सुंदरता का राज

शनि की सुंदरता का राज क्या है ? निश्चय ही उसके सुंदर वलय !

१७०० मे जब गैलेलियो ने शनि को अपनी दूरबीन से देखा तो वह आश्चर्यचकित रह गया। उसे शनि के दोनो ओर उभार दिखायी दिये। उसने अपने सहयोगी से कहा “ऐसा लगता है कि शनि के दो कान भी है !”

उपर दी गयी तस्वीर कासीनी उपग्रह से ली गयी तस्वीरो को जोड कर एक चलचित्र है। इस चित्र मे शनि के चन्द्रमा टाईटन की कक्षा के अंदर के चन्द्र्मा और वलय दिखायी दे रहे है। इस चित्र मे आप शनि के वलय बनाने वाले कणो का घनत्व और चमक देख सकते है। चित्र मे शनि के चन्द्रमा एनक्लीडस, मीमीस, जनुस, एपीअमेथेस, प्रामेथस और पैण्डोरा को भी देख सकते है। शनि के ये वलय शनि की परिक्रमा करते है लेकिन ये शनि को छुते नही है।

शनि के मुख्य रूप से सात वलय है। जो शनि से दूरी के अनुसार D,C,B,A,F,G,E के नाम से जाने जाते है।

शनि के मुख्य वलय

वलय A और वलय B के मध्य एक खाली जगह है जिसे कासीनी अंतराल कहते है। ये वलय चमत्कारीक रूप से पतले है, इनकी चौडाई १०० किमी से भी ज्यादा है लेकिन मोटाइ १०० मिटर के आसपास है। ये कुछ इस तरह है कि किसी फुटबाल के मैदान पर एक टीश्यु पेपर को फैला दिया जाये।

शनि के वलय

वलय A: यह वलय शनि की दो सबसे चमकदार वलयो मे से बाहरी वलय है। एक छोटा सा चन्द्रमा एटलस इस वलय के कुछ बाहर ही शनि की परिक्रमा करता है। इस वलय के बाहरी किनारे के पास एक छोटा अंतराल है जिसे एंके अंतराल कहते है। इस अंतराल मे भी शनि का एक छोटा सा चन्द्रमा पैन परिक्रमा करता है। इस अंतराल से बाहर एक अपेक्षाकृत छोटा अंतराल (कीलर अंतराल Keelar)और है जिसमे भी एक चन्द्रमा डैफनीस परिक्रमा करता है।

कासीनी अंतराल : शनि के मुख्य वलय A और B के मध्य का अंतराल। यह बडा अंतराल है। इस अंतराल मे चन्द्रमा मीमास परिक्रमा करता है।

वलय B : यह वलय A की तुलना मे ज्यादा घना है , इतना घना है कि ये एक अपारदर्शी वलय है। इसे बनाने वाले कण कीसी तरल पदार्थ की तरह शनी की परिक्रमा करते है। यह वलय अनेक छोटे छोटे वलय से बना एक बडा वलय प्रतित होता है। इसमे हब्बल और कासीनी उपग्रह ने स्पोक के जैसी संरचना भी देखी है।

वलय C: यह वलय B वलय से अंदर है। इसका घन्त्व कम है और लगभग पारदर्शी है।

वलय D : यह वलय D वलय से अंदर है, ये काफी धुंधला वलय है।

वलय F : यह वलय A वलय के बाहर है। इसे पायोनियर ११ ने देखा था।

वलय G और E : ये शनी के बाहरी और धुंधले वलय है।

2 Comments

  1. Posted January 31, 2007 at 2:19 pm | Permalink

    अन्य ग्रहो से शनि को उसके वलय अलग पहचान देते है.
    सुन्दर चित्र व उपयोगी जानकारी.

  2. Posted January 31, 2007 at 5:52 pm | Permalink

    सुंदर, यार, इस टाईप का एकाध चित्र, जो उड़न तश्तरी टाईप दिखता हो, जरा हमें भी दो, ब्लाग के हैडर में लगाने के लिये… :)

    सुन्दर चित्र है. ज्ञानवर्धन के लिये वाकई धन्यवाद.


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