत होते हुये तारे मे विस्फोट हुआ उस तारे की बाह्य परतो के अलग हो जाने से गर्म आंतरिक केन्द्र सामने आ गया। इस आंतरिक केन्द्र के प्रकट होने से पराबैंगनी किरणो द्वारा गैस गर्म होने लगी और यह निहारिका एक नियान साइन के जैसे जगमगाने लगी।

इसे नियान साइन की बजाये हमे हायड्रोजन/आक्सीजन/नाइट्रोजन साइन कहना ज्यादा उचित होगा। इस चित्र मे दिखायी दे रहा हरा निला और लाल रंग क्रमश: हायड्रोजन,आक्सीजन तथा नाइट्रोजन की चमक से है। लेकिन इस निहारिका के बाह्य वलय मे गुलाबी रंग के धब्बे भी है। जब इस निहारिका मे गैस का उत्सर्जन हो रहा था, गैस की गति बढ़ रही थी तथा घनत्व कम हो रहा था। तेज गैस का प्रवाह, धीमे गैस के प्रवाह से टकराया और इस तरह के धब्बे बने। इस चित्र मे केन्द्र से बाहर की ओर गैस का प्रवाह धारीयोँ के रूप मे देखा जा सकता है, यह वास्तविक है। तेज गैस का प्रवाह धीमे गैस के प्रवाह को काटकर ऐसी धारीयाँ बनाता है।

इस चित्र मे उपर दायें और निचे बाये कुछ लाल बुलबुले भी देखे जा सकते हैं। ये कीसी धुंधली विशालकाय रेतघड़ी(Hourglass) के आकार की निहारिका के उपरी और निचली टोपी हो सकती है। जिसका मध्य भाग इस नीली निहारिका की पृष्ठभूमी मे दब गया है।

समय के साथ ये ग्रहीय निहारिकायेँ मुझे और भी ज्यादा रोमांचित करने लगी हैं।

दक्षिणी वलय निहारिका(Southern Ring Nebula)

In तारे, निहारीका on जुलाई 12, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

एन जी सी 3132(बडे़ आकार मे देखने चित्र पर क्लीक करें)

एन जी सी 3132(बडे़ आकार मे देखने चित्र पर क्लीक करें)

यह एक ग्रहीय निहारिका है जो एक तारे की मृत्यु के पश्चात बनी है। इस निहारिका का नाम एन जी सी 3132 है। इसे दक्षिणी वलय निहारिका(Southern Ring Nebula) भी कहा जाता है। इसे निर्माण करने वाला श्वेत वामन तारा इस चित्र के मध्य मे दिखने वाला धुंधला तारा है। तेज चमक वाला तारा इस श्वेत वामन तारे का साथी तारा है।

इस निहारिका का निर्माण उस समय हुआ होगा ,जब सूर्य के आकार के तारे का ईंधन खत्म हो गया और गुरुत्वाकर्षण द्वारा उत्पन्न संपिड़न तथा केन्द्र की उष्मा के टकराव के फलस्वरूप इसमे एक विस्फोट हुआ होगा। तारे के शेष केन्द्रक से श्वेत वामन तारे का जन्म हुआ और शेष पदार्थ की परतो से यह खूबसूरत निहारिका।

इस चित्र के केन्द्र मे निला रंग यह दर्शा रहा है कि यह भाग अभी भी गर्म है और इसे धूंधले श्वेत वामन तारे से उष्मा मील रही है। इस निहारिका के असामान्य आकार और सममीती के पिछे के कारण अज्ञात हैं।

वृश्चिक नक्षत्र के डंक पर का बुलबुला

In अंतरिक्ष, तारे, निहारीका on जून 24, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

RCW-120 वृश्विक नक्षत्र की पुंछ के पास स्थित ब्रह्माण्डीय बुलबुला (बड़े आकार मे देखने चित्र पर क्लीक करें)

RCW-120 वृश्विक नक्षत्र की पुंछ के पास स्थित ब्रह्माण्डीय बुलबुला (बड़े आकार मे देखने चित्र पर क्लीक करें)

वृश्चिक नक्षत्र एक बिच्छू के जैसे ही लगता है जिसमे उसके पंजे तथा मुड़ा हुआ डंक भी शामील है। यदि इस नक्षत्र के डंक की ओर ध्यान से देंखे तो वहाँ एक बृहद तारो की जन्मस्थली अर्थात विशालकाय निहारीका है। इस निहारिका के सभी भागों को दृश्य प्रकाश मे नही देखा जा सकता है लेकिन यदि उसे अवरक्त(Infrared) प्रकाश मे देखा जाये तो वह आंखो के साथ मस्तिष्क को शीतल करने वाला दृश्य है।

यह RCW 120 नामक कई प्रकाशवर्ष चौड़ा , पृथ्वी से 4300 प्रकाशवर्ष दूर गैस का महाकाय बुलबुला है। यह चित्र स्पिट्जर अंतरिक्ष वेधशाला से लिया गया है। इस चित्र मे गैस की चमक अत्याधिक शीतल भाग को दर्शा रही है जिसका तापमान शून्य से कई सौ गुणा निचे है। यह एक कृत्रिम रंग(False Color Image) का चित्र है क्योंकि स्पिटजर अवरक्त किरणो से भी कम तरगंदैधर्य के चित्र ले सकता है जिसमे इस के जैसे पिंड भी चमकते है।

यदि आप इस चित्र के मध्य (बुलबुले मे)मे देखें तो आपको एक बड़ा नीला तारा दिखायी देगा। चित्र मे यह तारा साधारण लग रहा है लेकिन यह महाकाय O वर्ग का तारा है जो हमारे सूर्य से हजारो गुणा ज्यादा प्रकाश उत्सर्जित कर रहा है। यह अत्याधिक तेजी से पराबैंगनी किरणो का भी उत्सर्जन कर रहा है; जो इस तारे के आस पास की गैस को दूर कर रही है। इस कारण यह गैस का बुलबुला कई प्रकाशवर्ष चौड़ा हो गया है। इस तारे से प्रकाश इतना ज्यादा है कि यह इसके आसपास की गैस को किसी जेट पंखे के जैसी तेजी से एक महाकाय बुलबुले के रूप मे दूर कर रहा है और परिणाम आपके सामने है एक ब्रह्माण्डीय बुलबुला !

इस तारे से दबाव इतना ज्यादा है कि गैस के इस बुलबुले के कुछ क्षेत्र दबाव मे आकर नये तारो का निर्माण कर रहे है। इस चित्र के दायें भाग मे बुलबुले के दायें भाग को देखें जहा गैस की तह ज्यादा मोटी है। यहाँ पर नये तारो का जन्म हो रहा है, जो प्रवाहित होती गैस से बन रहे है। यूरोपियन अवरक्त अंतरिक्ष वेधशाला हर्शेल से किये गये निरिक्षणो के अनुसार इस क्षेत्र मे निर्मित होते हुये एक तारे के पास सूर्य से 8 गुणा ज्यादा पदार्थ है। जब यह तारा प्रज्वलित होगा इसका द्रव्यमान और बढ़ जायेगा क्योंकि वह हायड्रोजन को जलाकर हिलीयम का निर्माण करेगा।

महाकाय नीले तारे की ओर लौटते है। इस नीले तारे का भविष्य निश्चित है, एक दिन इस तारे मे एक विस्फोट होगा और यह सुपरनोवा बन जायेगा, तब यह आकाश मे सबसे चमकिला तारा होगा। उस समय यह तारा इस बूलबूले को नष्ट कर देगा। लेकिन यह भी संभव है कि इस बुलबुले के मध्य मे के तारे जो इसी बुलबुले मे बने है पहले सुपरनोवा बन जाये। ऐसी घटनाओ का पुर्वानुमान कठीन है। यह एक स्पर्धा है, मृत्यु की स्पर्धा। जिस तारे का इंधन पहले खत्म होगा, उसका केन्द्र श्याम वीवर या न्युट्रान तारा बन जाएगा और बाह्य तहो को सुपरनोवा विस्फोट से दूर फेंक देगा। यह घट्ना ब्रह्माण्ड की सबसे विनाशकारी घटनाओं मे से एक होती है लेकिन खूबसूरत होती है।

लेकिन जब भी ऐसा होगा, यह इकलौती घटना नही होगी। RCW 120 हमारी आकाशगंगा मे किसी तारे द्वारा निर्मित अकेला बुलबुला  नही है। इसी चित्र मे आप ऐसे ही कुछ और क्षेत्र देख सकते है।

इस तरह के पिंड हमारी आकाशगंगा मे बिखरे हुये है। वे चित्र मे RCW 120 अपनी दूरी के कारण से छोटे लग रहे है लेकिन वे आकार मे RCW 120 के जैसे ही है। स्पिटजर के चित्रो मे ऐसे बुलबुले इतनी ज्यादा मात्रा मे है कि वैज्ञानिक उन्हे पहचानने के लिए सामान्य नागरिको की मदद लेते है। उन्होने एक ’मिल्की वे प्रोजेक्ट’ प्रारंभ किया है जहां आप अपने आप को रजीस्टर कर सकते है। आपको उनकी वेबसाइट पर ऐसे चित्रो को देख कर उनकी द्वारा दी गयी निर्देशिका के अनुसार वर्गीकृत करना होता है। खगोलशास्त्र मे यदि आपकी रूची है तो आपके लिए यह एक सुनहरा मौका है, हो सकता है कि आप किसी नये तरह के पिण्ड को ढुंढ निकाले और उसका नाम आपके द्वारा रखा जाये ! और ऐसा पहले हो चूका है! देर किस बात की , यहाँ पर जायें और शुरू हो जाइए!

बिल्ली की आंखे(Cat’s Eye Nebula) : सितारों की खूबसूरत मृत्यु !

In अंतरिक्ष, निहारीका, ब्रह्माण्ड on मई 10, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

बिल्ली की आंखो के जैसी ग्रहीय निहारिका

बिल्ली की आंखो के जैसी ग्रहीय निहारिका

अंतरिक्ष की गहराईयो मे यह विशालकाय बिल्ली की आंख(Cat’s Eye Nebula) के जैसी ग्रहीय निहारिका(planetary nebula) पृथ्वी से तीन हजार प्रकाश वर्ष दूर है। इस निहारिका को एन जी सी ६५४३(NGC 6543) भी कहते है। यह निहारिका सूर्य के जैसे तारे की मृत्यु के क्षणो को दर्शाती है। इस निहारिका के मध्य के तारे ने अपनी मृत्यु के समय गैस की तहो को एक के बाद एक अनेक विस्फोटो मे इस तरह छीतरा दिया था। अब यह तारा एक श्वेत वामन तारे(White Dwarf) के रूप मे है, जो धीरे धीरे धुंधला होते हुये विलुप्त हो जायेगा(अर्थात धीरे धीरे ठंडा होते हुये प्रकाश का उत्सर्जन बंद कर देगा)।

ये तारे अपनी मृत्यु के समय इतना खूबसूरत पैटर्न कैसे बनाते है ?

इस प्रक्रिया को अभी तक पूरी तरह नही समझा जा सका है। हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला से लिए गये इस चित्र मे अंतरिक्ष मे फैली यह विशालकाय आंख आधा प्रकाशवर्ष चौड़ी है। बिल्ली की आंखो को घूरते हुये खगोलविज्ञानी इसमे अपने सूर्य की मृत्यु के क्षणो को देखते है जिसके भाग्य मे अपनी मृत्यु के पश्चात ऐसी ही निहारिका मे परिवर्तन निश्चित है।

ज्यादा दूर नही बस ५ अरब वर्षो के बाद!

विशालकाय निहारिका टारान्टुला

In आकाशगंगा, निहारीका on मार्च 18, 2011 at 5:06 पूर्वाह्न

विशालकाय निहारिका टारान्टुला !

विशालकाय निहारिका टारान्टुला !

मानव की कल्पना से भी विशालकाय निहारिका टारान्टुला ! यह निहारिका हमारी आकाशगंगा की उपग्रह आकाशगंगा(विशाल मेगेल्लेनिक बादल) मे १७०,००० प्रकाशवर्ष दूरी पर है। यह चित्र हब्बल दूरबीन द्वारा लिया गया है और उसके मध्य भाग को दिखा रहा है। यह निहारिका इतनी विशाल है कि हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला एक बार मे पूरी निहारिका का चित्र नही ले सकती है। इस निहारिका मे तेज गति से असंख्य तारो का जन्म हो रहा है।

चित्र पर क्लीक कर इसे अपने पूरे आकार मे देंखे।

इस चित्र मे गैस, धूल और तारे बेतरतीबी से बिखरे पड़े है। इनमे से कुछ तारे नवजात है। लेकिन इस चित्र के मध्य बाएं मे धागे जैसी संरचना पर ध्यान दें, यह सुपरनोवा विस्फोट के बाद संपिड़ित बादलो की परते है, यह तारा इस चित्र के मध्य मे विस्फोटित हुआ होगा। यह तारा विशालकाय रहा होगा जो अपनी छोटे जीवन को जीने के बाद विस्फोट से मृत्यु को प्राप्त हुआ होगा। (कोई तारा जितना बड़ा होता है , उतनी तेजी से अपने इंधन का उपभोग करता है, और उतनी छोटी जिंदगी जीता है।) इस तारे के विस्फोट से मलबा लांखो किमी प्रति सेकंड की गति से फैला होगा। इस विस्फोट की तरंगो से इस निहारिका की गैस संपिड़ित हुयी होगी और कई नये तारो का जन्म हुआ होगा।

इस निहारिका को आप एक छोटे बायनाकुलर से भी देख सकते है। इसके लिए आपको दक्षिणी गोलार्ध(उदा. आस्ट्रेलीया, न्युजीलैंड) मे होना चाहीए।