अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

हमारे सौरमंडल के समीप पृथ्वी के जैसे एक और ग्रह की खोज!

In अंतरिक्ष, ग्रह on फ़रवरी 8, 2012 at 5:20 पूर्वाह्न

कल्पना मे त्रिक तारे समूह मे GJ 667Cc ग्रह(पूर्णाकार के लिये चित्र पर क्लिक करें)

कल्पना मे त्रिक तारे समूह मे GJ 667Cc ग्रह(पूर्णाकार के लिये चित्र पर क्लिक करें)

सौर मंडल बाह्य जीवन योग्य ग्रहो की खोज मे एक नयी सफलता मीली है। वैज्ञानिको ने एक त्रिक तारा समूह(Triple Star System) मे एक ग्रह खोजा है जो कि हमारे सौर मंडल के समीप 22 प्रकाशवर्ष की दूरी पर है। इससे बड़ा उत्साहजनक समाचार यह है कि यह ग्रह गोल्डीलाक क्षेत्र (जीवन योग्य क्षेत्र) मे है। इस ग्रह का नाम GJ 667Cc है।

ज्यादा उत्साहित मत दिखायीये क्योंकि इसके साथ कुछ किंतु परंतु जुड़े है , इसके बावजुद यह एक उत्साहजनक समाचार है।

GJ ‌667 यह एक तीन तारो का समूह है और हमारे सौर मंडल के समीप है, केवल 22 प्रकाशवर्ष की दूरी पर, जो कि इसे सौर मंडल के सबसे समीप के तारो मे स्थान देता है। इस समूह के दो तारे हमारे सूर्य की तुलना मे छोटे और ठंडे है। ये दोनो तारे एक दूसरे की काफी समीप से परिक्रमा करते है जबकि एक तीसरा छोटा तारा इन दोनो तारों की 35 अरब किमी दूरी पर से परिक्रमा करता है। एकाधिक तारो के समूह मे तारो को रोमन अक्षरो के कैपीटल अक्षर से दर्शाया जाता है, इसलिये इस समूह के दो बड़े तारे GJ 667A तथा GJ 667B है, तीसरे छोटे तारे का नाम GJ667C है।

इसमे तीसरा तारा हमारे लिये महत्वपूर्ण है। यह एक ठंडा M वर्ग(M Class) का वामन तारा(Dwarf Star) है, इसका व्यास सूर्य के व्यास का एक तीहाई है। सूर्य की तुलना मे यह धूंधला है क्योंकि वह तुल्नात्मक रूप से सूर्य के प्रकाश का 1% ही उत्सर्जित करता है। इसके आसपास ग्रह की खोज के लिये अध्ययन कुछ वर्षो से जारी थे और इसके संकेत भी मीले थे। नयी खोज मे पहली बार इस तारे की परिक्रमा करते ग्रह के ठोस प्रमाण मीले है।

GJ667 तारासमूह प्रणाली

GJ667 तारासमूह प्रणाली

इस अध्ययन मे डाप्लर प्रभाव का प्रयोग किया गया। जब कोई ग्रह किसी तारे की परिक्रमा करता है तब उसका गुरुत्वाकर्षण अपने मातृ तारे को भी खिंचता है। मातृ तारे पर यह प्रभाव सीधे सीधे मापा नही जा सकता है लेकिन डाप्लर प्रभाव के द्वारा उस तारे के वर्णक्रम(Spectrum) मे एक स्पष्ट विचलन दिखायी देता है। यह किसी दूर जाती ट्रेन की ध्वनि की पीच मे आये बदलाव के जैसा ही है। यदि इस वर्णक्रम का मापन ज्यादा सटिक होतो यह वर्णक्रम ग्रह का द्रव्यमान, कक्षा तथा परिक्रमाकाल तक की जानकारी दे सकता है।

इस मामले मे वर्णक्रम दर्शाता है कि GJ667C के चार ग्रह हो सकते है। दो सबसे गहरे संकेत इन ग्रहो का परिक्रमा काल 7दिन तथा 28 दिन दर्शाते है, तीसरे ग्रह का परिक्रमा काल 75 दिन है। चौथे ग्रह के संकेत उसके परिक्रमा काल को लगभग 20 वर्ष दर्शाते है।

इनमे से 28 दिनो के परिक्रमा काल वाला ग्रह महत्वपूर्ण है। इस ग्रह का द्रव्यमान पृथ्वी से 4.5 गुणा है, जो इसे भारी और विशाल बनाता है। 28 दिनो की कक्षा ग्रह को मातृ तारे की समीप की कक्षा अर्थात लगभग 70 लाख किमी – 50 लाख किमी की कक्षा मे स्थापित करती है। (तुलना के लिए बुध सूर्य से 570 लाख किमी दूरी की कक्षा मे है।) लेकिन ध्यान दे कि GJ667 यह एक धूंधला और अपेक्षाकृत ठंडा तारा है, जिससे इस दूरी पर यह ग्रह जीवन योग्य क्षेत्र के मध्य मे आता है। किसी ग्रह पर जल द्रव अवस्था मे की उपस्थिति तारे के आकार, तापमान तथा ग्रह के गुणधर्मो पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिये किसी बादलो से घीरे ग्रह पर ग्रीनहाउस प्रभाव के द्वारा उष्णता सोख लीये जाने से वह ग्रह तारे से दूर होने के बावजूद भी गर्म हो सकता है।

यदि यह ग्रह चट्टानी है, इस पर द्रव जल हो सकता है। अभी हम इस ग्रह के द्रव्यमान के अतिरिक्त कुछ नही जानते है। इस ग्रह का द्रव्यमान पृथ्वी के चार गुणे से ज्यादा है अर्थात चार गुणे से ज्यादा गुरुत्वाकर्षण! इतना ज्यादा गुरुत्वाकर्षण मे कोई भी जीव अपने ही भार से दबकर मर जायेगा! लेकिन ठहरीये!

यह सत्य है कि गुरुत्वाकर्षण द्रव्यमान पर निर्भर करता है, दोगुणा द्रव्यमान अर्थात दोगुणा गुरुत्वाकर्षण। लेकिन गुरुत्वाकर्षण आकार के प्रतिलोम-वर्ग (inverse square) पर भी निर्भर करता है। यदि द्रव्यमान समान रहे लेकिन त्रिज्या दोगुणी कर दी जाये तब गुरुत्वाकर्षण एक चौथाई हो जाता है। इसलिये यदि GJ667C का द्रव्यमान चार गुणा हो लेकिन त्रिज्या दोगुणी हो तब उसका गुरुत्व पृथ्वी के समान ही होगा।

मुद्दा यह है कि ग्रह को उसके द्रव्यमान के आधार पर जांचा नही जा सकता है।

हम अभी यह नही जानते है किं इस ग्रह पर वातावरण है या नही। लेकिन ऐसा लगता है कि अपने गुरुत्वाकर्षण से यह ग्रह वातावरण को बांधे रखने मे सक्षम होगा। यदि इसपर वातावरण हो लेकिन हम यह नही जान सकते कि इस पर द्रव जल है या नही!

वर्तमान मे इससे जुड़े अनेक अज्ञात है, लेकिन आशा अभी बलवती है! क्यों ?

इसके दो कारण है। इस तरह के लाल वामन तारो की हमारी आकाशगंगा मे भरमार है। वे हमारे सूर्य के जैसे तारो की तुलना मे 10 गुणा ज्यादा है। यदि इनमे से एक के पास ग्रह है, वह भी एक त्रिक तारा समूह मे! इसका अर्थ यह है कि किसी तारे के पास ग्रह होना हमारी आकाशगंगा मे बहुत ही सामान्य है। वैसे यह तथ्य और भी अध्ययनो से ज्ञात हो रहा है लेकिन एक और पुष्टि इसे और मजबूत बना रही है।

दूसरा कारण यह है कि यह ग्रह हमारे समीप है। हमारी आकाशगंगा के व्यास 100,000 प्रकाशवर्ष की तुलना मे 20 प्रकाश वर्ष कुछ नही है। इतनी कम दूरी पर ही हमारी पृथ्वी से थोड़ा भी मीलते जुलते ग्रह की खोज यह दर्शाती है कि हमारी आकाशगंगा ऐसे अरबो ग्रह हो सकते है। जिसमे कुछ तो जीवन की संभावना से भरपूर होंगे ही।

तीसरा बिंदु यह है कि इन तारो मे भारी तत्वो की कमी है। GJ667C का वर्णक्रम दर्शाता है कि इस तारे मे सूर्य की तुलना मे आक्सीजन और लोहे की मात्रा कहीं कम है। अब तक के अध्ययन यह दर्शाते है कि इस तरहे के तारों के ग्रह होने की संभावना सूर्य जैसे तारों की तुलना मे कम होती है, जिसमे इस तरह के तत्व(आक्सीजन/लोहा) की बहुतायत है। शायद हम भाग्यशाली है कि हमारे पास के भारी तत्वो की कमी वाले तारे के पास ग्रह है या इसके पहले के अध्ययन मे कुछ कमी थी और इस तरह के तारो के भी ग्रह हो सकते है। कुल मीलाकर ग्रहो की संख्या बहुत ज्यादा हो सकती है।

आप इसे किसी भी तरह से देंखे, यह एक अच्छा समाचार है। और यह हमारे मुख्य उद्देश्य : दूसरी पृथ्वी की खोज की ओर एक बड़ा कदम है। वह दिन समीप आ रहा है, शायद काफी जल्दी!

इस लेख पर आपकी राय:

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: