अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

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सोना कितना सोना है ?

In अंतरिक्ष, तारे on सितम्बर 20, 2011 at 7:27 पूर्वाह्न

न्यूट्रॉन तारों के टकराव से स्वर्ण निर्माण की संभावना है।

न्यूट्रॉन तारों के टकराव से स्वर्ण निर्माण की संभावना है।

स्वर्ण/सोना मानव मन को सदियों से ललचाता रहा है! लेकिन स्वर्ण की उत्पत्ती कैसे हुयी ? हम यहा पर स्वर्ण खदानो की चर्चा नही कर रहे है, चर्चा का विषय है कि इन खदानो मे स्वर्ण का निर्माण कैसे हुआ है?

हमारे सौर मंडल मे स्वर्ण की मात्रा शुरुवाती ब्रह्माण्ड मे निर्माण हो सकने लायक स्वर्ण की मात्रा के औसत से कहीं ज्यादा है। स्वर्ण निर्माण की यह प्रक्रिया सूर्य मे नियमित रूप से होने वाली हिलीयम निर्माण की प्रक्रिया के जैसे ही है। इस प्रक्रिया मे हायड्रोजन परमाणु के दो नाभिक हिलीयम का नाभिक बनाते है। हिलीयम निर्माण की इस प्रक्रिया से उत्पन्न ऊर्जा के कारण ही सूर्य प्रकाशमान है।

दो हिलीयम के नाभिको के संलयन से कार्बन बनता है, इसी क्रम मे मैग्नेशीयम, सल्फर और कैल्सीयम बनते है। विभिन्न तत्वो के संलयन के फलस्वरूप अन्य भारी तत्व बनते है। लेकिन लोहे के नाभिको के निर्माण की प्रक्रिया तक पंहुचते पहुंचते यह प्रक्रिया धीमी हो जाती है क्योंकि यह प्रक्रिया ऊर्जा उत्पन्न करने की बजाये ऊर्जा लेना शुरू कर देती है। स्वर्ण(परमाणु क्रमांक 79) लोहे(परमाणु क्रमांक 27) से बहुत ज्यादा भारी तत्व है। सूर्य जैसे तारो मे स्वर्ण निर्माण असंभव होता है!

स्वर्ण आया कहां से ?

एक संभावना सुपरनोवा विस्फोट की है। सुपरनोवा विस्फोट की प्रचंड ऊर्जा और दबाव मे लोहे से ज्यादा भारी तत्व बन सकते है। सूर्य दूसरी पिढी़ का तारा है। यह किसी तारे के सुपरनोवा विस्फोट के पश्चात बचे पदार्थ से बना है। लेकिन सुपरनोवा विस्फोट से भी इतनी मात्रा मे स्वर्ण नही बन सकता है जितना हमारे सौर मंडल मे है !

प्रश्न वहीं है स्वर्ण आया कहां से ?

वैज्ञानिको ने एक नया सिद्धांत प्रस्तुत किया है। न्युट्रान से भरे नाभिक वाले तत्व जैसे स्वर्ण दो न्युट्रान तारो के टकराव से आसानी से बन सकते है। इस तरह के न्युट्रान तारो के टकराव द्वारा लघु अवधी वाला गामा किरण विस्फोट(GRB) भी होता है। प्रस्तुत चित्र दो न्युट्रान तारों के टकराव को दर्शा रहा है। चित्र कल्पना आधारित है।

ये विस्फोट विनाशकारी होते है! क्या आपके पास इन महाकाय विस्फोटो की कोई निशानी है ?

ठंडा होता हुआ न्यूट्रॉन तारा

In अंतरिक्ष, तारे, निहारीका on मार्च 9, 2011 at 5:13 पूर्वाह्न

 

कैस्सीओपेइआ ए (कैस्स ए) सुपरनोवा अवशेष

कैस्सीओपेइआ ए (कैस्स ए) सुपरनोवा अवशेष

सुपरनोवा अवशेष कैस्सीओपेइआ ए (कैस्स ए) ११,००० प्रकाश वर्ष दूर है। इस सुपरनोवा से विस्फोट के पश्चात प्रकाश ३३० वर्ष पहले पहुंचा था। इस सुपरनोवा विस्फोट के पश्चात फैलता हुआ मलबा १५ प्रकाशवर्ष की चौड़ाई मे है। इस सुपरनोवा के मध्य मे एक न्यूट्रॉन तारा है जो अत्याधिक घनत्व का है और मातृ तारे के केन्द्रक के घनीभूत हो जाने से बना है। महाकाय मातृ तारे के मृत्यु के समय सुपर नोवा विस्फोट मे केन्द्रक न्यूट्रॉन तारा बन गया और बाहरी परतों से यह विशालकाय ग्रहीय निहारिका। यह चित्र प्रकाशीय चित्र और एक्स किरणो के मिश्रण से बना है। कैस्स ए अब ठंडा हो रहा है लेकिन इसमे इतनी उर्जा शेष है जो एक्स किरणो का उत्सर्जन करने मे समर्थ है। चन्द्रा एक्स किरण वेधशाला से पिछले १० वर्षो के निरिक्षण के आंकड़ो के अनुसार यह न्यूट्रॉन तारा तेजी से ठंडा हो रहा है। ठंडा होने की यह दर इतनी अधिक है कि इस न्यूट्रॉन तारे के केन्द्रक का अधिकतर भाग एक घर्षणरहित न्यूट्रॉन द्रव का निर्माण कर रहे है। चन्द्रा वेधशाला के परिणामो ने पदार्थ की इस विचित्र अवस्था के प्रमाण प्रथमतः उपलब्ध किये है।

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