यह विचित्र आकाशीय पिंड कैसा है ? इस विचित्र पिंड का कुछ भाग कोयले के जैसा गहरा है जबकि शेष भाग बर्फ के जैसे चमकीला है। यह शनि का चंद्रमा आऐपिटस है। इसके गहरे रंग के भाग की संरचना अज्ञात है लेकिन अवरक्त वर्णक्रम की जांच से माना जाता है कि यह कार्बन के ही कीसी गहरे प्रकार से बना है। आऐपिटस के विषुवत पर एक असाधारण पर्वत श्रेणी है जो इस चंद्रमा को अखरोट के जैसे बनाती है। यह चित्र अमरीकी अंतरिक्षयान कासीनी से 2007 मे लिया है जब कासीनी आऐपिटस से 75,000 किमी दूरी पर था। चित्र मे दिखायी दे रहे विशाल क्रेटर का व्यास 450 किमी है और ऐसा प्रतित होता है कि इसने एक समान आकार के पुराने क्रेटर को ढंका हुआ है। गहरे रंग के पदार्थ ने इसके पूर्वी क्षेत्रो मे समान रूप से पर्वतो और क्रेटरो को से ढंका हुआ है। इस गहरे रंग के पदार्थ की मोटाई लगभग 1 मीटर से कम है।
खूबसूरत आइंस्टाइन वलय
In अंतरिक्ष, आकाशगंगा on जनवरी 10, 2012 at 6:00 पूर्वाह्नइस चित्र के मध्य मे दिखायी दे रहा लाल-पिले रंग का पिंड एक सम्पूर्ण आकाशगंगा है। लेकिन इस आकाशगंग के चारो ओर निले रंग का वलय क्या है और कैसे बना है ?
यह निले रंग का वलय गुरुत्विय लेंसीग से बनी मृगतृष्णा(mirage) है। इसे आइन्सटाइन वलय (Einstein Ring) कहते है। आइन्सटाइन वलय किसी तारे या आकाशगंगा द्वारा उत्सर्जित प्रकाश के किसी महाकाय पिंड (आकाशगंगा या श्याम विवर) के गुरुत्वाकर्षण द्वारा एक वलय के रूप मे विरूपण से निर्मित होती है।
चित्र के मध्य मे दिखायी दे रही आकाशगंगा के पिछे एक निले रंग की आकाशगंगा है। इस पृष्ठभूमी की आकाशगंगा से उत्सर्जित प्रकाश को सामने वाली आकाशगंगा का गुरुत्वाकर्षण विकृत कर एक वलय का रूप दे रहा है। इस तरह के वलय का पूर्वानुमान आइनस्टाइन ने लगभग 70 वर्ष पहले लगाया था और इसे 2007 मे देखा गया।
यह चित्र एक प्रकाशीय लाल आकाशगंगा(luminous red galaxy) LRG 3-757 का है और इसे हब्बल अंतरिक्ष वेधशाला के विस्तृत क्षेत्र कैमरा – 3(Wide Field Camera 3) से लिया गया है।
गुररूत्विय लेंसीग के बारे ज्यादा जानकारी के लिये निचे दिये गये लेख पढें।
अंतरिक्ष मे मानव की चहलकदमी
In अंतरिक्ष यान, अंतरिक्ष वाहन on जनवरी 3, 2012 at 4:04 पूर्वाह्नयह चित्र 2001- अ स्पेस ओडीसी फिल्म का नही है।
यह चित्र है अमरीकी अंतरिक्ष शटल चैलेंजर के मालवाहक कक्ष से लगभग 100 मीटर दूरी पर ब्रुस मैककैन्ड्लेस द्वितीय का। किसी अंतरिक्ष यान से सबसे ज्यादा दूरी पर पहुंचने वाले प्रथम मानव। ब्रुस मानव संचालन इकाई (Manned Maneuvering Unit -MMU) के प्रयोग से अंतरिक्ष मे स्वतंत्र रूप से तैर रहे थे। ब्रुस और नासा के सहयोगी अंतरिक्षयात्री राबर्ट स्टीवार्ट इस तरह की अंतरिक्ष चहलकदमी करनेवाले प्रथम अंतरिक्ष यात्री थे, जिसमे वे किसी डोर से अंतरिक्ष यान से बंधे नही थे। यह चहलकदमी 1984 मे अमरीकी अंतरिक्ष शटल के 41B अभियान के दौरान की गयी थी। इस दौरान MMU नाइट्रोजन गैसे के उत्सर्जन जेट द्वारा नियंत्रीत होता है और इसे उपग्रहो की स्थापना और मरम्मत के लिये प्रयोग किया जाता है। इसका द्रव्यमान 140 किग्रा है लेकिन अंतरिक्ष मे अन्य वस्तुओं की तरह भारहीन होता है। वर्तमान मे MMU की जगह पिठ पर बांधे जाने वाले ज्यादा सुरक्षित SAFER का प्रयोग होता है।


