अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

चंद्रमा पर तीन दिन: अपोलो १५

In चन्द्र अभियान on मार्च 2, 2007 at 1:56 पूर्वाह्न

अपोलो १५ यह अपोलो कार्यक्रम का नौंवा मानव अभियान था और चन्द्रमा पर अवतरण करने वाला चौथा अभियान था। यह J अभीयानो मे से पहला अभियान था जिनमे चन्द्रमा पर ज्यादा समय तक ठहरने की योजना थी।
कमांडर डेवीड स्काट और चन्द्रयान चालक जेम्स इरवीन ने चन्द्रमा पर तीन दिन बिताये और कुल १८.५ घंटे यान बाह्य गतिविधीयो मे लगाये। इस अभियान मे उन्होने चन्द्रयान से दूर जाकर चन्द्रमा का अध्यन करने के लिये लूनर रोवर नामक वाहन का प्रयोग किया। इस अभियान मे उन्होने चन्द्रमा की सतह से कुल ७७ किग्रा नमुने एकत्र किये।
इस दौरान नियंत्रण यान चालक अल्फ्रेड वार्डन (जो चन्द्रमा की कक्षा मे थे) वैज्ञानिक उपकरण यान की सहायता से चन्द्रमा की सतह और वातावरण का अध्यन कर रहे थे। वे पैनोरोमीक कैमरा, गामा किरण स्पेक्ट्रोमीटर, लेजर अल्टीमीटर, द्रम्व्यमान स्पेक्ट्रोमीटर का प्रयोग कर रहे थे। अभियान के अंत मे चन्द्रमा की परिक्रमा के लिये एक उपग्रह भी छोड़ा गया।

अंतरिक्ष यात्री दल

  • डेवीड स्काट(David Scott) -३ अंतरिक्ष यात्राये कमांडर
  • अल्फ्रेड वोर्डन(Alfred Worden) – १ अंतरिक्ष यात्रा, नियंत्रण यान चालक
  • जेम्स इरवीन(James Irwin) -१ अंतरिक्ष यात्रा चन्द्रयान चालक
स्काट, वोर्डन और इरवीन

स्काट, वोर्डन और इरवीन


वैकल्पिक यात्री दल

  • डीक गोर्डन (Dick Gordon)- कमांडर
  • वेन्स ब्रैंड(Vance Brand)- नियंत्रण यान चालक
  • हैरीशन स्कमिट(Harrison Schmitt)- चन्द्रयान चालक

अभियान के आंकडे़

द्रव्यमान
प्रक्षेपित द्रव्यमान : २,९२१,००५ किग्रा
यान का द्रव्यमान : ४६.७८२ किग्रा
चन्द्रयान का द्रव्यमान : १६,४२८ किग्रा
नियंत्रणयान का द्र्व्यमान : ३०,३५४ किग्रा

पृथ्वी की परिक्रमा : ४ जिसमे से ३ चन्द्रमा रवाना होने से पहले और १ वापस आने के बाद
चन्द्रमा की परिक्रमा : ७४

चन्द्रयान का मुख्य नियंत्रण यान से विच्छेद : ३० जुलाई १९७१ समय १८:१३:१६ बजे
चन्द्रयान का मुख्य नियंत्रण यान से पुनः जुड़ना : २ अगस्त १९७१ समय १९:१०:२५ बजे

यान बाह्य गतिविधीयां

स्काट – चन्द्रयान के उपर खडे़ रहे
प्रारंभ समय : ३१ जुलाई १९७१ , ००:१६:४९ बजे
अंत समय : ३१ जुलाई १९७१ , ००:४९:५६ बजे
कुल समय : ३३ मिनिट , ०७ सेकंड

यान बाह्य गतिविधी १- स्काट और इरवीन
प्रारंभ समय : ३१ जुलाई १९७१ , १३:१२:१७ बजे
अंत समय : ३१ जुलाई १९७१ , १९:४५:५९ बजे
कुल समय : ६ घंटे ३२ मिनिट ४२ सेकंड

यान बाह्य गतिविधी २- स्काट और इरवीन
प्रारंभ समय : १ अगस्त १९७१ , ११:४८:४८ बजे
अंत समय : १ अगस्त १९७१ , १९:०१:०२ बजे
कुल समय : ७ घंटे १२ मिनिट १४ सेकंड

यान बाह्य गतिविधी ३- स्काट और इरवीन
प्रारंभ समय : २ अगस्त १९७१ , ०८:५२:१४ बजे
अंत समय : २ अगस्त १९७१ , १३:४२:०४ बजे
कुल समय : ४ घंटे ४९ मिनिट ५० सेकंड

यान बाह्य गतिविधी ४- वोर्डन (चन्द्रमा की परिक्रमा करते समय)
प्रारंभ समय : ५ अगस्त १९७१ , १५:३१:१२ बजे
अंत समय : ५ अगस्त १९७१ , १६:१०:१९ बजे
कुल समय : ३९ मिनिट ०७ सेकंड

अभियान के मुख्य अंश

समस्या
प्रक्षेपण के तुरंत बाद चरण १ के अलग होने पर, चरण १ के उपकरणो ने कार्य बंद कर दिया था। यह चरण २ के ज्वलन से हुआ था जिसने चरण १ के उपकरणो को जला दिया था। यह इसके पहले कभी नही हुआ था, जांच पर पता चला कि अपोलो १५ के लिये कुछ बदलाव किये गये थे जिसमे चरण १ और चरण २ काफी नजदिक हो गये थे। बाद के अभियानो मे इस बदलाव को ही बदल दिया गया।

योजना और प्रशिक्षण
अपोलो १५ के यात्रीदल ने अपोलो १२ के वैकल्पिक यात्री दल के रूप मे कार्य किया था। इस अभियान के सभी यात्री नौसेना से थे जबकि वैकल्पिक यात्री वायुसेना से थे। यह अपोलो १२ के ठीक विपरीत था।
मूल रूप से यह अभियान अपोलो १२,१३,१४ की तरह H अभियान(छोटा) अभियान था लेकिन इसे बाद मे J (चन्द्रमा पर ज्यादा समय बिताने वाले अभियान)अभियान मे बदल दिया गया। इस अभियान दल के यात्रीयो को भूगर्भ शास्त्र का गहन प्रशिक्षण दिया गया था।

इस यान ने पहली बार चन्द्रमा पर लुनर रोवर नामके चन्द्र वाहन को चन्द्रमा पर लेकर जाने का श्रेय प्राप्त किया था। यह वाहन बोइंग ने बनाया था। इस वाहन को मोड़कर ५ फीट २० इंच की जगह मे रखा जा सकता था। इसका वजन २०९ किग्रा और दो यात्रीयो के साथ ७०० किग्रा का भार ले जाने मे सक्षम था। इसके पहीये स्वतंत्र रूप से २०० वाट की बिजली की मोटर से चलते थे। यह १०-१२ किमी प्रति घंटा की गति से चल सकता था।
चन्द्रमा की यात्रा
अपोलो १५ को २६ जुलाई १९७१ को ९:३४ को प्रक्षेपित कर दिया गया। इसे चन्द्रमा तक जाने के लिये ४ दिन लगने वाले थे। पृथ्वी की कक्षा मे दो घंटे रहने के बाद , सैटर्न ५ राकेट के तीसरे चरण के इंजन SIVB को दागा गया और यान चन्द्रमा की ओर चल दिया।
चौथे दिन वे चन्द्रमा की कक्षा मे पहुंच गये और चन्द्रमा पर अवतरण की तैयारी करने लगे।
स्काट और इरवीन के चन्द्रमा पर तीन दिन के अभियान के दौरान वोर्डन के पास निरिक्षण के लिये एक व्यस्त कार्यक्रम था। इस अभियान मे एक उपकरण कक्ष भी था, जिसमे पैनोरोमीक कैमरा, गामा किरण स्पेक्ट्रोमीटर, लेजर अल्टीमीटर, द्रम्व्यमान स्पेक्ट्रोमीटर उपकरण थे। अभियान की वापिसी मे वोर्डन को यान से बाहर निकल कर कैमरो से फिल्म कैसेट भी निकाल कर लानी थी।

उपकरण कक्ष

अपोलो १५ यह अभियान पहली बार चन्द्रमा पर तीन यान बाह्य गतिविधीया करने वाला था। चन्द्रमा पर अवतरण के बाद स्काट ने चन्द्रयान का उपर का ढक्कन खोल कर जगह का निरिक्षण किया। पहली यान बाह्य गतिविधी मे यात्री लूनर रोवर वाहन से हेडली डेल्टा पर्वत की तलहटी मे पहुंचे। यहीं पर उन्हे जीनेसीस राक(Genesis Rock) मीली। चन्द्रयान पर वापिस पहुंचने पर स्काट ने ताप से चन्द्रमा की सतह पर गढ्ढे करना शुरू किये।

 

जीनेसीस राक

जीनेसीस राक

यात्री हेडली रीली के किनारे तक भी गये। स्काट ने चंद्रमा पर एक पंख और एक हथोड़ा साथ मे गिराकर यह सिद्ध किया की गुरुत्वाकर्षण के कारण गीरने वाली वस्तुओ की गति पर उसके द्रव्यमान का प्रभाव नही होता है।

वापिसी की यात्रा मे यात्री एक दिन और चन्द्रमा की कक्षा मे रहे, वोर्डन अपने निरिक्षण मे लगे रहे। चन्द्रमा की कक्षा मे एक उपग्रह छोड़ने के बाद उन्होने राकेट दाग कर पृथ्वी की यात्रा शुरू की।

अपोलो १५ की वापिसी दो पैराशुटो के साथ

अपोलो १५ की वापिसी दो पैराशुटो के साथ


पृथ्वी पर वापिसी के दौरान यान का एक पैराशूट खुल नही पाया और दो पैराशुटो के साथ यान सकुशल पानी मे गीर गया।

इरवीन अमरीकी ध्वज को प्रणाम करते हुये

इरवीन अमरीकी ध्वज को प्रणाम करते हुये


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