अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

अपोलो १ : एक दुर्घटना

In चन्द्र अभियान on फ़रवरी 6, 2007 at 1:50 पूर्वाह्न

चन्द्रमा और पृथ्वी

चन्द्रमा और पृथ्वी

चन्द्रमा यह मानव मन को सदीयो से ललचाता रहा है। कवियो ने इस चन्द्रमा के लिये क्या क्या नही लिखा। विज्ञानीयो के लिये भी चन्द्रमा एक कुतुहल का विषय रहा। जब मानव पृथ्वी की  सीमा को लांघ का ब्रम्हांड की गहराईयो मे गोते लगाने निकला , तब चन्द्रमा उसका पहला पडाव था। अपोलो चन्द्र अभियान इस यात्रा का पहला कदम !

शहीद अंतरीक्ष योद्धा : गस इवान ग्रासीम, एडवर्ड एच व्हाईट द्वीतिय और रोजर बी कैफ़ी("Gus" Ivan Grissom, Edward H. White II and Roger B. Chaffee)

शहीद अंतरीक्ष योद्धा : गस इवान ग्रासीम, एडवर्ड एच व्हाईट द्वीतिय और रोजर बी कैफ़ी("Gus" Ivan Grissom, Edward H. White II and Roger B. Chaffee)

 


ए एस २०४ यह नाम था उस यान का जो अपोलो १ कैपसूल को पृथ्वी की कक्षा मे स्थापित करने वाला था। यह सैटर्न १बी(Satirn 1B) राकेट से प्रक्षेपित होने वाला अमरीका का पहला अपोलो अभियान था, जो कि चन्द्रमा पर मानव के पहले कदम के लिये एक मील का पत्थर साबीत होने वाला था। इसे १९६७ की पहली तिमाही मे प्रक्षेपित किया जाना था। इस अभियान का लक्ष्य था, प्रक्षेपण प्रक्रिया  की जांच, भूमीकेन्द्र द्वारा यान नियंत्रण और मार्गदर्शण की जांच था।

अपोलो १

अपोलो १

अपोलो १

जनवरी २७ सन १९६७ को कोई प्रक्षेपण की योजना नही थी। योजना थी कि एक छद्म(Simulated) प्रक्षेपण से यह जांच की जाये कि अपोलो यान अपनी अंदरूनी बिजली से सामान्य कार्य कर सकता है या नही। यदि यान इस जांच मे सफल हो जाये और अगली सभी जांच मे सफल हो तो २१ फरवरी १९६७ को इस यान को प्रक्षेपित किया जाना तय था।

अपोलो १ की सफलता के बाद इस यान की दो और उडाने तय थी। पहली उडान मे अपोलो के दूसरे भाग और चन्द्रयान को सैटर्न १ बी पर प्रक्षेपीत कर पृथ्वी की निचली कक्षा मे स्थापित किया जाना था। दूसरी उडान मे सैटर्न ५ पर अपोलो और चन्द्रयान दोनो को पृथ्वी की उपरी कक्षा मे स्थापित करना था।

२७ जनवरी १९६७ को यह जांच की जानी थी , जो कि पूरी नही हो सकी। तीनो अंतरीक्ष यात्री ग्रीसम, व्हाईट और कैफी अंतरीक्ष सूट पहन कर यान के अंदर पहुंचे। १.०० बजे दोपहर वे अपनी सीट बेल्ट बांधकर जांच के लिये तैयार हो गये। २.४५ मिनिट पर यान को सील कर दिया गया और यान की हवा को निकाल आक्सीजन भरी जाने लगी।

यान मे आक्सीजन का दबाव ज्यादा हो गया था और यात्रीयो और नियंत्रण कक्ष के बिच मे संपर्क टूट गया था। इस वजह से जांच को ५.४० मिनट तक स्थगित कर दिया गया। ६.२० तक उल्टी गिनती जारी थी लेकिन ६.३० को फिर से उल्टी गिनती रोक कर नियंत्रण कक्ष और यात्रीयो के बीच सपर्क स्थापित करने की कोशीश की गयी।

अपोलो १ यह अंतरिक्ष यात्रा के लिये बनाया जरूर गया था लेकिन इसका उद्देश्य चंद्रमा की यात्रा नही था इसलिये इसमे लैंड करने के लिये उपकरण नही थे। यान मे यात्री नियंत्रण कक्ष से संपर्क टूट जाने की स्थिती मे की जाने वाली स्थिती मे होने वाली क्रियाओ की जरूरी जांच मे लगे थे। ६.३१ मिनट पर नियंत्रण कक्ष को एक सही तरह से काम कर रही COM लींक से कैफी की आवाज मे एक संदेश मिला की काकपिट मे आग लगी है। कुछ सेकंड बाद एक तेज चीख के साथ संपर्क पूरी तरह टूट गया। टीवी के मानीटर पर व्हाइट को यान का द्वार खोलने की कोशीश करते देखा गया। यान इस तरह से बना था कि द्वार अंदर की ओर खुलता था लेकिन्न आक्सीजन का दबाव बाहर की ओर होने से उसे खोलने नही दे रहा था। इससे ज्यादा बूरी बात यह थी कि दरवाजे को खोलने के लिये यात्रीयो को कई बोल्ट खोलने थे। आक्सीजन का दबाव बडते जा रहा था। कुछ देर मे वह इतना हो गया कि दरवाजा खोलना असंभव हो गया था।

आक्सीजन की वजह से आग तेजी से फैली और पल भर मे सब कुछ खत्म हो गया। यान बीना प्रक्षेपण के ही जलकर राख हो या। यह सिर्फ १७ सेकंड के बीच मे हो गया। तीनो यात्री शहीद हो गये !

आग इतनी भयावह थी की व्हाईट और ग्रीसम के सूट पिघल कर एक दूसरे से जुड गये थे। यात्रीयो को बाहर निकलने के लिये कम से कम पांच मिनट चाहीये थे और उन्हे मिले सिर्फ १७ सेकंड ! दूर्घटना के एक कारण मे यान का अंदर खुलने वाला द्वार था, जो कि यान बनाने वाली कंपनी नार्थ अमेरीकन एवीएशन की योजना के विपरीत था। कंपनी की अभीकल्पना (Design) मे आक्सीजन की जगह आक्सीजन और नायट्रोजन का मिश्रण था। कंपनी की अभीकल्पना मे दूर्घटना की स्थिती मे विस्फोट से खुलने वाले द्वार भी लगाने की योजन थी।  लेकिन नासा ने इन सभी सुझावो को नही माना था।

इसी तरह की एक दुर्घटना मे सोवियत अंतरिक्षयात्री वेलेण्टीन बोन्डारेन्को की मार्च १९६१ मे मृत्यु हो गयी थी।

इस दुर्घटना ने अपोलो अभियान को नये सीरे से अभिकल्पित करने मजबूर कर दिया। यान की अभिकल्पना मे काफी सारे बदलाव किये गये। इसके बावजूद अपोलो यान मे काफी सारी खामीया थी, जो कि अपोलो १३ तक जारी रही।

इन तीन शहीद यात्रीयो के नाम तीन तारो को दिये गये है ये तारे है नवी(Navi), ड्नोसेस(Dnoces) और रेगोर(Regor)। यह नाम इवान(ivan), सेकंड(Second) और रोजर (roger) को उल्टा लिखे जाने पर मिलते है। चन्द्रमा पर के तीन गढ्ढो के और मंगल पर तीन पहाडीयो के नाम भी इन शहीदो के नाम पर रखे गये है।

तीनो शहीद यात्रीयो को मेरी हार्दिक श्रद्धांजली !

  1. बहुत बहुत ज्ञानवर्धक है, धन्यवाद आसीष जी

  2. अच्छी जानकारी। पाठकों को मैं टॉम हैंक्स की अपोलो-4 देखने के लिए भी प्रेरित करूँगा।

  3. बहुत अच्छा लिखा हे आसीस जि

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