अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

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गुरूत्वाकर्षण ट्रैक्टर : पृथ्वी को किसी क्षुद्रग्रह की टक्कर से बचाने का अभिनव उपाय

In अंतरिक्ष, अंतरिक्ष यान, पृथ्वी on जुलाई 9, 2012 at 7:23 पूर्वाह्न

गुरूत्वाकर्षण ट्रैक्टर : अंतरिक्ष मे क्षुद्रग्रह के पथ को विचलित करना

गुरूत्वाकर्षण ट्रैक्टर : अंतरिक्ष मे क्षुद्रग्रह के पथ को विचलित करना

आपने हालीवुड की फिल्मे “डीप इम्पैक्ट” या “आर्मागेडान” देखी होंगी। इन दोनो फिल्मो के मूल मे है कि एक धूमकेतु/क्षुद्रग्रह पृथ्वी से टकराने वाला होता है। इस घटना मे पृथ्वी से समस्त जीवन के नाश का संकट रहता है। माना जाता है कि 6.5 करोड़ वर्ष पूर्व एक ऐसे ही टकराव मे पृथ्वी पर से डायनासोर का विनाश हो गया था।

यदि ऐसी कोई घटना भविष्य मे हो तो मानवता अपने बचाव के लिये क्या करेगी ? डीप इम्पैक्ट और आर्मागेडान की तरह इन धूमकेतु/क्षुद्रग्रह पर परमाणु विस्फोट ?

धूमकेतु/क्षुद्रग्रह पर परमाणु विस्फोट सही उपाय नही है, इससे पृथ्वी पर संकट मे वृद्धि हो सकती है। दूसरे धूमकेतु/क्षुद्रग्रह पर गहरा गढ्ढा खोद कर परमाणु बम लगाना व्यवहारिक नही है।

एक व्यवहारिक उपाय है, विशालकाय अंतरिक्षयान द्वारा धूमकेतु/क्षुद्रग्रह को खिंच कर उसके पथ से विचलीत कर देना। उपरोक्त चित्र इसी उपाय को दर्शा रहा है।

इस उपाय के जनक नासा के जानसन अंतरिक्ष केंद्र के एडवर्ड लु तथा स्टेनली लव है। उनके अनुसार एक 20 टन द्रव्यमान का परमाणु विद्युत चालित यान एक 200 मीटर व्यास के क्षुद्र ग्रह को उसके पथ से विचलित करने मे सक्षम है। करना कुछ नही है, बस उस क्षुद्रग्रह के आसपास मंडराना है, बाकि कार्य उस यान और क्षुद्रग्रह के मध्य गुरुत्वाकर्षण कर देगा। इस तकनिक मे अंतरिक्ष यान इस क्षुद्रग्रह के पास जाकर आयन ड्राइव(ion drive) के प्रयोग से क्षुद्रग्रह की सतह से दूर जायेगा। इस सतत प्रणोद तथा क्षुद्रग्रह और अंतरिक्ष यान के मध्य गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से क्षुद्रग्रह खिंचा आयेगा और पृथ्वी से टकराव के पथ से हट जायेगा।

यह विज्ञान फतांसी के जैसा लगता है लेकिन वर्तमान मे भी आयन ड्राइव(ion drive) के प्रयोग से अंतरिक्ष यान चालित है और गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से किसी भी संरचना और सतह वाले क्षुद्रग्रह/धूमकेतु के पथ को बदलने मे सक्षम है।

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सौर मंडल की सीमा पर वायेजर 1

In अंतरिक्ष, अंतरिक्ष यान, सौरमण्डल on जून 15, 2012 at 7:53 पूर्वाह्न

चित्रकार की कल्पना मे वायेजर 1 की वर्तमान स्थिती

चित्रकार की कल्पना मे वायेजर 1 की वर्तमान स्थिति

नासा के अंतरिक्ष यान वायेजर 1 के ताजा आंकड़ो से ऐसा लग रहा है कि वह सौर मंडल की सीमा पर पहुंच चूका है। अब वह ऐसे क्षेत्र मे है जहाँ पर सौर मंडल बाह्य आवेशित कणो की मात्रा स्पष्टतया अधिक है। वायेजर से जुड़े वैज्ञानिक इन सौरमंडल बाह्य आवेशित कणो की मात्रा मे आयी तीव्र वृद्धि से इस ऐतिहासिक निष्कर्ष पर पहुंचे है कि वायेजर अब ऐसा प्रथम मानव निर्मित यान है जो कि सौर मंडल की सीमा तक जा पहुंचा है।

वायेजर यान

वायेजर यान

वायेजर से आने वाले आंकड़े पृथ्वी तक 17.8 अरब किमी की यात्रा करने मे अब 16 घंटे 38 मिनिट लेते है। नासा के डीप स्पेश नेटवर्क द्वारा प्राप्त वायेजर के आंकड़े सौरमंडल बाह्य आवेशित कणो की विस्तृत जानकारी देते है। ये आवेशित कण हमारे खगोलीय ब्रह्मान्डीय पड़ोस मे तारो के सुपरनोवा विस्फोट से उत्पन्न होते है।

जनवरी 2009 से जनवरी 2012 के मध्य मे ब्रह्माण्डीय विकिरण की मात्रा मे वायेजर ने 25% की वृद्धि दर्ज की है। लेकिन हाल ही मे वायेजर ने इन किरणो की मात्रा मे तीव्र वृद्धि देखी है, 7 मई 2012 के पश्चात इन कणो मे वृद्धि हर सप्ताह 5% की दर से हो रही है और पिछले एक महीने 9% मे वृद्धि देखी गयी है।

यह स्पष्ट वृद्धि हमारे अंतरिक्ष अभियान मे एक नये युग का प्रारंभ है। इस अंतरिक्षयान से प्राप्त सूचनाओं का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उसने हीलीयोस्फीयर के आवेशित कणो की मात्रा मे कमी दर्ज की है। हीलीयोस्फीयर सूर्य द्वारा उत्सर्जित आवेशित कणो का एक बुलबुला है। जब वायेजर सौर मंडल की सीमा पार कर जायेगा, तब सूर्य द्वारा उत्सर्जित कणो की मात्रा मे एक तेज कमी आयेगी और एक नया इतिहास बनेगा।

वायेजर से प्राप्त सौर मंडल के इन अंतिम आंकड़ो से वैज्ञानिक को पता चलेगा कि वायेजर यान को घेरे हुये चुंबकिय धाराओं की दिशा मे परिवर्तन हो गया है। जब वायेजर हिलीयोस्फीयर मे है तब इन चुंबकिय धाराओं की दिशा पूर्व से पश्चिम है। जब वायेजर सौर मंडल के बाहर खगोलिय क्षेत्र मे पहुंच जायेगा इन चुंबकिय धाराओं की दिशा उत्तर-दक्षिण होगी। इस विश्लेषण के लिये कई हफ़्ते लग जायेंगे और वायेजर वैज्ञानिक अभी इसका अध्यन कर रहे हैं।

वायेजर को 1977 मे प्रक्षेपित किया गया था, तब अंतरिक्ष अभियान केवल 20 वर्ष का था, उस समय किसी ने सोचा भी नही था कि वायेजर सौर मंडल की सीमाओं तक जा सकेगा। लेकिन वायेजर 1 (वायेजर 2 भी) ने सारी उम्मीदों से कहीं आगे जाकर अपने अभियान को एक नयी उंचाईयों तक पहुंचाया है।

यह दोनो यान अभी भी अच्छी अवस्था मे हैं। वायेजर 2 सूर्य से 14.7 अरब किमी दूरी पर हैं। दोनो वायेजर अभियान के तहत कार्य कर रहे है, जोकि सौर मंडल के ग्रहों के अध्यन का विस्तारित अभियान है।

वर्तमान मे वायेजर मानवता के सबसे दूरस्थ सक्रिय दूत है।

यह भी देखें :

  1. ब्रह्माण्ड की अनंत गहराईयो की ओर : वायेजर १
  2. मानव इतिहास का सबसे सफल अभियान :वायेजर २

अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र की ओर निजी कंपनी की प्रथम उड़ान : स्पेस एक्स

In अंतरिक्ष, अंतरिक्ष यान, वैज्ञानिक on मई 23, 2012 at 5:43 पूर्वाह्न

स्पेस एक्स फाल्कन 9 की उड़ान

स्पेस एक्स फाल्कन 9 की उड़ान

22 मई 2012, 7:44 UTC पर एक नया इतिहास रचा गया। पहली बार अंतरिक्ष मे एक निजी कंपनी का राकेट प्रक्षेपित किया गयास्पेस एक्स का राकेट फाल्कन 9 अंतरिक्ष मे अपने साथ ड्रेगन कैपसूल को लेकर अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र की ओर रवाना हो गया। इससे पहले की सभी अंतरिक्ष उड़ाने विभिन्न देशो की सरकारी कंपनीयों जैसे नासा, इसरो, रासकास्मोस द्वारा ही की गयी है।

यह एक अच्छी खबर है। यह स्पेस एक्स का दूसरा प्रयास था, कुछ दिनो पहले राकेट के एक वाल्व मे परेशानी आने के कारण प्रक्षेपण को स्थगित करना पढा़ था।

यह प्रक्षेपण सफल रहा, कोई तकनिकी समस्या नही आयी। राकेट के कक्षा मे पहुंचने के बाद ड्रेगन यान राकेट से सफलता से अलग हो गया और उसने अपने सौर पैनलो फैला दिया। यह इस अभियान मे एक मील का पत्त्थर था। जब यह कार्य संपन्न हुआ तब स्पेस एक्स की टीम के सद्स्यो की उल्लासपूर्ण चित्कार इसके सीधे वेबकास्ट मे स्पष्ट रूप से सुनी जा सकती थी।

आप इस वेबकास्ट को यहां पर देख सकते है। इस अभियान के मुख्य बिंदू इस वीडीयो मे 44:30 मिनिट पर जब मुख्य इंजिन का प्रज्वलन खत्म हुआ, 47:30 मिनिट पर जब दूसरे चरण का ज्वलन प्रारंभ हुआ, तथा 54:00 मिनिट पर ड्रेगन कैपसूल का अलग होना है। डैगन कैपसूल के सौर पैनलो का फैलना 56:20 मिनिट पर है।

इस विडीयो को ध्यान से देखिये और 56:20 मिनिट पर डैगन कैपसूल के सौर पैनलो का फैलते समय स्पेस एक्स टीम के आनंद मे सम्मिलित होईये।

यह प्रक्षेपण महत्वपूर्ण क्यों है ? क्योंकि पहली बार किसी निजी कंपनी द्वारा अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से एक कैपसूल जोड़ने का प्रयास है। वर्तमान मे नासा के पास अंतरिक्ष मे मानव भेजने की क्षमता नही है, स्पेस एक्स की योजना के तहत वह 2015 तक मानव अभियान के लिये सक्षम हो जायेगा। यदि यह अभियान सफल रहता है तब अनेक निजी कंपनीया अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र पर आपूर्ति की दौड़ मे आगे आगे आयेंगी। स्पर्धा से किमतें कम होती है, जब अन्य राष्ट्र अंतराष्ट्रिय अंतरिक्ष केंद्र के बजट मे कटौती कर रहे हो, यह एक बड़ी राहत लेकर आया है। इससे अंतराष्ट्रिय अंतरिक्ष केंद्र की आयू मे बढोत्तरी होगी और अंतरिक्ष मे मानव की स्थायी उपस्थिति की संभावना बढ़ जायेगी।

अंतरिक्ष अभियानो मे यह एक नये दौर की शुरुवात है। शुक्रवार 25 मई को ड्रैगन कैपसूल अंतराष्ट्रिय अंतरिक्ष केंद्र से जुड़ने का प्रयास करेगा। इस केपसुल मे अंतराष्ट्रिय अंतरिक्ष केंद्र के लिये रसद और उपकरण हैं।

स्पेस एक्स और उसके वैज्ञानिको को बधाई!

हमारे सौर मंडल के बाहर पदार्थ भिन्न है !

In अंतरिक्ष, अंतरिक्ष यान, सौरमण्डल on फ़रवरी 3, 2012 at 6:51 पूर्वाह्न

आक्सीजन कहां है ?

आक्सीजन कहां है ?

नासा के अंतरखगोलीय सीमा अन्वेषक यान ( Interstellar Boundary Explorer -IBEX) ने हमारे सौर मंडल के कुछ महत्वपूर्ण तत्वों के वितरण मे अद्भुत विषमता की खोज की है। विशेषतः हमारे सौर मंडल मे आक्सीजन की मात्रा ज्यादा क्यों है ?

IBEX को 2008 मे सौर मंडल के बाहर खगोलीय माध्यम की जांच के लिये प्रक्षेपित कीया गया था। यह खोजी अंतरिक्ष यान तब से सौर मंडल मे 52,000 मील/घंटा की गति से प्रवाहित उदासीन आक्सीजन, नियान तथा हीलीयम की धारा से संबधित आंकड़े एकत्रित कर रहा है। उसने पाया कि खगोलिय माध्यम मे आक्सीजन के 74 परमाणु प्रति 20 नियोन परमाणु है, जबकि यह सौर मंडल मे यह अनुपात 111आक्सीजन परमाणु प्रति 20 नियान परमाणु है।

नासा का IBEX अंतरिक्ष यान

नासा का IBEX अंतरिक्ष यान

IBEX अभियान के प्रमुख जांचकर्ता डेवीड मैककोमास के अनुसार

“हमारा सौर मंडल उसके बाहर के अंतराल से भिन्न है, यह दो संभावना दर्शाता है। या तो सौर मंडल अपनी वर्तमान स्थिति से अलग से आकाशगंगा के आक्सीजन से भरपूर भाग मे बना है या जीवन प्रदान करने वाली आक्सीजन की एक बड़ी मात्रा खगोलीय धूल या बर्फ मे बंधी है और स्वतंत्र रूप से अंतरिक्ष मे विचरण मे असमर्थ है।”

जब सौर मंडल आकाशगंगा मे विचरण करता है वह ब्रह्माण्डीय विकिरण से हीलीयोस्फीयर द्वारा रक्षित रहता है। यह हीलीयोस्फीयर सूर्य उष्मीय तथा चुंबकीय त्वरण द्वारा उत्सर्जित आवेशित कणो की धारा से बना बुलबुला है। यह बुलबुला सौर मंडल से बाहर से आये आवेशित कणो को सौर मंडल मे प्रवेश से रोकता है लेकिन उदासीन कण सौर मंडल मे स्वतंत्र रूप से प्रवेश कर सकते है और इन्ही कणो का IBEX ने मापन कीया है।

हीलीयोस्फीयर

हीलीयोस्फीयर

IBEX के एक वैज्ञानिक एरीक क्रिश्चीयन के अनुसार :

हमारे हीलीयोस्फीयर पर आकाशगंगा के पदार्थ तथा चुंबकिय क्षेत्र द्वारा उत्पन्न दबाव का मापन, आकाशगंगा मे विचरण करते हमारे सौर मंडल के आकार और आकृति को तय करने मे सहायता करेगा।

नासा ने अब हमारे प्रथम खगोलीय अंतरिक्ष यान वायेजर 1 की ओर ध्यान देना प्रारंभ किया है जिसे 1977 मे प्रक्षेपित किया गया था और वह अब हीलीयोस्फियर की सीमा पर है। यह यान शायद हिलीयोस्फीयर के बाहर क्या है, बताने मे समर्थ हो।

अंतरिक्ष मे मानव की चहलकदमी

In अंतरिक्ष यान, अंतरिक्ष वाहन on जनवरी 3, 2012 at 4:04 पूर्वाह्न

यह चित्र 2001- अ स्पेस ओडीसी फिल्म का नही है।

अंतरिक्ष मे चहलकदमी करता मानव(पूर्णाकार के लिये चित्र पर क्लिक करें)

अंतरिक्ष मे चहलकदमी करता मानव(पूर्णाकार के लिये चित्र पर क्लिक करें)

यह चित्र है अमरीकी अंतरिक्ष शटल चैलेंजर के मालवाहक कक्ष से लगभग 100 मीटर दूरी पर ब्रुस मैककैन्ड्लेस द्वितीय का। किसी अंतरिक्ष यान से सबसे ज्यादा दूरी पर पहुंचने वाले प्रथम मानव। ब्रुस मानव संचालन इकाई (Manned Maneuvering Unit -MMU) के प्रयोग से अंतरिक्ष मे स्वतंत्र रूप से तैर रहे थे। ब्रुस और नासा के सहयोगी अंतरिक्षयात्री राबर्ट स्टीवार्ट इस तरह की अंतरिक्ष चहलकदमी करनेवाले प्रथम अंतरिक्ष यात्री थे, जिसमे वे किसी डोर से अंतरिक्ष यान से बंधे नही थे। यह चहलकदमी 1984 मे अमरीकी अंतरिक्ष शटल के 41B अभियान के दौरान की गयी थी। इस दौरान MMU नाइट्रोजन गैसे के उत्सर्जन जेट द्वारा नियंत्रीत होता है और इसे उपग्रहो की स्थापना और मरम्मत के लिये प्रयोग किया जाता है। इसका द्रव्यमान 140 किग्रा है लेकिन अंतरिक्ष मे अन्य वस्तुओं की तरह भारहीन होता है। वर्तमान मे MMU की जगह पिठ पर बांधे जाने वाले ज्यादा सुरक्षित SAFER का प्रयोग होता है।

वर्ष 2011 के खूबसूरत चित्र

In अंतरिक्ष, अंतरिक्ष यान, अंतरिक्ष वाहन, आकाशगंगा, ग्रह, तारे, निहारीका on दिसम्बर 29, 2011 at 5:25 पूर्वाह्न

इस सप्ताह वर्ष 2011 की कुछ सबसे बेहतरीन , सबसे खूबसूरत अंतरिक्ष के चित्रो का एक संकलन।

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मंगल की यात्रा पर मानव उत्सुकता (मंगल शोध वाहन ’क्यूरियोसिटी ’)

In अंतरिक्ष यान, अंतरिक्ष वाहन, सौरमण्डल on नवम्बर 28, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

’क्यूरियोसिटी’ का फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से एक एटलस रॉकेट के द्वारा प्रक्षेपण

’क्यूरियोसिटी’ का फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से एक एटलस रॉकेट के द्वारा प्रक्षेपण

अमरीका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने शनिवार 26, नवंबर 2011 को मंगल ग्रह पर अब तक का अपना सबसे उत्कृष्ट रोबोटिक रोवर को भेज दिया है।

रोबोटिक रोवर क्यूरियोसिटी को फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से एक एटलस रॉकेट के ज़रिये अंतरिक्ष में भेजा गया। ‘रोबोटिक रोवर‘ यानी रोबोट के समान एक मशीन है जो अंतरिक्ष में जाकर मंगल के चारों ओर घूमेगी। ये एक बड़ी गाड़ी के आकार का घूमने वाला वाहन है। छह चक्कों वाले इस मोबाइल लेबॉरेटरी रोबोटिक रोवर का नाम क्यूरियोसिटी रखा गया है और इसका वज़न करीब एक टन है। क्यूरियोसिटी को ‘मार्स साइंस लैबोरेटरी’ (एमएसएल) के नाम से भी जाना जाता है।

क्यूरियोसिटी मंगल पर भेजे गए पूर्व के रोवर से पांच गुना भारी है, और इसके पास चूर हो चुके चट्टान नमूनों की जांच करने की क्षमता है। क्यूरियोसिटी का मुख्य काम ये पता करना है कि क्या कभी मंगल ग्रह पर जीवन मौजूद था। ये मंगल ग्रह से मिट्टी के सैंपल इकट्ठा करेगा और कैमरे से इस ग्रह के सतह को स्कैन भी किया जाएगा। इसमें प्लूटोनियम बैटरी है जिससे इसे दस साल से भी ज़्यादा समय तक लगातार ऊर्जा मिलती रहेगी।

मंगल वाहन ’क्यूरियोसिटी’

मंगल वाहन ’क्यूरियोसिटी’

ये रोवर अगस्त 2012 में मंगल पर पहुंचेगा और यदि ये सफलतापूर्वक मंगल की सतह पर उतर गया तो ये रोवर दो वर्ष के अपने मिशन के दौरान इस बात की जांच करेगा कि क्या वहां का वातावरण सूक्ष्म जीवों के विकास के लिए अनुकूल है या नहीं। प्रक्षेपण के 50 मिनट बाद नासा का यान से पहला संपर्क भी स्थापित हुआ है।

इस पूरे मिशन का कुल खर्च ढाई अरब डॉलर है।

अंततः मानव अंतरिक्षयान की वापसी : सोयुज का सफल प्रक्षेपण

In अंतरिक्ष, अंतरिक्ष यान on नवम्बर 15, 2011 at 5:30 पूर्वाह्न

सोयुज टी एम ए 22 - बैंकानूर अंतरिक्ष केन्द्र से सफल प्रक्षेपण

सोयुज टी एम ए 22 - बैंकानूर अंतरिक्ष केन्द्र से सफल प्रक्षेपण

नवंबर 14,2011 को रूसी सोयुज राकेट का भारी हिमपात के मध्य सफल प्रक्षेपण हुआ। इस अंतरिक्षयान मे तीन अंतरिक्षयात्री है, जिनमे एक अमरीकी (डैनीयल सी बरबैंक) और दो रूसी (एन्टोन श्काप्लेरोव तथा एन्टोली इवानीशीन) है। सोयुज यान दो दिन की यात्रा के पश्चात अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष केन्द्र से जुड़ जायेगा।

इस प्रक्षेपण से एक नये अंतरिक्ष युग की शुरूवात हुयी है जिसमे अमरीकी अंतरिक्ष संस्थान नासा को अपने अंतरिक्ष यात्रीयों के लिए रूसी राकेटो पर निर्भर होना पड़ा है। अमरीकी मानव अंतरिक्ष शटल जुलाई 2011 मे सेवानिवृत्त हो चुके है।

सोयुज TMA-22 कैपसूल बुधवार(16 नवंबर) की सुबह अंतरिक्ष केन्द्र से जुड़ेगा। इसके पश्चात अगले सप्ताह जुन 2011 से रह रहे अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर वापिस आयेंगे।

प्रथम अंतरिक्ष यात्री युरी गागारीन की प्रथम अंतरिक्ष यात्रा के 50 वर्ष पश्चात 2011 का वर्ष रोमांचकारी रहा है। इस वर्ष की सोयुज की कुछ दुर्घटनाओं के पश्चात एक दशक मे प्रथम बार अंतरिक्ष केन्द्र के मानव रहित होने की आशंका उत्पन्न हो गयी थी। लेकिन अब अंतरिक्ष केन्द्र से यह आशंका टल गयी है।

यह अंतरिक्ष अभियान मूलतः सितम्बर 2011 मे प्रक्षेपीत होना था लेकिन अगस्त मे एक मानवरहित मालवाहक सोयुज के दुर्घटनाग्रस्त होने के पश्चात इसे कुछ समय के लिये टाल दिया गया था। इसके पहले इस प्रक्षेपण के पहले नासा के अधिकारीयों ने रूसी राकेट और अंतरिक्ष संस्था पर भरोसा जताया था और कहा था कि रूसी वैज्ञानिको ने समस्या को पहचान लीया है और उसे ठीक कर दिया गया है।

4 अक्तूबर 1957 : ‘स्पुतनिक’ का प्रक्षेपण

In अंतरिक्ष, अंतरिक्ष यान, पृथ्वी on अक्टूबर 4, 2011 at 7:35 पूर्वाह्न

स्पुतनिक की प्रतिकृति

स्पुतनिक की प्रतिकृति

चार अक्तूबर का दिन मानव के अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास मे एक स्वर्णिम पृष्ठ है। इसी दिन चार अक्तूबर 1957 को पृथ्वी की सतह से पहली मानव-निर्मित वस्तु – रूसी उपग्रह ‘स्पुतनिक‘ अंतरिक्ष में छोड़ा गया। रूसी समाचार एजंसी, ‘टास’ के मुताबिक़ उपग्रह का वज़न क़रीब 84 किलोग्राम था और इसे पृथ्वी की निचली कक्षा मे स्थापित किया गया था।

पृथ्वी की कक्षा मे स्पुतनिक (चित्रकार की कल्पना पर आधारित)

पृथ्वी की कक्षा मे स्पुतनिक (चित्रकार की कल्पना पर आधारित)

यह मानव का पहला तकनिकी अंतरिक्ष अभियान था लेकिन इस अभियान ने उपरी वातावरण की परतों के घनत्व की गणना की। इसने वातावरण के आयनोस्फियर मे रेडीयो संकेतो के वितरण के आंकड़े जमा किये। इस उपग्रह मे उच्च दबाव मे भरी नायट्रोजन गैस से किसी उल्का की जांच का प्रथम अवसर प्रदान किया था। यदि उल्का द्वारा इस उपग्रह की टक्कर होती तो यान मे हुये छेद से हुये तापमान मे आये अंतर को पृथ्वी तक भेजा जा सकता था।

स्पुतनिक‘ को कजाकिस्तान के बैकानूर अंतरिक्ष प्रक्षेपण केन्द्र से प्रक्षेपित किया गया था। इस उपग्रह ने 29000 किमी/प्रति घंटा की गति से यात्रा की थी, तथा पृथ्वी की एक परिक्रमा के लिए 96.2 मिनिट लिये थे। इस उपग्रह ने 20.005 तथा 40.002 मेगा हर्टज पर रेडीयो संकेत भेजे थे जिन्हे सारे विश्व मे शौकिया रेडीयो आपरेटरो ने भी प्राप्त किया था। पश्चिमी देशों के वैज्ञानिकों ने भी इन रेडियो तरंगों पर शोध किया। इस उपग्रह से संकेत बैटरी के समाप्त होने तक 22 दिनो तक(26 अक्टूबर 1957) प्राप्त होते रहे। ‘स्पुतनिक’ 4 जनवरी 1958 पृथ्वी के वातावरण मे गीर कर जल गया, तब तक इसने 600 लाख किमी की यात्रा कर ली थी और अपनी कक्षा मे 3 महीने रहा था।

नवंबर 1957 में रूस ने ‘स्पुतनिक-2‘ को अंतरिक्ष में भेजा। इस उपग्रह में एक कुत्ते, ‘लाइका‘, को भी भेजा गया ताकि इंसान को अंतरिक्ष में भेजने के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। रूस और अमरीका, दोनों ने ही वर्ष 1957 में उपग्रह भेजने की योजना बनाई थी लेकिन अमरीका फरवरी 1958 में ही ये कर पाया। लेकिन अंतरिक्ष की खोज के अभियान में रूस अमरीका से आगे ही रहा। वर्ष 1961 में रूस ने विश्व के पहले व्यक्ति, अंतरिक्ष यात्री यूरी गागरिन को अंतरिक्ष में भेजा।

अनंत समुद्र मे एक छोटे से द्विप पर असहाय से हम : पृथ्वी और चंद्रमा

In अंतरिक्ष, अंतरिक्ष यान, पृथ्वी on सितम्बर 6, 2011 at 7:00 पूर्वाह्न

जुनो द्वारा लिया गया पृथ्वी और चंद्रमा का चित्र

जुनो द्वारा लिया गया पृथ्वी और चंद्रमा का चित्र

सौर मंडल के सबसे बड़े गैस महाकाय ग्रह बृहस्पति की यात्रा पर निकले अंतरिक्ष यान जुनो(Juno)ने मुड़कर अपने घर पृथ्वी की ओर देखा और यह चित्र लिया। यह चित्र पृथ्वी और चंद्रमा का हैं। इस चित्र मे पृथ्वी का नीला रंग स्पष्ट है। जब यह चित्र लिया तब जुनो पृथ्वी से 60 लाख किमी दूरी पर था।

यह चित्र हमारी पृथ्वी की बाह्य अंतरिक्ष से दिखायी देनी वाली छवि दर्शाती है तथा यह छवि हमे इस अनंत, विशाल अंतरिक्ष मे हमारा किरदार तथा स्थान दिखाती है। हम अपना एक नगण्य लेकिन खूबसूरत चित्र देखते है।

यह चित्र हमे 1990 मे कार्ल सागन द्वारा वायेजर 1 द्वारा लिये गये पृथ्वी के चित्र को दिये गये नाम Pale Blue Dot(धूंधला नीला बिंदू) की याद दिलाता है।

यह चित्र मुझे पेण्डुलम बैंड के गीत प्रेल्यूड/स्लैम की भी याद दिलाता है :

Somewhere out there in the vast nothingness of space,
Somewhere far away in space and time,
Staring upward at the gleaming stars in the obsidian sky,
We’re marooned on a small island, in an endless sea
Confined to a tiny spit of sand, unable to escape,
But tonight, on this small planet, on earth
We’re going to rock civilization…
– Lyrics from “Prelude/Slam,” Pendulum

हिन्दी भावानुवाद

कहीं पर अंतरिक्ष के विराट अंतराल मे
कहीं दूर समय और अंतराल मे
शीशे के जैसे आकाश मे चमकते तारो को घूरते हुये
अनंत समुद्र मे एक छोटे से द्विप पर असहाय से हम
एक छोटे से रेत के कण से बंधे, मुक्त होने मे असमर्थ हम
लेकिन आज रात, इस छोटे से ग्रह पर, पृथ्वी पर
सभ्यता को हिलाकर रख देंगे हम …….

कार्ल सागन के अनुसार

“हम जो कुछ भी जानते है और जिससे प्यार करते हैं, इस छोटे से बिंदू पर अस्तित्व मे है। सब कुछ….”