अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

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श्वेत श्याम उपग्रह

In ग्रह, सौरमण्डल on जनवरी 25, 2012 at 4:17 पूर्वाह्न

शनि का श्वेत श्याम चंद्रमा : आऐपिटस

शनि का श्वेत श्याम चंद्रमा : आऐपिटस

यह विचित्र आकाशीय पिंड कैसा है ? इस विचित्र पिंड का कुछ भाग कोयले के जैसा गहरा है जबकि शेष भाग बर्फ के जैसे चमकीला है। यह शनि का चंद्रमा आऐपिटस है। इसके गहरे रंग के भाग की संरचना अज्ञात है लेकिन अवरक्त वर्णक्रम की जांच से माना जाता है कि यह कार्बन के ही कीसी गहरे प्रकार से बना है। आऐपिटस के विषुवत पर एक असाधारण पर्वत श्रेणी है जो इस चंद्रमा को अखरोट के जैसे बनाती है। यह चित्र अमरीकी अंतरिक्षयान कासीनी से 2007 मे लिया है जब कासीनी आऐपिटस से 75,000 किमी दूरी पर था। चित्र मे दिखायी दे रहे विशाल क्रेटर का व्यास 450 किमी है और ऐसा प्रतित होता है कि इसने एक समान आकार के पुराने क्रेटर को ढंका हुआ है। गहरे रंग के पदार्थ ने इसके पूर्वी क्षेत्रो मे समान रूप से पर्वतो और क्रेटरो को से ढंका हुआ है। इस गहरे रंग के पदार्थ की मोटाई लगभग 1 मीटर से कम है।

सौर मंडल की सबसे बड़ी सूर्य घड़ी

In ग्रह, सौरमण्डल on अक्टूबर 18, 2011 at 5:07 पूर्वाह्न

सौर मंडल की सबसे बड़ी सूर्य घड़ी(पूर्णाकार छवि के लिए चित्र पर क्लिक करें)

सौर मंडल की सबसे बड़ी सूर्य घड़ी(पूर्णाकार छवि के लिए चित्र पर क्लिक करें)

शनि के वलय हमारे सौर मंडल मे सबसे बड़ी सूर्य घड़ी का निर्माण करते है। लेकिन ये सूर्यघड़ी शनि के मौसम की ही जानकारी देते है, शनि के दिन के समय की नही। 2009 मे जब शनि अपने विषुव पर था, इन वलयो की छाया लुप्त हो गयी थी क्योंकि इन वलयो का प्रतल सूर्य की एकदम सीध मे था। (यह कुछ वैसे ही है जैसे 21 मार्च या 23 सितंबर दोपहर 12 बजे पृथ्वी की विषुवत रेखा पर खड़े व्यक्ति की छाया उसके पैरो के निचे बनेगी।)

2009 के पश्चात जैसे ही शनि सूर्य की कक्षा मे आगे बढ़ा, वलयो की छाया चौड़ी होते गयी और दक्षिण की ओर बढ़ते गयी। शनि के वलयो की छाया पृथ्वी से दिखायी नही देती क्योंकि हमारी सूर्य की ओर स्थिति के कारण ये शनि वलयो के पिछे छुप जाती है। प्रस्तुत तस्वीर कासीनी अंतरिक्षयान से ली गयी है जो वर्तमान मे शनि की परिक्रमा कर रहा है। इस चित्र मे वलय एक खड़ी रेखा के जैसे दिखायी दे रहे है। सूर्य इस चित्र मे उपर दायें कोने की ओर है जिससे शनि के दक्षिण मे ये जटिल छायायें बन रही है। कासीनी 2004 से शनि की परिक्रमा कर रहा है और उसके शनि की कक्षा मे 2017 तक इन छायाओं की अधिकतम लम्बाई के बनने तक रहने की आशा है।

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