अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

अपोलो ७ : मानव सहित प्रथम अपोलो उड़ान

In चन्द्र अभियान on फ़रवरी 10, 2007 at 1:01 पूर्वाह्न

अपोलो ७ यह अपोलो कार्यक्रम का प्रथम मानव अभियान था। यह ग्यारह दिन पृथ्वी की कक्षा मे रहने वाला था, साथ ही सैटर्न 1B की प्रथम मानव सहित उडान थी। पहली बार तीन अमरीकी यात्री अंतरिक्ष मे जा रहे थे।

अपोलो ७

अपोलो ७


इस यात्रा के अंतरिक्ष यात्री

  • वैली स्कीरा (Wally Schirra) -कमाण्डर (commander)। इसके पहले तीन अंतरिक्ष यात्रा का अनुभव था।
  • डान ऐसेले(Donn Eisele)– मुख्य नियंत्रण यान चालक (command module pilo)। एक अंतरिक्ष यात्रा का अनुभव।
  • वाल्टर कनींगम(Walter Cunningham)– चन्द्रयान चाल(lunar module pilot)। एक अंतरिक्ष यात्रा का अनुभव।

यह दल दुर्भाग्यशाली अपोलो १ अभियान यात्रीदल का वैकल्पिक(backup) दल था।

ऐसेले,स्कीरा,कनींगम

ऐसेले,स्कीरा,कनींगम


उडान
अपोलो ७ की उडान उत्साहवर्धक थी। जनवरी १९६७ के अपोलो १ लांच पैड दुर्घटना के बाद नियंत्रण यान(Command Module) की अभिकल्पना(Design) दूबारा की गयी थी। स्कीरा जिन्हे मर्क्युरी और जेमीनी अंतरिक्ष अभियान का अनुभव था को इस अभियान का नेत्व दिया गया। यह यान चन्द्रयान(Lunar Module) नही ले जा रहा था इसलिये बडे सैटर्न V राकेट की बजाय सैटर्न 1B राकेट का उपयोग किया गया। स्कीरा इस अभियान को अपोलो १ के यात्रीयों की याद मे फिनीक्स नाम देना चाहते थे। फिनिक्स वह मिथक पक्षी है जो अपनी राख से भी उठ खडा होता है। इस अभियान की शुरुवात अपोलो १ के राख होने से हुयी थी। लेकिन इसे नकार दिया गया।

अपोलो की उडान


अपोलो ७ के सभी उपकरणो और अभियान के सभी कार्य बिना किसी बडी बाधा के सफल रहे थे। इस अभियान का मुख्य इंजन (SPS-Service Propulsion System) जो यान को चन्द्र कक्षा मे और वापिस  पहुंचाने वाला था, सफलतापुर्वक ८ बार जाण्च के लिये दागा जा चुका था।

अपोलो का यात्री कक्ष जेमीनी के यात्री कक्ष से बडा था लेकिन कक्षा मे ११ दिन के लिये काफी नही था। ११ अक्टूबर १९६८ को अपोलो ७ को प्रक्षेपित किया गया। इस अभियान के दौरान खाना खराब हो गया और तीनो यात्रीयो को सर्दी हो गयी थी। इसके कारण कमांडर स्कीरा चीडचीडे से हो गये थे। तीनो यात्रीयो ने मुख्य नियंत्रण कक्ष से वापसी की बाते शुरू कर दी थी। इस सबके फलस्वरूप अपोलो के अगले अभियानो मे इन तीनो मे से किसी को भी नही चुना गया। लेकिन इस सब के बावजूद यह अभियान सफल रहा।

अपोलो के SIVB राकेट के अलग होने का दृश्य

अपोलो के SIVB राकेट के अलग होने का दृश्य


उपर दी गयी तस्वीर ११ अक्टूबर १९६८ को अपोलो ७ से ली गयी थी।

इस अभियान के उद्देश्यो मे टीवी पर सीधा प्रसारण और चन्द्रयान की डाकींग की जांच था। यह दोनो उद्देश्य सफल रहे !
अपोलो ७ लवफिल्ड डलास टेक्सास प्रदर्शनी मे रखा हुआ है।

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