अविश्वसनीय, अद्भुत और रोमाँचक: अंतरिक्ष

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विशालकाय निहारिका टारान्टुला

In आकाशगंगा, निहारीका on मार्च 18, 2011 at 5:06 पूर्वाह्न

विशालकाय निहारिका टारान्टुला !

विशालकाय निहारिका टारान्टुला !

मानव की कल्पना से भी विशालकाय निहारिका टारान्टुला ! यह निहारिका हमारी आकाशगंगा की उपग्रह आकाशगंगा(विशाल मेगेल्लेनिक बादल) मे १७०,००० प्रकाशवर्ष दूरी पर है। यह चित्र हब्बल दूरबीन द्वारा लिया गया है और उसके मध्य भाग को दिखा रहा है। यह निहारिका इतनी विशाल है कि हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला एक बार मे पूरी निहारिका का चित्र नही ले सकती है। इस निहारिका मे तेज गति से असंख्य तारो का जन्म हो रहा है।

चित्र पर क्लीक कर इसे अपने पूरे आकार मे देंखे।

इस चित्र मे गैस, धूल और तारे बेतरतीबी से बिखरे पड़े है। इनमे से कुछ तारे नवजात है। लेकिन इस चित्र के मध्य बाएं मे धागे जैसी संरचना पर ध्यान दें, यह सुपरनोवा विस्फोट के बाद संपिड़ित बादलो की परते है, यह तारा इस चित्र के मध्य मे विस्फोटित हुआ होगा। यह तारा विशालकाय रहा होगा जो अपनी छोटे जीवन को जीने के बाद विस्फोट से मृत्यु को प्राप्त हुआ होगा। (कोई तारा जितना बड़ा होता है , उतनी तेजी से अपने इंधन का उपभोग करता है, और उतनी छोटी जिंदगी जीता है।) इस तारे के विस्फोट से मलबा लांखो किमी प्रति सेकंड की गति से फैला होगा। इस विस्फोट की तरंगो से इस निहारिका की गैस संपिड़ित हुयी होगी और कई नये तारो का जन्म हुआ होगा।

इस निहारिका को आप एक छोटे बायनाकुलर से भी देख सकते है। इसके लिए आपको दक्षिणी गोलार्ध(उदा. आस्ट्रेलीया, न्युजीलैंड) मे होना चाहीए।

अल्बर्ट आइंस्टाइन

In वैज्ञानिक on मार्च 15, 2011 at 8:28 पूर्वाह्न

 

अल्बर्ट आइंस्टाइन

अल्बर्ट आइंस्टाइन

आज महान भौतिक विज्ञानी अल्बर्ट आइंस्टाइन का जन्मदिन है। आइंस्टाइन प्रचार और प्रसार से चिढते थे। एक बार एक पत्रकार ने उनकी  फोटो लेने के लिए अनुरोध किया, वे चिढ़कर जीभ निकाल कर खड़े हो गये, उस पत्रकार ने ऐसा मौका नही खोया ! और यह है उसी मौके का चित्र !

अल्बर्ट आइंस्टाइन का जन्म जर्मनी में वुटेमबर्ग के एक यहूदी परिवार में १४ मार्च १८७९ को हुआ था। वे सापेक्षता के सिद्धांत और द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण E = mc2 के लिए जाने जाते हैं। उन्हें सैद्धांतिक भौतिकी, खासकर प्रकाश-विद्युत प्रभाव की खोज के लिए १९२१ में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। आइंसटाइन ने सापेक्षता के विशेष और सामान्य सिद्धांत सहित कई खोजो मे योगदान दिया था।

इस सादगी के पूजारी ने इजराइल के राष्ट्रपति बनने का प्रस्ताव भी ठुकरा दिया था।

एक युग का अंत: डिस्कवरी अपनी अंतिम उड़ान से वापिस

In अंतरिक्ष, अंतरिक्ष यान on मार्च 10, 2011 at 4:41 पूर्वाह्न

डिस्कवरी अंतरिक्ष यान अपनी अंतिम यात्रा से वापसी पर

डिस्कवरी अंतरिक्ष यान अपनी अंतिम यात्रा से वापसी पर

मार्च ९,२०११ बुधवार को ११.५७ सुबह (पूर्वी अमरीका स्थानीय समय) पर डिस्कवरी अंतरिक्ष यान अपनी अंतिम उड़ान से सकुशल पृथ्वी पर लैंड कर गया। यह चित्र इसी ऐतिहासिक क्षण का है। डिस्कवरी अंतरिक्ष यान ने हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला को कक्षा मे स्थापित किया था, दो बार उसकी मरम्मत की थी। इसी यान ने युलीसीस शोध यान का प्रक्षेपण किया था, यह यान मीर अंतरिक्ष केन्द्र से जुड़ने वाला अंतिम यान था, चैलेंजर और कोलंबीया दूर्घटना के बाद उड़ान भरने वाला यान डीस्कवरी ही था। इसी यान ने सर्वाधिक समय अंतरिक्ष मे बिताया था। कुल ३६५ दिन, पूरा एक वर्ष। एक अंतरिक्ष यान जिसने कुल २३८,०००,००० किमी की यात्रा की है। मानव निर्मित सबसे ज्यादा उपयोग किया गया अंतरिक्ष यान ! इस यान के चक्के अब हमेशा के लिये पृथ्वी पर थम गये है।

ठंडा होता हुआ न्यूट्रॉन तारा

In अंतरिक्ष, तारे, निहारीका on मार्च 9, 2011 at 5:13 पूर्वाह्न

 

कैस्सीओपेइआ ए (कैस्स ए) सुपरनोवा अवशेष

कैस्सीओपेइआ ए (कैस्स ए) सुपरनोवा अवशेष

सुपरनोवा अवशेष कैस्सीओपेइआ ए (कैस्स ए) ११,००० प्रकाश वर्ष दूर है। इस सुपरनोवा से विस्फोट के पश्चात प्रकाश ३३० वर्ष पहले पहुंचा था। इस सुपरनोवा विस्फोट के पश्चात फैलता हुआ मलबा १५ प्रकाशवर्ष की चौड़ाई मे है। इस सुपरनोवा के मध्य मे एक न्यूट्रॉन तारा है जो अत्याधिक घनत्व का है और मातृ तारे के केन्द्रक के घनीभूत हो जाने से बना है। महाकाय मातृ तारे के मृत्यु के समय सुपर नोवा विस्फोट मे केन्द्रक न्यूट्रॉन तारा बन गया और बाहरी परतों से यह विशालकाय ग्रहीय निहारिका। यह चित्र प्रकाशीय चित्र और एक्स किरणो के मिश्रण से बना है। कैस्स ए अब ठंडा हो रहा है लेकिन इसमे इतनी उर्जा शेष है जो एक्स किरणो का उत्सर्जन करने मे समर्थ है। चन्द्रा एक्स किरण वेधशाला से पिछले १० वर्षो के निरिक्षण के आंकड़ो के अनुसार यह न्यूट्रॉन तारा तेजी से ठंडा हो रहा है। ठंडा होने की यह दर इतनी अधिक है कि इस न्यूट्रॉन तारे के केन्द्रक का अधिकतर भाग एक घर्षणरहित न्यूट्रॉन द्रव का निर्माण कर रहे है। चन्द्रा वेधशाला के परिणामो ने पदार्थ की इस विचित्र अवस्था के प्रमाण प्रथमतः उपलब्ध किये है।

शनि के घर से :रीआ, डिओने और वलय

In अंतरिक्ष, ग्रह on मार्च 1, 2011 at 4:29 पूर्वाह्न

 

रीआ, डीओने और शनि के वलय

रीआ, डीओने और शनि के वलय

कासीनी अंतरिक्षयान द्वारा ली गयी ये अद्भूत तस्वीर !
इस चित्र मे उपर का पिंड शनि का चंद्रमा रीआ है, जो कि १५०० किमी व्यास का है। इस चित्र मे रीआ का दक्षिणी ध्रुव दिखायी दे रहा है। दूर दिखायी दे रहा चंद्रमा डीओने है, जो ११०० किमी व्यास का है। कासीनी शनि के विषुवत के प्रतल मे है, इस कारण शनि के वलयो के किनारे ही दिखायी दे रहे है। ध्यान दें कि डीओने शनि के वलयो के दूसरी ओर दिखायी दे रहा है जिससे उसका निचला हिस्सा वलयों से ढंका हुआ है। इस चित्र मे शनि दिखायी नही दे रहा है लेकिन वह इस चित्र के बायें है।

रीआ डीओने से थोड़ा ही बड़ा है लेकिन वल इस चित्र को लेते समय कासीनी के समीप अर्थात ६१,००० किमी पर था जबकि डीओने ९२४,००० किमी पर था। इसलिये डीओने इतना छोटा दिख रहा है। इस चित्र मे डीओने पृथ्वी से चंद्रमा के दृश्य आकार से दुगुना दिखायी दे रहा है। डीओने और रीआ पानी की बर्फ और कुछ मात्रा मे चट्टान से बने है। दोनो पर उल्कापातो से बने क्रेटर बड़ी मात्रा मे दिखायी दे रहे है।

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